हिंदी विवेक : we work for better world...

सड़कों के देशव्यापी संजाल के निर्माण एवं उनकी रक्षा के लिए केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष २०१५-१६ में प्रभावी कदम उठाए, ताकि सड़कें तकनीकी दृष्टि से मजबूत और यात्रियों के लिए सुरक्षित हो और वे सक्षम एवं टिकाऊ विकास को बढ़ावा दे सके। तुलनात्मक दृष्टि से विचार करें तो पिछले दो वर्षों की अवधि में सड़कों का तेजी से विकास हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एक्सप्रेस मार्ग वर्ष २०१३-१४ में जहां ९२,८५१ किमी थे, जो वर्ष २०१४-१५ में ९६,२१४ किमी एवं वर्ष २०१५-१६ में १,००,४७५ किमी हो गए। वर्ष २०१५-१६ में देश में १,४८,२५६ किमी राज्य राजमार्ग एवं ४९,८३,५७० किमी अन्य मार्ग थे।
राष्ट्रीय राजमार्ग विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वर्तमान में ५४,७४८ किमी राष्ट्रीय राजमार्गों, पूर्वोत्तर के लिए एसएआरडीपी योजना के अंतर्गत १०,१४१ किमी तथा उग्रवादियों से प्रभावित क्षेत्रों में एलडब्लूई योजना के तहत ५,४७७ किमी मार्गों के निर्माण का कार्य चल रहा है। वर्ष २०१४-१५ में ७५६६ किमी मार्गों के निर्माण का कार्य आरंभ किया गया और ४४१० किमी के मार्ग पूरे किए गए, जबकि वर्ष २०१५-१६ में १०,००० किमी मार्गों के निर्माण का काम शुरू किया गया और ६०२९ किमी मार्गों का निर्माण कार्य पूरा हो गया।

पूर्वोत्तर राज्यों में राजमार्ग

मंत्रालय ने कुल प्रावधान के १०% पूर्वोत्तर के राज्यों के लिए आबंटन किया है। पूर्वोत्तर में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लम्बाई १३,२५८ किमी, जिन्हें राज्य पीडब्लूडी, सीमा सुरक्षा संगठन, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग अधिकरण (एनएचएआई) एवं राष्ट्रीय राजमार्ग एवं संरचना विकास निगम (एनएचआईडीसीएल) के जरिए विकसित किया जा रहा है। इनमें से १२,४७८ किमी का कार्य एनएचआईडीसीएल एवं राज्य पीडब्लूडी तथा ७८२ किमी का कार्य एनएचएआई जिम्मे है। पूर्वोत्तर एवं पहाड़ी क्षेत्रों (हिप्र, उत्तराखंड एवं जम्मू-कश्मीर) तथा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ७,१४८ किमी की १०९ परियोजनाएं चल रही हैं।

नक्सल पीड़ित क्षेत्रों में राजमार्ग

नक्सल पीड़ित क्षेत्रों में राजमार्गों के विकास के कार्य में तेजी आई है। वर्ष २०१४-१५ में ८२ किमी का नया काम शुरू किया गया और कुल ६५५ किमी का कार्य पूरा हुआ। वर्ष २०१५-१६ में ३०९.५ किमी का काम आरंभ किया गया और ३९२ किमी का काम पूरा हुआ। रांची विजयवाड़ा मार्गिका का वर्ष २०१४-१५ में ९४ किमी का काम पूरा हुआ, जबकि कोई नया काम शुरू नहीं किया गया था। वर्ष २०१५-१६ में १५७ किमी का नया काम शुरू किया गया और८१.४ किमी का काम पूरा हुआ।

नई योजनाएं

भारतमालाः

छोटे बंदरगाहों, पिछड़े क्षेत्रों, धार्मिक स्थानों, पर्यटन स्थलों, चार धाम के सम्पर्क मार्गों में सुधार तथा राष्ट्रीय राजमार्गों से हर जिला मुख्यालय को जोड़ने के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की यह योजना है। इसका विस्तृत कार्यक्रम बनाया जा रहा है।

