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बीते दिनों नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किये गए हमलों में मारे गए 1 पत्रकार एवं 3 जवान के बलिदान पर पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। देशभर के पत्रकार संगठनों ने एकजुट होकर कायराना हमलों की निंदा की है और सरकार से आर-पार की निर्णायक कार्रवाई करने की मांग की है।

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में यह हमला किया गया था। कश्मीर में आतंकवादियों के समूल नाश के लिए सेना द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑल आउट की तर्ज पर माओवादियों के कब्जे वाले अथवा प्रभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर उग्रवादियों एवं नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन सर्वनाश चलाया जाना चाहिए, ऐसी मांग देश भर के पत्रकार संगठनों ने की है।

लगातार निशाने पर सीआरपीएफ के जवान

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में इससे पहले भी कई बार नक्सली हमलावरों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को निशाना बनाया था। जुलाई में ही नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बीएसएफ के जवानों पर हमला किया था, इस हमले में बीएसएफ के 2 जवान शहीद हुए थे। इससे पहले 13 मार्च 2018 को राज्य के सुकमा जिले में सीआरपीएफ की 212वीं बटालियन के जवानों पर हमला हुआ था। घात लगाकर किए गए इस नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 9 जवान शहीद हुए थे।

25 मई 2013 : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में एक हजार से ज्यादा नक्सलियों ने कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला कर दिया। इस हादसे में कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा और नंदकुमार पटेल समेत 25 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।

6 अप्रैल 2010: दंतेवाड़ा जिले के चिंतलनार जंगल में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 75 जवानों सहित 76 लोगों की हत्या कर दी।

4 अप्रैल 2010: ओडिशा के कोरापुट जिले में पुलिस की एक बस पर हमला, विशेष कार्य दल के 10 जवान मरे, 16 घायल।

23 मार्च 2010: बिहार के गया जिले में रेलवे लाइन पर विस्फोट करके भुवनेश्वर-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस को पटरी से उतारा। इसी दिन ओडिशा की रेलवे पटरी पर हमला करके हावड़ा-मुंबई लाइन क्षतिग्रस्त की।

15 फरवरी 2010: पश्चिम बंगाल के सिल्दा में करीब 100 नक्सलियों ने पुलिस कैंप पर हमला करके 24 जवानों की हत्या की, हथियार लूटे।

8 अक्टूबर 2009: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में लाहिड़ी पुलिस थाने पर हमला करके 17 पुलिसवालों की हत्या की।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने सुरक्षा बलों के पराक्रम की सराहना करते हुए कहा था, कि वह दिन दूर नहीं जब देश से नक्सलवाद और माओवाद का सफाया हो जाएगा। राजनाथ ने कहा कि पहले देश के 126 जिलों में नक्सलवाद था, वह अब सिमट कर 10-12 जिलों में रह गया है। इससे साफ पता चलता है कि सुरक्षाबलों के आगे नक्सली दम तोड़ रहे हैं।

यूपी की राजधानी लखनऊ के बिजनौर स्थित शिविर में त्वरित कार्य बल (आरएएफ) के 26वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में गृहमंत्री ने कहा, था ’वह दिन दूर नहीं जब केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और आरएएफ के पराक्रम के बलबूते पूरे देश से नक्सलवाद और माओवाद का सफाया हो जाएगा।’

उन्होंने कहा, ’इन केंद्रीय बलों ने दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय करके हिन्दुस्तान की जनता के मन में भरोसा कायम किया है। जहां नक्सलवाद था और जहां विकास की किरण नहीं पहुंच पाई थी। वहां इन बलों ने नक्सलवादियों के मजबूत ठिकानों को खत्म किया है और वहां विकास कार्य शुरू हुए हैं।’

राजनाथ सिंह ने कहा, ’पहले शहीद जवानों के परिवारों को 45 लाख रुपये मिलता था, लेकिन जबसे हमारी सरकार आई है, हमने सुनिश्चित किया कि उन्हें 1 करोड़ रुपये से कम न दिया जाए। हालांकि, मुझे विश्वास है कि जीवन की कीमत जितना किसी भी राशि से मुआवजा नहीं दिया जा सकता।’

 

 

 

 

 

This Post Has 2 Comments

  1. इस ऑल आउट मिशन मे शहरों मे रहकर अराष्ट्रीय कार्य करने वाले और जंगल मे बंदूक चलानेवाले दोनो आतंकवादियों का सफाया होना जरूरी है।

  2. मै पत्रकार समूह के मांग से सहमत हूं।

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