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देश की जनता के लिए चौबीसों घंटे अविरत बिजली की अनोखी योजना विद्युत, कोयला एवं नवीन और नवीनीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने आरंभ की है। इस योजना का नाम उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना (उदय) है। इस योजना का विवरण आगे है ही, इसके पूर्व मंत्रालय की अन्य उपलब्धियों पर जरा गौर करें। मोदी शासन के दो वर्ष की अल्पावधि में ही उदय योजना समेत १३ विशेष उपलब्धियां मंत्रालय ने हासिल की हैं, जिससे ऊर्जा मंत्रालय में आई निराशा की स्थिति आशा की ऊंचाइयों को छू गई हैं।

इन उपलब्धियों में हैं- वर्ष २०१५-१६ के दौरान ७१०८ गांवों में बिजली पहुंचाई गई, जो कि पूर्ववर्ती ३ वर्षों के मुकाबले ३७% ज्यादा है। मौजूदा पारंपारिक ऊर्जा क्षमता में ४६,५४३ मेगावाट की वृद्धि हुई है, जो कि पूरी क्षमता का पांचवां हिस्सा है। मोदी शासन के पूर्व के दो वर्षों में ४६ सीकेएम की वितरण लाइनें बिछाई गईं, जबकि पिछले दो वर्षों में यह संख्या बढ़ कर ६९ सीकेएम प्रति दिन हो गई। संवितरण में बिजली की क्षति की दर २००८-९ में ११.१% थी, जो २०१५-१६ में घट कर २.१% हो गई। ७४ कोयला ब्लाकों की पारदर्शी नीलामी और आबंटन किया गया, जिससे सभी कोयलाधारी राज्यों को खदानों के जीवनकाल में ३.४४ लाख करोड़ रु. का लाभ संभव है। कोल इंडिया लि. ने इन दो वर्षों में कोयले का ७.८ करोड़ टन का रिकार्ड उत्पादन किया। सन २०१४ से सौर ऊर्जा क्षमता में ४१३२ मेगावाट अर्थात १५७% की बढ़ोत्तरी हुई। २०१५-१६ में ९ करोड़ एलईडी बल्बों का वितरण किया गया, जो कि २०१३-१४ के मुकाबले १५० गुना ज्यादा है। इसी वर्ष में ३१,४७२ सौर पम्प लगाए गए। यह संख्या १९९१ में योजना आरंभ किए जाने के बाद की कुल संख्या से भी ज्यादा है। अधिक पारदर्शिता एवं जवाबदेही के लिए मोबाइल एप्लीकेशन जारी किया गया। ‘गर्व’ एप्लीकेशन ग्रामीण विद्युतीकरण को ट्रैक करेगा। वास्तविक समय में बिजली की कीमत और उपलब्धता की निगरानी के लिए विद्युत प्रवाह एप्लीकेशन होगा। एलईडी वितरण की निगरानी के लिए उजाला एप्लीकेशन है।

उज्ज्वल डिस्काम (उदय) योजना

इस योजना का ‘डिस्कॉम’ शब्द देश की बिजली वितरण कम्पनियों (डिस्ट्रिब्यूशन कम्पनीज) के संदर्भ में हैं। इन कम्पनियों का संचित घाटा मार्च २०१५ तक ३.८ लाख करोड़ रु. और बकाया ॠण ४.३ लाख करोड़ है। सालों से चल रहे इस वित्तीय संकट के कारण ये कम्पनियां उचित मूल्य में पर्याप्त बिजली की आपूर्ति नहीं कर पा रही थीं और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा था। इसे दूर कर डिस्कॉम कम्पनियों को स्वस्थ बनाने के लिए पहली बार इस तरह की पहल की गई है। इस योजना के अंतर्गत राज्य वर्ष २०१५-१६ में डिस्कॉम का ७५% और २०१६-१७ में २५% ॠण का निपटारा करेंगे। जो ॠण राज्य नहीं चुका पाएंगे, वे भागीदार बैंक एवं वित्तीय सस्स्थान बॉंड में बदल देंगे। भविष्य में होने वाले घाटे को भी राज्यों को वहन करना पड़ेगा। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना से केंद्र उन्हें अतिरिक्त सहायता देगा। इससे डिस्कॉम का वित्तीय पुनर्गठन हो जाएगा और वे स्वस्थ बनेंगी तो बिजली के क्षेत्र में भारी सुधार होगा। बिजली क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए १ लाख करोड़ रु. के उदय बॉंड्स भी जारी किए गए।

हर गांव में बिजली

१ अप्रैल २०१५ की स्थिति के अनुसार १८,४५२ गांव बिजली से वंचित थे। २०१५-१६ के लिए आरंभिक लक्ष्य २,८०० गांवों में बिजली पहुंचाने का था, लेकिन प्रत्यक्ष में ७१०८ गांवों में बिजली पहुंचाई गई, जो वंचित गांवों का ४०% हिस्सा है। एक साल में ही किया गया यह असाधारण कार्य है।