सेतु भारतम्ः

देश में सभी २०८ समपार क्रासिंग पर रेल्वे ओवर ब्रिज (आरओबी) या रेल्वे अंडर ब्रिज (आरयूबी) बना कर सड़क परिवहन सुरक्षित बनाने का यह कार्यक्रम है। इसका लक्ष्य २०१९ तक सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेल्वे क्रासिंग से मुक्त करना है। समपार क्रासिंग पर सदा होने वाली दुर्घटनाओं एवं जनहानि को बचाने के लिए यह पहल की गई है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत २०,८०० करोड़ रु. की लागत से २०८ समपारों पर आरओबी/आरयूबी बनाए जाएंगे। ७३ आरओबी की परियोजना रिपोर्टें प्राप्त हो चुकी हैं और इनमें से ५,६०० करोड़ की ६४ परियोजनाएं को वित्त वर्ष २०१५-१६ में मंजूरी की प्रक्रिया में थीं। इसके अलावा, ३०,००० करोड़ रु. की लागत से पुराने, जर्जर हुए पुलों की मरम्मत एवं विस्तार की योजना चरणबद्ध तरीके से चलाई जाएगी। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाने के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं।

अति व्यस्त मार्ग

सरकार ने वडोदरा-मुंबई एवं दिल्ली-मेरठ जैसे अति व्यस्त मार्गों के साथ १,००० किमी के द्रुत गति मार्ग (एक्सप्रेस वे) की योजना को मंजूरी प्रदान की है। मंजूर द्रुत गति मार्ग निम्न हैं-
१. दिल्ली-मेरठ (६६ किमी)ः पहले चरण में दिल्ली-हापुड़ के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या २४ को तीन स्तरों से विकसित किया जाएगा- निजामुद्दीन ब्रिज से दिल्ली-उप्र सीमा तक ६ लेन द्रुत गति मार्ग +८ लेन राष्ट्रीय राजमार्ग, वहां से आगे दसना तक ६ लेन द्रुत गति मार्ग +८ लेन राष्ट्रीय राजमार्ग तथा दसना से हापूड़ तक दोनों ओर सर्विस रोड़ के साथ ६ लेन का राष्ट्रीय राजमार्ग। यह परियोजना शुरू हो चुकी है।
२. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (१३५ किमी)ः हरियाणा सरकार इस मार्ग को बना रही है। हरियाणा के पलवल से दसना होकर कुंडली जाने वाले इस मार्ग पर ४४१७.८९ करोड़ रु. की लागत आएगी। इसका प्रत्यक्ष काम शुरू हो चुका है।
३. वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (१३५ किमी)ः यह मार्ग भी हरियाणा सरकार की ओर से बनाया जा रहा है। यह दो भागों में है। ५२ किमी के मनेसर-पलवल भाग की योजना पर ४०१.४९ करोड़ रु. की लागत आई है। यह मार्ग पूरा हो चुका है और १ अप्रैल २०१६ से वह जनता के लिए खुला भी किया गया है। ८३ किमी के कुंडली-मनेसर मार्ग पर १८६३ करोड़ रु. की लागत आएगी। इस पर काम शुरू हो चुका है और ३१ अगस्त २०१८ तक पूरा होना है।

अन्य मार्गों में हैं- वडोदरा-मुंबई कारिडोर (४०० किमी), राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ४ पर बंगलूर-चेन्नई (३३४ किमी), राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ६ पर दिल्ली-जयपुर (२६१ किमी), राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या १ एवं २२ पर दिल्ली-चंडीगढ़ (२४९ किमी), राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या २ पर कोलकाता-धनबाद (२७७ किमी) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या २ पर दिल्ली-आगरा (२०० किमी)। सरकार ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे एवं वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे को प्राथमिकता के आधार पर लिया है।

