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दीपावली में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा फटाके फोड़ने के लिए समय की मर्यादा निश्चित की गई है. रात को 8 से 10 बजे के बीच फटाके फोड़ने से क्या प्रदुषण पर नियंत्रण रखा जा सकता है? अपनी बेबाक राय दें.

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  1. अगर सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय प्रदूषण के कारण है तो मोटार गाडीया बनाने वाली सब कंपनिया बंद होनी चाहीए।और अगर यह निर्णय सोने के समय होने वाली असुविधा के कारण है तो पटाखो की आवाज के कारण जिनको निंद नही आती उन्हे निंद की गोली खाकर सोना चाहीए।

  2. निर्णय धर्म, वर्ग, समूह, जाति और व्यवसाय देखकर नहीं समग्र राष्ट्र के हित में हो तो निर्णय है अन्यथा यह तुष्टिकरण है जो कदापि स्वीकार्य नहीं।
    न्याय का मंदिर विश्वसनीयता खो रहा है जो पूरे राष्ट्र व राष्ट्रीयता के लिए घातक है।

  3. यह आदेश संभवतः प्रदूषण के कारण नहीँ अपितु, आम जनता के सोने के समय होने वाली असुविधा की दृष्टि से दिया गया होगा।
    परन्तु ध्यान देनेवाली मूल बात यह है कि ऐसे सभी निर्णय, हिन्दुओं के त्यौहारों को लेकर ही लिए जा रहे हैं।क्या क्रिसमस एवं तथाकथित नववर्ष की पूर्व संध्या 31 दिसम्बर पर भी लागू होंगे? यदि नहीं तो यह आदेश अमान्य होगा।नियम व कानून सभी जाति-धर्मों पर समानरुप से लागू होते हैं।

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