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मा.प्रधान मंत्री नरेंन्द्र मोदी द्वारा घोषित ‘स्मार्ट विलेज’ स्कीम (आदर्श ग्राम योजना) से प्रेरत होकर रिजवान आडतिया ने आने वाले वर्षों में सौ गांवों को गोद लेने का फैसला लिया है। उनकी योजना है कि उन गांवों में प्राथमिक सुविधाएं मुहैया हों। उनकी ‘रिजवान आडतिया फाउंडेशन’ के माध्यम से भारत के साढ़े छ: लाख गांवों में से सौ गांव गोद लेने की योजना है। प्रस्तावित सुविधाओं में अच्छी शिक्षा, स्वास्थ सेवाएं, पानी, सफाई, पोषक आहार, आय-संवर्धन हेतु उत्पादक उद्योग, सुरक्षा, लिंग समानता इत्यादि विषय शामिल हैं।
मोजाम्बिक में रहने वाले दूरद्रष्टा उद्योगपति रिजवान आडतिया मूलत: पोरबंदर (गुजरात) से हैं। दैनिक जीवन में काम आने वाली चीजों के (किराना) व्यवसाय में अपने बड़े भाई का साथ देने हेतु सन १९८६ में वे पोरबंदर से अफ्रीका गए। कई लोगों के आशीर्वाद से उन्होंने अपना व्यवसाय ग्यारह देशों में फैलाया एवं तीन हजार पांच सौ लोगों को रोजगार दिया एवं कॉएफ ग्रुप स्थापित किया।
सन २०१५ में स्थापित रिजवान आडतिया फाउंडेशन, ग्यारह देशों में अपने कारोबार के साथ-साथ सामाजिक कार्य भी करता है जिसमें वह शिक्षा, स्वास्थ, जीवन स्तर, सहायता एवं सामाजिक सद्भाव की ओर विशेष ध्यान देता है। समाज के अत्यंत गरीब एवं उपेक्षित लोगों के जीवस्तर को समाज के अन्य लोगों के स्तर तक लाने का सक्षमता से प्रयास आरएएफ द्वारा किया जाता है। सभी को अंातरिक खुशी एवं प्रसन्नता मिले इसमें फाउंडेशन विश्वास रखता है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने एवं विषमता समाप्त करने, जीवन मूल्यों को बढ़ाने वाले कार्यों को गति देने में आरएएफ का दृढ़ विश्वास है। आरएएफ ऐसे कारकों की पहचान करता है जो उन्नति, विकास के कार्यों में सहायक होते हैं, उन्हें प्रभावित करते हैं जैसे सिविल सोसायटी, निजी क्षेत्र, व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह एवं स्थानीय प्रशासन एवं उनकी विभिन्न एजेंसियां। फाउंडेशन उनके साथ सहभागिता कर उन्हें संसाधन एवं उद्देश्य उपलब्ध करा कर एक परिणामी संगठन के रूप में अफ्रीका एवं एशिया में कार्य कर रहा है।
अफ्रीका के लिए आरएएफ का मुख्यालय मोजाम्बिक में एवं भारत के लिए मुंबई में स्थित है। विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से अफ्रीका के देशों- जैसे कांगो, मेडागास्कर, कीनिया, स्वाजीलैण्ड और दक्षिण अफ्रीका में आरएएफ कार्यरत है। यहां आरएएफ ने स्थानीय समाज के बीच कार्य करते हुए गरीब एवं साधनहीन बच्चों की पहचान कर उन्हें समानता, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक सद्भाव का दृष्टिकोण दिया। आरएएफ ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से साधनहीन गरीब बच्चों की शिक्षा, विधवाओं को अच्छा एवं सम्मानपूर्ण जीवन एवं चिकित्सा शिविर लगा कर स्थानीय समाज में कार्य किया है।