बिजली वितरण

नई सरकार की दो वर्ष की अवधि में ही सर्वाधिक ५०,२१५ सीकेएम लाइनें डाली गईं, जो कि यूपीए शासन की पूर्ववर्ती दो वर्ष की अवधि में ३३,८५५ सीकेएम के १.५ गुना अधिक हैं। सब-स्टेशन क्षमता में सर्वाधिक १,२८,४०३ एमबीए की सर्वाधिक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। दक्षिण भारत (आंध्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और पुडुच्चेरी) की ट्रांसमिशन क्षमता ७१% बढ़ाकर ५,९०० मेगावाट की गई। पावर ग्रिड ने २०१४-१५ में करीब ३०,३०० करोड़ रु. की परियोजनाएं आरंभ कीं, जो ३९% वृद्धि दर्ज करती है। वर्ष २०१५-१६ में लगभग १ लाख करोड़ रु. की योजनाएं शुरू की गईं।

गैस संयंत्रों को पुनर्जीवन

देश की २४,१५० ग्रिड संलग्न क्षमता में से १४,३०५ मेगावाट क्षमता वाले २९ गैस आधारित बिजली संयंत्रों को वर्ष २०१४ में घरेलू गैस उपलब्ध नहीं थी। वर्ष २०१५ में पारदर्शी ई-नीलामी के जरिए ११,७१७ संयंत्रों को आरएनएलजी गैस की आपूर्ति कर पुनर्जीवित किया गया। दक्षिण भारत के राज्यों को इससे बड़ी राहत मिली है।

कोयला उत्पादन

२०१४ में ई-नीलामी के जरिए २०४ कोयला ब्लाकों में से ३१ कोयला ब्लाकों की पारदर्शी नीलामी एवं ४३ ब्लाकों का आबंटन किया गया। इससे कोयलाधारी राज्यों को खदान के जीवनकाल में ३.४४ लाख करोड़ रु. का राजस्व प्राप्त होगा। २०१४ में मुख्य बिजली संयंत्रों के पास महज ७ दिन चलने वाला कोयला भंडार होता था, जो अब २५ दिन से ज्यादा चलने वाला होगा। कोयले की कीमतें, उत्खनन और उपयोग की जानकारी देने के लिए पोर्टल शुरू किया गया।

इससे कोल इंडिया पुनः सक्रिय हुआ है। २०१४-१६ के दौरान १८.२ लाख मीटर की अन्वेषण खुदाई हुई, जबकि पूर्ववर्ती दो वर्षो में यह १२.६ लाख मीटर थी, जो ४४% की वृद्धि दिखाती है। खान विकास के लिए प्रति एकड़ अधिग्रहण पर एक नौकरी देने का प्रस्ताव किया गया, जिससे दोनों पक्ष लाभान्वित हुए। कोल इंडिया ने २०१५-१६ में ५३.६० करोड़ टन का उत्पादन किया। २ साल की अवधि में सर्वाधिक ७.४ करोड़ टन की वृद्धि हुई। २०१०-१४ के बीच यह वृद्धि महज १% थी, जो अब औसतन सालाना वृद्धि ७.४% है। कोयले की निकासी के लिए रेल लाइनों को आधुनिक बनाने की कोशिश की जा रही है। इन प्रयत्नों से २०१५-१६ में इससे कोयले के आयात में कमी हुई, जिससे लगभग २४,००० करोड़ रु. की विदेशी मुद्रा की बचत हुई। २०१६-१७ में तो कोई ४०,००० करोड़ रु. की विदेशी मुद्रा की बचत होगी।

बिजली दर नीति

डिस्कॉम की समस्याएं समाप्त होने से डिस्कॉम की हानि को घटाकर कम लागत वाली बिजली की संभावना विस्तारित हुई है। ॠण पर देय औसतन ब्याज खर्च को १२% से घटाकर ८% किया गया है। समग्र वाणिज्यिक एवं तकनीकी हानियों को कम करने के लिए प्रचालन दक्षता के लिए कदम उठाए गए हैं। इसमें मीटरिंग एवं ट्रैकिंग के माध्यम से बिलिंग दक्षता में सुधार, संरचना सुधार और स्मार्ट मीटरिंग और जन भागीदारी से वसूली में सुधार शामिल हैं। प्रति यूनिट निर्धारित लागत कम करने के लिए प्लांट लोड फैक्टर को बढ़ाया जा रहा है। ‘टाइम ऑफ डे’ मीटरिंग हो सके, चोरी कम की जा सके इसलिए स्मार्ट मीटर्स की त्वरित संस्थापना की जा रही है। हे हैं।