नीतिगत सुधार

सड़क परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए गए हैं, जो हैं-
१. कार्य का माध्यमः मंत्रिमंडल ने परियोजना को पीपीपी/ईपीसी माध्यम से देने का निर्णय करने का सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को अधिकार प्रदान किया है।
२. परियोजना मंजूरी में गतिः मंत्रालय को १,००० करोड़ रु. तक की परियोजनाओं का मूल्यांकन करने का अधिकार प्रदान किया गया है, जबकि पहले यह सीमा ५०० करोड़ रु. थी।
३. अंतर-मंत्रालयीन समन्वय गतिशीलः पर्यावरण एवं वन, रेल्वे एवं रक्षा मंत्रालयों की मंजूरी से सम्बंधित मामले निपटाने एवं मंजूरी प्रदान करने के लिए परिवहन मंत्री के नेतृत्व में संरचनात्मक समूह गठित किया गया है। आरओबी/आरयूबी की ड्राइंग्ज को ऑन-लाइन मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी लाई गई है। वन एवं पर्यावरण अनुमति को असम्बद्ध कर दिया गया है। पहले चरण में वृक्षों को काटने आदि के लिए अनुमति मान ली जाएगी।
४. निर्गम नीतिः सीसीईए ने निजी विकासकों को अनुमति दी है कि बीओटी परियोजना कार्यरत होने पर दो वर्ष के बाद वे अपनी पूरी इक्विटी वापस ले सकेंगे। इससे पूरी हुई परियोजनाओं में विकासकों की पूंजी अटकी नहीं रहेगी।
५. विलम्बित परियोजनाओं का पुनर्जीवनः सीसीईए ने विलम्बित बीओटी परियोजनाओं को पुनः कार्यरत करने की छूट दी है। इससे इन परियोजनाओं को प्रत्यक्ष में पूरा किया जा सकेगा और जनता को राहत मिलेगी।
६. परियोजना अमल पर नए माडल को प्रोत्साहनः सीसीईए ने राजमार्ग परियोजनाओं को पूरा करने के लिए परियोजना लागत के ४०% राशि निर्माण के दौरान ‘निर्माण सहायता’ के रूप में सरकार की ओर से दी जाएगी। शेष ६०% राशि रियायती अवधि के लिए बाजार ब्याज दर पर उपलब्ध होगी। इस माडल के अंतर्गत फिलहाल तीन परियोजनाएं ली गई हैं।
७. बीओटी परियोजनाओं के लिए आदर्श रियायती समझौते में संशोधनः सचिवों की समिति ने अगस्त २०१५ में कुछ संशोधनों को मंजूरी दी है। इससे राजमार्ग परियोजनाओं के निर्माण एवं विकास में गति आएगी।
८. पूंजीगत लागत से अन्य कार्यों की लागत को हटानाः परियोजनाओं के मूल्यांकन में एवं मंजूरी में तेजी लाने के लिए यह निर्णय किया गया है।
९. विलम्बित परियोजनाओं को रियायतः इसके अंतर्गत विलम्बित बीओटी परियोजनाओं को अधिक रियायती अवधि दी जाएगी।

