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इसके बनने का एक किस्सा है. ये गाना बनाने के लिए नौशाद ने बदायुनी और खुद को शाम के 6 बजे कमरे में बंद कर लिया. बहुत देर तक माथा खपाने के बाद नौशाद के दिमाग में एक पूरबी लोकगीत की पंक्ति आ गई. ये थी ‘प्रेम किया क्या चोट करी’. नौशाद ये वाला लोकगीत बचपन से सुनते आ रहे थे. इसी से प्रेरित होकर बदायुनी ने लिखा ‘प्यार किया तो डरना क्या’. गाने का मुखड़ा मिल चुका था और जब तक गाना पूरा हुआ, सुबह हो गई थी. इस गीत के लिए दोनों पूरी रात सोए नहीं.

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