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मोदी शासन की दो वर्ष की अल्पावधि में ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जनसंचार माध्यमों को आधुनिक बनाने, जनउपयोग की सूचनाओं को प्रसारित करने, फिल्मों एवं दूरदर्शन व आकाशवाणी के क्षेत्र में नई पहल आदि उल्लेखनीय कार्य किए हैं। इन कार्यों का संक्षिप्त विवरण निम्न है-

किसान चैनल

किसानों, पशुपालकों, मधुमक्खी एवं मुर्गी पालन करने वालों, मैकेनिकों एवं कारीगरों कृषि एवं सम्बंधित आधुनिक जानकारी प्रदान करने के लिए मई २०१५ में चौबीसों घंटे चलने वाले किसान चैनल का शुभारंभ किया गया। डीडी किसान चैनल ७-८ घंटे नवीनतम कार्यक्रम एवं दो रिपीट कार्यक्रम चलाता है। उसे रोचक बनाने के लिए कथाओं के अलावा वैज्ञानिक आधुनिक जानकारी दी जाती है। देश के प्रतिष्ठित संगठनों के कृषि वैज्ञानिकों से परामर्श से कृषि से सम्बंधित जानकारी दी जाती है। यह चैनल काफी लोकप्रिय रहा है और सवा करोड़ इसके दर्शक हैं।

एफएम रेडियो चैनल की ई-नीलामी

निजी एफएम रेडियो चैनलों के तीसरे चरण में पहली बैच की ई-नीलामी की गई। इसमें दूसरे चरण के वर्तमान ६९ शहरों में १३५ चैनल हैं। नीलामी की प्रक्रिया ३२ दिन चली। सरकार को कुल ११५६.९ करोड़ रु. के आश्वासन मिले, जबकि रिजर्व मूल्य केवल ५५० करोड़ रु. था। यह ११०% अधिक है। इससे चरण दो के चैनलों को चरण तीन में स्थलांतरित करने की सुविधा भी उपलब्ध हो गई। सरकार को चरण तीन के ५४ शहरों में ई-नीलामी से अब तक १०५५.९१ करोड़ रु. प्राप्त हुए हैं। चरण दो के चरण तीन में स्थलांतर शुल्क के रूप में सरकार को १२५७.३६ करोड़ रु. भी प्राप्त हो चुके हैं। पूर्वोत्तर एवं जम्मू-कश्मीर में आरंभिक तीन वर्षों के लिए रियायती वार्षिक शुल्क एवं प्रसार भारती का किराया आधा किया गया। निजी चैनलों को आकाशवाणी द्वारा प्रसारित समाचारों में से समाचार लेने की छूट दी गई है, जिससे श्रोताओं को निःशुल्क मनोरंजन उपलब्ध होगा।

राष्ट्रीय फिल्म धरोहर मिशन

यह नई योजना है, जिसके तहत राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय की फिल्मों को डिजीटाइज किया जाएगा। यह परियोजना २०१४-१५ से २०२०-२१ के सात वर्षों के लिए होगी। इस पर कुल ५९७.४१ करोड़ रु. की लागत आएगी। इसमें से बारहवीं पंचवर्षीय योजना में २९१ करोड़ रु. और तेरहवीं पंचवर्षीय योजना में ३०६.४१ करोड़ रु. उपलब्ध किए जाएंगे।इस परियोजना के अंतर्गत कोई १ लाख ३२ हजार फिल्म रीलों की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा, संरक्षण की व्यवस्था की जाएगी, १२०० फीचर एवं १६६० लघु वृत्त फिल्मों की ध्वनि एवं चित्रों को ठीक किया जाएगा, संग्रहालय का निर्माण किया जाएगा तथा राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय में उन्हें नियंत्रित वातावरण एवं संरक्षित सुविधा के साथ रखा जाएगा।

फिल्म निर्माण सुविधा कार्यालय

मंत्रालय ने फिल्म निर्माण सुविधा कार्यालय की स्थापना को मंजूरी प्रदान की है, जिससे विदेशी फिल्म निर्माताओं को भारत में शूटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। कार्यालय के निम्न कार्य होंगे-
• फिल्म निर्माताओं को आवश्यक अनुमति में सहायता करना।
• भारतीय फिल्म उद्योग में निर्माण एवं निर्माणोत्तर उपलब्ध सुविधाओं, शूटिंग स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराना।
• इसी तरह की सुविधाएं स्थापित करने के लिए राज्य सरकार से सहयोग के लिए कार्य करना।
• इसी तरह विदेश मंत्रालय से वीजा आदि, सांस्कृतिक मंत्रालय एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से सामान्य दिशानिर्देश जारी करना।
• इस कार्य के लिए पोर्टल स्थापित करना। इससे सूचनाएं एवं सुविधाएं एक स्थान पर उपलब्ध होंगी।
• राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम को इस कार्यालय की स्थापना की जिम्मेदारी सौंपी गई है। निगम अपने मुंबई, दिल्ली, चैन्नई एवं कोलकाता कार्यालयों में इसकी व्यवस्था करेगा। इस कार्यालय की स्थापना से भारत फिल्म शूटिंग केंद्र के रूप में विकसित होगा।

