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श्रीराम एवं श्रीकृष्ण के विषय में अनेक उद्बोधक कहानियां बताई जाती है। प्रत्येक कथा मनोरंजक तो होती है परंतु उसी समय वह या तो जीवनमूल्य थी नीतिमूल्य बता जाती है। जो रक्षक है, पालनहार है, वही यदि मृत्यु का कारण बनने वाला हो किसे पुकारें? भगवान राम के माध्यम से यह कथा कैसा भाव प्रगट करती है यह हम देखें।

प्रभु राम वनवास के समय एक नदी को पार कर रहे थे। उस पार पहुंचते पहुंचते उनका पैर एक मेंढक पर पढ़ता है। मेंढक का दम घुटने लगता है पर वह चिल्लाता नही है।

अपना पैर मेंढक पर पडा है यह प्रभु के भी ध्यान में आता है। वे तुरंत अपना पैर मेंढक पर से अलग करते हैं एवं पूछते हैं, “मेरा पैर तुम्हारे उपर था फिर भी तू चिल्लाया क्यों नही?

मेंढक ने जवाब दिया, “चिल्लाता कैसे, किसे पुकारता? यदि किसी अन्य समय मुझ पर संकट आता है तो मै कहता हूं, हे राम मुझे बचाव!” अब जब स्वयं राम का पैर मेरे शरीर पर पड़ा तो मै किसे बुलाउ, किसे पुकारू, किसे आवाज दूं?

This Post Has 4 Comments

  1. बहुत सुंदर जवाब
    राम से बढ़कर कौन
    जय जय श्री राम

  2. जय श्री राम

  3. jai jai shree ram

  4. जय श्रीराम 🚩

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