इन उपायों से सड़कों के निर्माण में तेजी आई है।

सड़क सुरक्षा

सड़क दुर्घटनाओं में सन २०२० तक ५०% की कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पाने के लिए निम्न कदम उठाए गए हैं-
• राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा नीतिः इस नीति के तहत जागरुकता लाने, सड़क सुरक्षा सूचना डेटाबेस की स्थापना, सुरक्षित सड़क संरचना, सुरक्षा कानूनों आदि को लागू करना जैसे कई नीतिगत कदम उठाए गए हैं।
• राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषदः यह परिषद सड़क सुरक्षा के बारे में नीतिगत निर्णय करेगी। राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को भी ऐसी परिषदों के गठन का सुझाव दिया गया है।
• मंत्रालय ने चार-ई आधार पर बहुआयामी दीर्घावधि रणनीति बनाई है। ये चार ई हैं- एज्यूकेशन (शिक्षा), इंजीनियरिंग (सड़क एवं वाहन दोनों के लिए), एन्फोर्समेंट (अमल) एवं इमर्जंसी केयर (आपात सहायता)।
• मंत्री समूहः मंत्रालय ने आठ राज्यों का मंत्री समूह बनाया है, जो दुर्घटनाओं को कम करने विचार-विमर्श कर सुझाव देगा। अप्रैल में इस समूह की पहली बैठक हो चुकी है।
• मीडिया अभियानः मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा के लिए मीडिया अभियान शुरू किया है। स्वैच्छिक संगठनों की सड़क सुरक्षा में सहायता ली जा रही है।
• सड़क सुरक्षा को सड़क डिजाइन का अविभाज्य अंग बनाया गया है। राष्ट्रीय राजमार्गों के चुनिंदा क्षेत्रों में सुरक्षा स्थितियों का सर्वेक्षण किया जा रहा है।
• रम्बल स्ट्रीप्स, जंक्शनों पर रिफ्लेक्टिव स्टिकएर्ंस, साइनबोर्ड, सतर्कता बोर्ड, गति प्रतिबंध आदि अल्पावधि उपाय भी किए गए हैं। दीर्घावधि कदम के रूप में अंडरपास, बायपास, फ्लाईओवर एवं ४-लेन व्यवस्था की जा रही है।
• ७२३ दुर्घटना स्थलों की पहचान की गई है और सड़कों के अभियांत्रिकी सुधार के लिए ११,००० करोड़ रु. की योजना बनाई गई है।
• सभी वाहनों के लिए सुरक्षा मानक तय किए जा रहे हैं। ट्रकों पर सीमा से अधिक लम्बी छड़े लेकर चलने पर प्रतिबंध लगाया गया है। भारी वाहनों के लिए एंटी-लॉकिंग ब्रेक प्रणाली तथा वाहनों की गति पर नियंत्रण के लिए स्पीड गवर्नर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। कारों, दो पहिया वाहनों के लिए भी मानक जारी किए गए हैं।
• राजमार्ग मार्गदर्शन प्रणालीः मार्च २०१६ में इस प्रणाली को कायम किया गया। प्रायोगिक परियोजना दिल्ली-जयपुर मार्ग पर शुरू की गई। मार्ग की स्थिति के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी प्राप्त कर इसे आकाशवाणी, एफएम रेडियो से प्रसारित किया जाएगा।
• स्वयंचलित ड्राइविंग टेस्ट प्रणालीः यह पारदर्शी प्रणाली स्थापित की गई है। पुणे एवं पिंपरी चिंचवड़ में इसे लागू किया गया है। प्रति दिन करीब १५० लोगों की इस प्रणाली से ड्राइविंग टेस्ट ली जाती है। इसमें मानवी हस्तक्षेप न के बराबर है। वंडीगढ़ में भी इस प्रणाली को शुरू किया जा रहा है।
• ड्राइवर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान के लिए २५ संस्थानों को मंजूरी दी गई है। वाहनों के फिटनेस के लिए १५ इन्स्पेक्शन एवं सर्टिफिकेट केंद्र स्थापित किए गए है। महाराष्ट्र के नासिक में इस तरह के केंद्र ने अब तक १५,००० से अधिक वाहनों की जांच की है। मप्र के छिंदवाड़ा, राजस्थान के रेलमांगड़ा में ये केंद्र शुरू हो चुके हैं और बेंगलुरु (कर्नाटक) झुलीहुली (दिल्ली) एवं रोहतक (हरियाणा) में शुरू किए जा रहे हैं।
• राजमार्गों पर हर ५० किमी अंतर पर दुर्घटना की स्थिति में मदद के लिए क्रेन्स, एम्बूलेंस आदि का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ८ पर गुड़गांव- जयपुर, वडोदरा-मुंबई प्रभाग में तथा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या ३३ पर रांची-रारगांव-महुलिया खंड में सड़क दुर्घटनाओं के शिकार लोगों की कैशलेस चिकित्सा का प्रायोगिक प्रकल्प शुरू किया गया है। जनवरी २०१६ तक लगभग १४,००० लोगों ने इसका लाभ उठाया और प्रति व्यक्ति खर्च १२,००० रु. हुआ। इस योजना को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है। दुर्घटनाओं में सहायता करने वाले लोगों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं।