नवीनीकरणीय ऊर्जा

भारत सब से बड़ा नवीनीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रम चला रहा है। २०१४ में नवीनीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन महज ३२ गीगावाट था, जिसमें २०२० तक १७५ गीगावाट की बढ़ोत्तरी का लक्ष्य रखा गया है। इसमें सौर ऊर्जा १०० गीगावाट, पवन ऊर्जा ६० गीगावाट, जैव ईंधन ऊर्जा १० गीगावाट एवं लघु जल ऊर्जा ५ गीगावाट शामिल है। यह एक महत्वाकांक्षी योजना है।

सौर ऊर्जा

सौर ऊर्जा परियोजनाओं को पर्यावरणीय अनुमति को आसान बनाने के लिए इन परियोजनाओं को हरित श्रेणी से श्वेत श्रेणी में वर्गीकृत किया गया। सौर ऊर्जा दर २०१० के १६-१८ प्रति यूनिट से घट कर ४.३४-४.६७ रु. हो गए। एनटीपीसी एवं एसईसीआई द्वारा सौर ऊर्जा खरीदने से सौर उत्पादकों का जोखिम कम हो गया है। बैंकों से वित्त उपलब्ध होने के लिए इन परियोजनाओं को प्राथमिकता की श्रेणी में डाला गया है।
वर्ष २०१५-१६ में २०,९०४ मेगावाट की सौर परियोजनाओं के लिए निविदाएं जारी की गईं। २० राज्यों में २०,००० मेगावाट क्षमता वाले ३३ सौर पार्क स्थापित किए जाएंगे। अनंतपुरम् एवं आंध्र प्रदेश में विश्व की सब से बड़ी सौर परियोजनाएं स्थापित की जा रही हैं।

जल विद्युत

पूर्वोत्तर राज्यों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध करने के लिए १२०० मेगावाट की तीस्ता जल विद्युत परियोजना को वित्तीय पुनर्गठन के जरिए पुनर्जीवित किया गया। मंत्रालय से संलग्न वित्तीय संस्थाओं ने दीर्घावधि की जल विद्युत परियोजनाओं को दीर्घावधि ॠण देने का निर्णय किया है। इससे इन परियोजनाओं के काम में तेजी आएगी।

जल विद्युत परियोजनाओं को स्पर्धात्मक बोली से २०२२ तक छूट देकर प्रोत्साहन दिया गया है। इन परियोजनाओं के विकास में पूंजीगत लागत, पुनर्वास और पुनर्स्थापना, भौतिकी और निर्माण अवधि की समस्याओं को दूर किया जा रहा है। वितरण लाइसेंसियों को ३५ वर्ष के पीपीए में और १५ वर्ष की छूट दी गई है। बिजली उत्पादकों को ‘टाइम ऑफ द डे टेरिफ’ की अनुमति दी गई है।

एलईडी से बचत

प्रधान मंत्री उजाला योजना से भारत एलईडी बल्ब बाजार में विश्व में सब से ऊंचे स्थान पर होगा। यह दुनिया का सब से बड़ा एलईडी वितरण कार्यक्रम था, जिसमें १० करोड़ बल्बों का वितरण किया गया। २१९ तक ऐसे ७७ करोड़ बल्ब बदले जाएंगे। इससे पीक लोड मांग में २०,००० मेगावाट की कमी आएगी। उपभोक्ता बिल में करीब ४०,००० करोड़ रु. की कमी आएगी। पथदीप राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत ३.५ करोड़ बल्ब बदले जाएंगे। पारदर्शी खरीद से एलईडी की कीमत में लगभग ८२% की कमी आई है।

कुशल भारत

राष्ट्रीय कौशल विकास योजना के अंतर्गत कोल इंडिया ने २.७ लाख लोगों को प्रशिक्षित किया। इसके बाद कांट्रेक्ट श्रमिकों, अर्ध-कुशल श्रमिकों, संसाधन और उससे जुड़े युवाओं को समायोजित किया जा रहा है। एनटीपीसी ने दो वर्ष में ५,००० लोगों को प्रशिक्षित किया।

बेहतर जल प्रबंध

पेयजल को बचाने एवं गंगा जैसी नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए बिजली संयंत्रों का उपचारित पानी का उपयोग कर नमामि गंगा अभियान में सहायता की जाएगी। खदान के जल की उद्योगों, घरेलू एवं खेती के लिए देने की योजना चलाई जा रहा है। सूखे की मार झेल रहे नागपुर जिले के सावनेर क्षेत्र के दो गांवों- बोरगांव एवं कामठी में इसी तरह जल आपूर्ति की गई। तीन मंत्रालयों के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों ने स्कूली बच्चों के लिए १.२८ लाख शौचालयों का निर्माण किया। ये प्रतिष्ठान पांच साल तक उसका रखरखाव करेंगे।

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