सिनेमाटोग्राफ कानून/नियमों पर श्याम बेनेगल समिति

इस समिति की सिफारिशों से प्रमाणपत्र देने के लिए एक व्यापक संरचना को कायम किया जा सकेगा। इस दिशानिर्देशों के आधार पर ही फिल्मों को प्रमाणपत्र देने में सुविधा होगी। केंद्रीय फिल्म प्रमाणपत्र बोर्ड के पुनर्गठन के लिए भी सिफारिशें देने को समिति को कहा गया है, ताकि सक्षम एवं पारदर्शी व्यवस्था कायम की जा सके।

अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों के लिए चयनित फिल्मों को प्रोत्साहन

अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, आस्कर अवार्ड या अकादमी अवार्ड जैसे किसी प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए भारत की प्रतिनिधि फिल्मों के नामित होने पर ऐसी फिल्मों को वित्तीय प्रोत्साहन देने के लिए योजना बनाई जा रही है। राष्ट्रीय फिल्म वित्त निगम इसकी विस्तृत योजना बना रहा है।

योजनाओं का मल्टीमीडिया अभियान

सरकार की योजनाओं को व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाने के लिए सर्वांगीण मल्टीमीडिया अभियान चलाया गया। इस अभियान के जरिए विभिन्न मंत्रालय योजनाओं को जनता तक पहुंचा सके। अंग्रेजी एवं हिंदी के अलावा विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में यह अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत पत्र सूचना कार्यालय की पत्र परिषदें, डीडी एवं आकाशवाणी पर विशेषज्ञों के साथ प्रसारण, डीएवीपी एवं डीएफपी के जरिए देशभर में प्रदर्शनियां, सोशल मीडिया का इस्तेमाल आदि किया गया गया। अभियान के कुछ उदाहरण निम्न हैं- साल एक-शुरुआत अनेक, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, राष्ट्रीय एकता दिवस, स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया, कौशल भारत, डिजीटल इंडिया आदि।

ई-पहल

इस दिशा में उठाए ्रए कुछ कदम निम्न हैं-

• महात्मा गांधी के कार्यों का ई-संस्करण
• रामचरित मानस का डिजीटल संस्करण
• डीडी न्यूज मोबाइल एप
• डीएवीपी कैलेंडर का ई-संस्करण
• वार्षिक संदर्भ पुस्तिका इंडिया/भारत २०१५ का ई-संस्करण
• सूचना-प्रसारण मंत्रालय की ई-पुस्तिका, जिसमें मंत्रालय के एक वर्ष के कार्यकाल का लेखाजोखा है।
• डिजीटाइजेश का दूसरा एवं तीसरा चरणः केबल टीवी डिजीटलाइजेशन ‘डिजीटल इंडिया’ का अविभाज्य अंग है। इसका तीसरा चरण दिसम्बर २०१५ में पूरा हुआ एवं चौथा चरण दिसम्बर २०१६ पूरा होना हे। इस तरह देश में पूरी व्यवस्था डिजीटल एड्रेस प्रणाली के अंतर्गत आ जाएगी और प्रधान मंत्री की ‘डिजीटल इंडिया’ की योजना साकार होगी।
• मन की बातः आकाशवाणी से प्रधान मंत्री के ‘मन की बात’ का प्रसारण हो रहा है। आकाशवाणी के समाचार प्रभाग एवं डीडी न्यूज ने इसके प्रसारण की व्यापक व्यवस्था की है।

कार्यशालाएं

• पत्र सूचना कार्यालय की ओर से २ फरवरी २०१५ को ‘स्ट्रीमलाइन गवर्नमेंट कम्यूनिकेशन’ पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बदलते मीडिया परिदृश्य पर चर्चा हुई, जिसमें सामाजिक मीडिया का उभरना, पैनल चर्चा, खुली चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र आदि शामिल हैं।
• राष्ट्रीय छायाचित्र कार्यशाला एवं छायाचित्र पुरस्कारः राष्ट्रीय फोटोग्राफी प्रभाग ने मार्च २०१५ में फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी में कौशल विकास के लिए एक दिन की राष्ट्रीय छायाचित्र कार्यशाला का आयोजन किया।
• जनसंचार विश्वविद्यालय पर संगोष्ठीः देश में जनसंचार विश्वविद्यालय की स्थापना पर विचार-विमर्श के लिए १४ मई २०१५ को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उद्योग एवं अन्य सम्बंधित मंत्रालयों से भी विचार-विमर्श किया गया। आईआईएमसी से व्यावहारिकता रिपोर्ट प्राप्त हो चुकी है और मंत्रालय इस पर विचार कर रहा है।
• सोशल मीडिया में सरकार की उपस्थितिः विभिन्न मंत्रालयों तथा विभागों की सोशल मीडिया में उपस्थिति पर आधे दिन की कार्यशाला का आयोजन किया गया। ५९ मंत्रालयों के १५० से अधिक अधिकारियों ने इसमें भाग लिया।

