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पानी लाने गया एवं गृहस्थ हो गया, यह कथा है नारदजी की।
नारद मुनि ने भगवान विष्णु को कहा कि मुझे आपकी माया की ताकत देखनी है। उस समय भगवान ने उसे कोई जवाब नही दिया।
एक दिन दोनों ही यात्रा पर निकले। बहुत देर बाद भगवान ने नारदजी से कहा, “नारद मुझे बहुत प्यास लगी है, थोड़ा पानी लाओगे क्या ?” नारद पानी लाने जाते हैं। कुछ देर तक ढूंढने पर उन्हे एक नदी दिखती है। नदी का पानी बिलकुल साफ-स्वच्छ दिखता है। पानी लेने के लिये वे नदी पर जाते हैं।
वे देखते हैं कि नदी किनारे एक सुंदर युवती बैठी है। वह उसी समय नहा कर नदी से बाहर निकली थी। उसकी अप्रतिम सुंदरता को देखकर नारद को उसका मोह हो जाता है। वह युवती भी स्मित हास्य कर नारद जी के साथ बोलने लगती है। उसकी मधुर आवाज एवं उसका रूप देखकर नारदजी उसके प्रेम में पड़ जाते हैं। “मैं नदी पर क्यों आया हूं”? इसका उन्हे विस्मरण हो जाता है। वे उस युवती को शादी का प्रस्ताव देते हैं। वह युवती भी प्रस्ताव स्वीकार कर लेती है एवं दोनों की शादी हो जाती है। आगे नारदजी पूरी तरह अपने गृहस्थ जीवन में मग्न हो जाते है। उन्हे बच्चे हो जाते हैं। पूरा दिन बच्चों के लालन-पालन में बीत जाता है।
वे जिस गांव में रहते हैं वहां बीमारी फैलने लगती है। लोग मरने लगते हैं। वे दोनों गांव छोडने का निश्चय करते हैं। अपने बच्चों को लेकर दूसरे गांव जाने को निकलते हैं। बीच में वही नदी आती है। वे नदी पर आते हैं। नारदमुनि को याद भी नही आता कि वे सर्वप्रथम नदी पर किस उद्देश से आये थे।
बच्चों के साथ वे नदी पार करने लगते हैं। अचानक नदी में बाढ़ आती है एवं एक-एक कर सारे बच्चे एवं पत्नी नदी में बह जाती हैं। नारद जी बच जाते हैं।
वे नदी किनारे आकर शोक करने लगते हैं। रोने लगते हैं। इतने में भगवान विष्णु नारदजी के पास आते हैं और पूछते हैं, “अरे नारद, तू तो मेरे लिये पानी लाने हेतु नदी पर आया था ना, फिर पानी कहां है?”
नारद जी होश में आते हैं। भगवान की माया के खेल का उन्हे अनुभव हो चुका होता है।
हम जो काम करने निकले हैं, उसका हमें नित्य स्मरण रखना चाहिये। मायाजाल में फंसाने वाली अनेक चीजें हमारे आजू बाजू होती हैं। उनके मोह में यदि हम पड़ गए तो मुख्य काम बाजू में रह जाता है एवं मोहजाल में हम कैसे कब फंस गये इसका हमें ध्यान भी नहीं रहता। हमारा ‘नारद’ हो जाता है।

This Post Has One Comment

  1. नारद कथा बहूत बढिया लिखी है।हमे अच्छी सिख मिली है

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