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मोहे पनघट पे  – गीतकी रिकॉर्डिंग के दौरान नौशाद ने लता से कहा था ‘मैंने यह गीत केवल तुम्हारे लिए बनाया है इस गीत को कोई और नहीं गा सकता है।’

मुगल -ए-आजम’ के सभी गानों का गीतकारशकील बदायूंनी को बताया जा रहा है।सच तो यह है कि ‘मोहे पनघट पेनंदलाल’ गाने के लेखक हैं रघुनाथब्रह्मभट्ट। नौशाद ने इस गानेकी धुन शकील को दी। जिनमें सेएक को नौशाद ने पसंद किया।लोकगीत पर रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने ‘मोहे पनघट पेनंदलाल छेड़ गयो रे’ शकील बदायूंनी ने ‘मुगल-ए-आजम’ में यह गाना जब अपने नामसे दिया तो इसकी कुछ पंक्तियां हटा दीं।कुछ शब्द बदले और अंत में तीनपंक्तियां जोड़ दीं। ‘मुगल-ए-आजम’ रिलीज हुई तो रघुनाथ ब्रह्मभट्ट इसगाने के लेखक के रूप में शकीलबदायूंनी का नाम देखकर चकित रहगए। उन्होंने फिल्म राइटर्स असोसिएशनमें शिकायत की। साहिर लुधियानवीऔर भरत व्यास जैसे लोगअसोसिएशन के सदस्य थे। उन्होंनेरघुनाथ ब्रह्मभट्ट के हक में फैसलादिया। फिल्म के निर्देशक के.आसिफ कोपारिश्रमिक के बतौर उन्हें 10 हजाररुपये देने पड़े।

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  1. फिल्मी क्षेत्र मे साहित्य चोरी कि यह घटना नयी नही है पर जींस अजरामर गीत को हम सुनते है, उससे जुड़ी इस घटना को पढते समय और रचनाकार से हुवा न्याय की घटना बहुत बढ़िया। नरेश खराडे आप गीतों के साथ यादें भी बढ़िया पिरोते हो।

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