विदेशी संवाद संस्थाओं को अनुमति

विदेशी संवाद संस्थाओं को भारत में सरकार के माध्यम से अपना कार्यालय स्थापित करने के लिए अनुमति देने का मंत्रालय ने निर्णय किया है। ऐसी अनुमति देते समय संवदेनशील देशों की संवाद एजेंसियों के बारे में गृह मंत्रालय की टिप्पणी को विचार में लिया जाएगा। इन एजेंसियों को पत्रकारिता मानकों एवं अन्य नियमों का पालन करना होगा। आर्थिक मामलों के मंत्रालय को इसकी सूचना दी गई ताकि नियमों में यथोचित संशोधन किया जा सके।

एफटीआईआई, एसआरएफटीआईआई अब संस्थान

इसके लिए मंत्रालय ने विधेयक का प्रारूप बनाया है, जिससे ये संस्थान स्वयं अपनी उपाधियां एवं डिप्लोमा जारी कर सकेंगे। इसी तरह आईआईएमसी को राष्ट्रीय संस्थान बनाने के लिए विधान बनाया जा रहा है।

अरुणाचल में फिल्म एवं टीवी संस्थान

पूर्वोत्तर क्षेत्र के सर्वांगीण विकास एवं वहां के युवकों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने पुणे एवं कोलकाता के अनुसार पूर्वोत्तर के किसी राज्य में फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना का प्रस्ताव किया है।

• वर्ष २०१५ में आईएफएफआई में कई नई पहल की गई। अंतरराष्ट्रीय संगठन आईसीएफटी, पेरिस एवं यूनेस्को के सहयोग से विशेष पुरस्कार ‘आईसीएफटी- यूनेस्को फेलीनी प्राइज’ की स्थापना की गई। शांति, सहयोग, अहिंसा एवं मैत्री के आदर्शों को प्रस्तुत करने वाली फिल्म को पहली बार भारत में यह पुरस्कार दिया जाएगा। सिनेमा के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं एवं निर्देशन में विशेष कार्य के लिए ‘फर्स्ट कट’ कार्यक्रम शुरू किया गया। इसमें आस्कर अकादमी एवं अन्य संगठनों की सहायता से कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
• सोशल मीडिया पर मंत्रालय में नए विभाग की स्थापना की गई। इसके अंतर्गत फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब तथा इंस्टाग्राम में मंत्रालय की उपस्थिति दर्ज होगी। मंत्रालय १.५ मिलियन ब्लाग पोस्ट का ब्लाग भी संचालित करता है। इससे सोशल मीडिया साइट्स से सरकार को नीतिविषयक फीडबैक मिलता है।
• मंत्रालय का टॉकथान कार्यक्रम अनोखा है। इसमें सार्वजनिक डामेन में सूचनाएं प्रस्तुत की जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दौरान इसका सफल प्रयोग किया गया। हाल में भारत सम्पर्क, सड़क सुरक्षा एवं कॉप२१ जैसे टॉकथान जारी किए गए।
• सरकारी विज्ञापनों में जनता के सहभाग को शामिल किया गया। स्वाधीनता दिवस के विज्ञापन इसी आधार पर बनाए गए।

आपदा प्रबंध

मंत्रालय के मीडिया यूनिटों में चेन्नई जैसे बाढ़ आपदाओं की स्थिति में लोगों को सही जानकारी प्रस्तुत की। राष्ट्रीय आपदा प्रबंध समिति को नियमित व ताजा जानकारी प्रदान की गई। कश्मीर में बाढ़ एवं हुदहुद तूफान के समय भी ऐसा ही किया गया।

विविध भारती पूरी तरह एफएम

कोलकाता, मुंबई, दिल्ली एवं चेन्नई के विविध भारती केंद्रों में ४मीडियम वेव ट्रांसमीटरों को बदल कर पूरी तरह एफएम में तब्दील किया गया। इससे मोबाइल एवं कार स्टीरियो में भी अब विविध भारती के कार्यक्रम उपलब्ध होंगे।

कम्यूनिटी रेडियो

देश में कम्यूनिटी रेडियो के प्रबंध के लिए सरकार ने १०० करोड़ रु. की राशि का प्रावधान किया है। इससे बारहवी पंचवर्षीय योजना में और ६०० कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। फिलहाल देश में १८७ कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन हैं।

वार्तालाप/ क्षेत्रीय सम्पादक सम्मेलन

देश भर में क्षेत्रीय मीडिया से चर्चा एवं सरकारी योजनाओं के बारे में उन्हें जानकारी देने के लिए यह नई पहल की गई है। इसमें जिला एवं उपजिला स्तर के पत्रकारों के साथ सरकार की चर्चा होती है।

पूर्वोत्तर फिल्म महोत्सव

दिल्ली में पहली बार पूर्वोत्तर राज्यों के लिए फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। यह महोत्सव अब प्रति वर्ष आयोजित किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, साल एक-शुरुआत अनेक, स्कील इंडिया मिशन के लिए व्यापक कवरेज किया गया।

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