भारत में प्रथम चरण में सिंतबर २०१५ में आरएएफ ने जूनागढ़ (गुजरात) जिले के मालिया हतिना गांव को गोद लिया है। इस गांव की जनसंख्या अठारह हजार है। यहां कार्य प्रारंभ करने के पूर्व फांउडेशन ने इस गांव का संपूर्ण अध्ययन किया एवं छोटी-छोटी बातों की भी योजना की। इसका उद्देश्य वर्तमान में गांव के सामाजिक आर्थिक स्तर एवं जीवन स्तर का अध्ययन करना था। इसका उद्देश्य यह पता करना भी था कि गांव की मुख्य आवश्यकताएं क्या हैं। जिससे उस तरहकी योजनाएं बनाई जा सके। इससे सरकार, एनजीओ द्वारा चलाई जा रही योजनाओं, सेवाओं की जानकारी प्राप्त करने का कार्य किया गया, जिससे यह ज्ञात हो सके कि कहां-कहां इनमें कमी है और फाउंडेशन जहां आवश्यक हो, पूरा करने में सहायक हो। इस अध्ययन का एक अच्छा परिणाम यह निकला कि ग्राम विकास में आगे क्या-क्या आवश्यक है और उनकी पूर्ति किस प्रकार की जा सकती है। साथ ही यह योजना बनाने में भी सहायता मिली कि तत्काल किस चीज की आवश्यकता है एवं मिड-टर्म एवं लांग टर्म में क्या आवश्यकताएं हैं।
मालिया हाटिना में इस प्रकार की पहल करने से एवं विभिन्न योजनाओं के माध्यम से कार्य करने के कारण सर्वसाधारण की मान्यता आरएएफ की मिली। आरएएफ की योजनाओं से लाभार्थियों को केवल शिक्षा एवं स्कालरशिप के माध्यम से ही फायदा नहीं मिला वरन् महिलाओं को उनके १६० सेल्फ हेल्पग्रुप (स्वयं-सहायता समूह) बना कर गांव के अंदर एवं बाहर कार्य करने की प्रेरणा मिली। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण, नेतृत्व विकास, बचत की आदत, आय प्राप्ति है। इस योजना के अंतर्गत १७०० महिलाएं इन स्वसहायता समूहों में शामिल हुई हैं। जिसका नाम ‘वुमन इम्पावरमेंट प्रोग्राम’ है।
शासकीय शालाओं में बच्चों के पीने हेतु साफ पीने के पानी की व्यवस्था नहीं थी। आरएएफ ने पंचायत की लड़कियों की हाईस्कूल में आर.ओ. तथा वाटर कूलर लगा कर यह सुविधा मुहैया कराई।
दीवाली के पूर्व ७ नवम्बर २०१५ को स्वच्छता अभियान ‘प्रगतिशील मालिया नी स्वच्छ शुरुवात’ के बैनर तले प्रारंभ किया गया। यह पहल गांव के लोगों में स्वयं के परिसर एवं आसपास के परिसर को साफ रखने के आरएएफ के मिशन में सहायक हुई।
बढ़ती महंगाई एवं बेरोजगारी के कारण कई परिवार अपने बच्चों की स्कूली शिक्षा के खर्च को वहन करने में असमर्थ थे। इसे ध्यान में रखने हुए आरएएफ के माध्यम से दो स्कूलों के बच्चों को २५० स्कूल किट २३ जून २०१५ को प्रदान किए। आरएएफ ने निश्चय किया है कि शालाओं के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से विचार-विमर्श करने के पश्चात पहली से दसवीं तक के गरीब बच्चों को स्कूल किट वितरीत किए जाएंगे।
८ मार्च २०१६ को आरएएफ द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम’ आयोजित किया गया। समाज में महिलाओं के योगदान को इसके माध्यम से मान्यता दिलाने और उसे रेखांकित करने का प्रयत्न किया गया। मालिया गांव में सामाजिक बदलाव की पहल करने वाली स्वयंसेविकाओं एवं ‘वूमन इंपावरमेंट प्रोग्राम’ की कार्यकर्ताओं का सम्मान इस कार्यक्रम के माध्यम से किया गया । इस मनोरंजनात्मक एवं सब को साथ लेकर चलने वाले कार्यक्रम के माध्यम से नौ महिलाओं ने भाग लिया। उन्होंने इस कार्यक्रम के माध्यम से उनके अनुभव एवं समाज पर हुए प्रभाव के बारें में जानकारी दी।
म.गांधीजी केवल अतीत के ही नहीं वरन् भविष्य के भी मार्गदर्शक हैं। उनके संदेश अमर हैं एवं वे तब तक रहेंगे जब तक सूर्य चमकता रहेगा। महात्मा गांधी के दृष्टिकोण पर फाउंडेशन गहरी निष्ठा रखता है जो मनुष्य को उसकी अंतरात्मा में झांकने की दृष्टि देता है। आरएएफ सद्भावनायुक्त एवं स्वावलंबी समाज बनाने हेतु कटिबद्ध है ।

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