पर्यावरण अनुकूल यात्रा

• चार पहिया वाहनों के लिए भारत-४ प्रदूषण मानक १ अप्रैल २०१७ से अनिवार्य होगा। केवल ऐसे ही वाहनों का पंजीयन होगा और सड़क पर चल सकेंगे। बायो-इथेनॉल का ईंधन के रूप में इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। बायो-सीएनजी एवं बायो-डीजल को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा।
• वर्तमान प्रदूषणकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक हाईब्रिड एवं इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने की अनुमति दी गई है। डीजल बस को बिजली बस में परिवर्तित करने का पहला प्रयोग सफल हो चुका है।
• राष्ट्रीय राजमार्गों पर ई-टोल शुरू हो गया है। ई-रिक्षा नीति के कारण प्रदूषण कम करने में काफी सहायता मिली है।
• हरित राजमार्ग- इस नीति के अंतर्गत वृक्षारोपण, वृक्ष स्थलांतर, सौंदर्यीकरण एवं रखरखाव शामिल है। किसानों, स्वयंसेवी संगठनों, निजी क्षेत्र की कम्पनियों एवं स्थानीय लोगों का सहयोग इसमें लिया जाएगा।

ई-पहल

ई-पहल के अंतर्गत टोल वसूली की इलेक्ट्रिनिक सुविधा, बहुत बड़े एवं भारी माल संवहन को मंजूरी देने के लिए ऑन-लाइन पोर्टल, ऑन-लाइन भुगतान, सीमेंट एवं अन्य सामग्री के बाजार-स्थल के रूप में पोर्टल, टोल प्रबंध प्रणाली, सीसीटीवी निगरानी, टोल सूचना प्रणाली की सुविधा मुहैया की गई है। राजमार्गों पर सड़क के बगल में पार्किंग स्थल, रेस्तरा, सस्ते ढाबा, टेलीफोन बूथ, वाईफाई, एटीएम, पेट्रोल पम्प, विश्राम गृह, दवा दुकान, हथकरघा दुकान आदि सुविधा स्थापित करने के लिए ३९ स्थानों का चयन किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय भागीदारी

१. भारत-कोरिया सहयोगः दोनों देशों के बीच सड़क परिवहन एवं राजमार्गों के विकास के लिए आपसी समझौता हुआ है।
२. भारत-अमेरिका परिवहन भागीदारीः दोनों देशों के बीच परिवहन भागीदारी समझौता किया गया है।
३. बीबीएन मोटर वाहन समझौताः भारत, नेपाल, भूटान एवं बांग्लादेश (बीबीएन) में यात्रियों, कर्मचारियों तथा माल सवंहन यातायात के नियमन के लिए ऐतिहासिक समझौता हुआ है। इससे इन देशों के बीच लोगों एवं वाहनों की आवाजाही सुचारू होगी। ढाका-दिल्ली एवं कोलकाता-खुलना मार्ग पर यात्री एवं माल वहन की योजना प्रस्तावित है।
४. भारत-बांग्लादेश यात्री बस सेवाः दोनों देशों के बीच इसके लिए समझौता हो चुका है। गुवाहाटी-शिलांग-ढाका मार्ग एवं ढाका होकर कोलकाता अगरतला मार्ग पर बस सेवाएं शुरू हो चुकी हैं।
५. मैत्री कार रैलीः बीबीआईएन देशों में मित्रता संवर्धन के लिए भुवनेश्वर से कार रैली निकाली गई, जो पूर्वोत्तर राज्यों से होते हुए भूटान एवं बांग्लादेश गई और कोलकाता में समाप्त हुई।
६. भारत, म्यांमार, थाईलैण्ड वाहन समझौताः तीनों देशों के बीच सड़क वाहन यातायात आरंभ करने के लिए विचार-विमर्श चल रहा है। प्रस्तावित समझौते के अंतर्गत भारत के इम्फाल से म्यांमार के मंडाले तक प्रायोगिक सफर किया गया। म्यांमार चाहता है कि यह मार्ग बैंकांक तक बढ़ाया जाए।
७. भारत-नेपाल सीमापार परिवहन सुविधाः भारत-नेपाल के बीच गठित संयुक्त कार्यदल ने सीमा पार बस परिवहन के लिए चार नए मार्गों को प्रस्तावित किया है। वे हैं- काठमांडु-पटना-बोधगया, महेंद्रनगर-दिल्ली, सिलीगुडी-कक्कड़भीटा-काठमांडु एवं जनकपुर-पटना। दोनों पक्ष इस पर सहमत हुए और अब आगे की कार्यवाही चल रही है।

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu