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समस्त महाजन ने सत्कर्म की भावना से अब तक अनेक प्रकार के सामाजिक कार्य किए हैं। उसके सुपरिणाम भी दिखाई देने लगे हैं। आने वाले पांच वर्षों में देश के अधिकांश गांवों में इस तरह के सामाजिक कार्य फैलाने का लक्ष्य हैं। प्रस्तुत है संस्था के अध्यक्ष गिरीशभाई शहा से हुई बातचीत के अंशः-

माज में किए गए अच्छे कामों का परिणाम सकारात्मक होता है, इस विषय में आपका क्या मत है?

अच्छे कामों का परिणाम हमेशा सकारात्मक ही होता है। समस्त महाजन के द्वारा गत 16 वर्षों में एक हजार से अधिक संस्थाओं को सहायता करने का प्रयत्न हुआ है। हमारे इस छोटे से प्रयत्न के कारण इन संस्थाओं को आगे जाने की प्रेरणा मिली है, कार्य करने की पध्दति मिली,  हम भी कर सकते हैं यह आत्मविश्वास पैदा हुआ, स्वयं की ताकत एवं क्षमता जानने में मदद मिली। आर्थिक सहायता महत्वपूर्ण होने के बावजूद सकारात्मक दृष्टिकोण हमेशा रहे यह अतिमहत्वपूर्ण है।

समाज में अच्छे कामों का अनुकरण सदा ही होता है, इन कामों की प्रेरणा क्या होनी चाहिए?

वैसे देखा जाए तो काम छोटा हो या बड़ा, उस पर श्रध्दा रखना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है और वह उसी के माध्यम से अपने कर्म करता है। किसी को यदि अवसर मिला तो वह उस अवसर का उपयोग किस प्रकार करेगा, यह उसकी प्रकृति पर निर्भर है। किसी व्यक्ति द्वारा कोई बुरा कर्म किया गया तो व्यक्ति खराब नहीं होता वरन् उसकी परिस्थिति खराब होती है। इसलिए समाज में अच्छे कामों की संख्या अधिक होनी चाहिए जिससे कुकर्म की ओर जाने वाले व्यक्ति अपने-आप सत्कर्म की ओर मुड़ेंगे। प्रत्येक व्यक्ति में ऊर्जा होती है। उसे जगाकर सत्कर्म की ओर मोड़ने की आवश्यकता है।

‘समस्त महाजन’ ने कौन कौन से सामाजिक कार्य किए हैं?

समस्त महाजन ने सत्कर्म की भावना से अब तक अनेक प्रकार के सामाजिक कार्य किए हैं। सर्वप्रथम गौशालाओं का काम हाथ में लिया। एक हजार से अधिक गौशालाओं एवं अन्य को संस्था ने सहायता दी है। पहले जहां 40 से 50 हजार गौमाताएं थीं, वहां अब 2 लाख से अधिक गौमाताओं एवं अन्य मूक जानवरों का पालन-पोषण हो रहा है। इसके कारण जैविक खेती एवं खेती के पूरक व्यवसायों की गति बढ़ी है। संस्था का दूसरा ठोस काम शिक्षा के क्षेत्र में है। शिक्षा से वंचित ऐसे एक हजार से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा मिले इसकी व्यवस्था संस्था ने की है। 400 आदिवासी बच्चों के लिए पंचमहाल जिले में एक छात्रावास की स्थापना की है। प्राकृतिक आपदा के समय समस्त महाजन संस्था सहायता हेतु सर्वप्रथम आगे आती है। इसके अलावा पीड़ित, निराधार, दु:खी लोगों के लिए उज्जैन में सेवाधाम की स्थापना की गई है। वहां आज 500 से अधिक लोगों को समस्त महाजन संस्था द्वारा मजबूत आधार दिया गया है। इन सत्कार्यों के कारण अनेकानेक व्यक्तियों के साथ समस्त महाजन संस्था का जुड़ाव हुआ है। इन जुड़े हुए व्यक्तियों के माध्यम से अन्य लोग भी संस्था से जुड़े हैं एवं वे समाजहित के कार्य कर रहे हैं। इस सब का हमें आनंद है परंतु यह कार्य सतत चलता रहे यह संस्था की इच्छा है।

 

समाज कार्य के माध्यम से लोगों से जुड़ने का आपका जो प्रयत्न है, उसका क्या परिणाम दिखता है?

समस्त महाजन संस्था के माध्यम से हमने कई जगह समाज कार्य किए हैं। परंतु जैसा कहा जाता है, सुसंगति का परिणाम तुरंत नजर नहीं आता, उसके लिए समय लगता है। समाज कार्य के लिए हमने संस्था के माध्यम से पूरे भारतवर्ष का भ्रमण किया। गावों के लोगों ने समाजकार्य में योगदान तो दिया ही परंतु स्वत: होकर शराब, गुटखा इ. छोड़ने का निश्चय किया। समाज कार्य करते समय अनेकों के साथ आत्मीय संबध हुए। आज भी उनके घरों में शुभ कार्यों के अवसर पर संस्था को आग्रहपूर्वक निमंत्रण दिया जाता है।

सत्कार्यों के आधार पर किए जा रहे इन समाज कार्यों की भविष्य में क्या कोई सीमा रेखा निश्चित की गई है?

समाज कार्य करने की कोई सीमा रेखा नहीं है। हमारे द्वारा वह निरंतर जारी रहेगी। आज जिन समाज कार्यों को हम कर रहे हैं भविष्य में उन्हें और किस प्रकार प्रभावी बनाया जा सकता है यही हमारा लक्ष्य है। देश को सुदृढ़ एवं सक्षम बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है वरन यह देश हमारा है, इस भावना से हर एक को स्वत: होकर देश की प्रगति में हाथ बंटाना चाहिए।

आने वाले पांच वर्षों के लिए समस्त महाजन संस्था का क्या लक्ष्य है?

आगामी पांच वर्षों में भारत के साढ़े छह लाख गांवों में सक्रिय होने का संस्था का प्रयत्न रहेगा। महाजन अर्थात अच्छे लोगों का समूह। संपूर्ण देश यदि अच्छे मार्ग पर चलेगा तो थोड़ी ही कालावधि में देश में प्रगति दृष्टिगोचर होगी। फिर से अपना देश भारत संपन्न हो सकता है। आने वाले पांच वर्षों में Gross National Happynes Index प्राप्त करने हेतु संस्था निश्चित ही प्रयत्नशील रहेगी।

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