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जे. जे. स्कूल ऑफ आर्ट्स का स्वर्ण पदक, राष्ट्रीय कला अकादमी का राष्ट्रीय पुरस्कार, साथ ही महाराष्ट्र गौरव पुरस्कार से सम्मानित विख्यात अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार उत्तम पाचारणे द्वारा शताब्दी अस्पताल में स्थापित होने वाले डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का निर्माण किया गया है। इस सम्बंध में उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश।

मॉडर्न आर्ट से शिल्पकला की ओर मुडे उत्तम पाचारणे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को अपना प्रेरणा स्रोत मानते हैं। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के बारे में वे कहते हैं ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संपूर्ण जीवन काल में वंचितों के लिए, पिछड़े वर्ग के लिए कार्य किया। वे ज्ञानी तथा विद्वान थे। अमेरिका में जाकर उन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण की थी। परंतु फिर भी भारत वापस आए तथा यहां आकर उन्होंने दलित समाज तथा उनके उत्थान के लिए कार्य किया। ऐसा लगता था कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर कोई अन्य धर्म स्वीकार कर लेंगे परंतु उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर कार्यालय में जाकर कुछ लोगों से विचार-विमर्श किया तथा बौद्ध धर्म स्वीकार करके अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए पिछड़े वर्ग को न्याय दिलाने की बात सोची। बाबासाहेब अंबेडकर जैसे ज्ञानी व्यक्ति जिस ओर चलते हैं, समाज भी उनके पीछे चल देता है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने बौद्ध धर्म के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म का स्वीकार न करते हुए बहुत बड़े हिंदू समाज को अन्य धर्म स्वीकारने से बचा लिया।’

यह पूछने पर कि शताब्दी अस्पताल में स्थापित होने वाले डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर  की प्रतिमा बनाने के पूर्व उन्होंने किन बातों का ध्यान रखा, वे कहते हैं ‘डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का निर्माण करते समय कुछ विशेष बातें ध्यान में रखनी थीं। इस प्रतिमा की ऊंचाई आधार सहित 11 फुट है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का पेट थोड़ा बाहर क्यों निकला हुआ था।  उनका रहन-सहन संभ्रांत लोगों की तरह होता है। हमेशा सूट-बूट टाई पहनने वाले डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का व्यक्तित्व हमेशा आकर्षक तथा रौबदआर दिखाई देता था। वे हमेशा ही एक प्रखर वक्ता के रूप में समाज के सामने खड़े होते थे। उनका शिल्प बनाते समय मैं यही कल्पना करता हूं। अतः उनकी नजर हमें देख रहे हैं, इसी प्रकार बनानी होती है। क्योंकि, हम यह सभी जानते हैं कि वह संविधान प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। अतः उनके हाथ में संविधान की किताब दिखाई जाती है।’

आजकल विश्व में अधिकतम ऊंचाई की प्रतिमा स्थापित करने का चलन है। हाल ही में सरदार वल्लभभाई पटेल की सर्वोच्च मूर्ति की स्थापना गुजरात में की गई है। इस बारे में उत्तम पाचारणे कहते हैं ‘मुझे इस बात का गर्व है कि भारत में इतनी बड़ी मूर्ति की स्थापना की गई है। उच्चतम तकनीक के कारण भव्य मूर्तियां स्थापित करना आसान हो गया है। भारत का हर नागरिक चाहता है कि सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को देखा जाए। साथ ही मैं यह भी चाहूंगा इस बार भले ही मेरे द्वारा यह कार्य न किया गया हो परंतु भविष्य में इस प्रकार का शिल्प बनाने का अवसर मुझे भी मिले।’

सांसद गोपाल शेट्टी द्वारा शताब्दी अस्पताल में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने के संदर्भ में उत्तम पाचारणे का कहना है कि ‘सांसद गोपाल शेट्टी अत्यंत ही कर्मठ कार्यकर्ता हैं। समाज के सभी वर्गों के लोगों के लिए वे सदा कार्यरत रहते हैं। शताब्दी रुग्णालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करने की कल्पना जब उनके मन में आई तब उन्होंने मुझे अपने कार्यालय में बुलाकर यह बात बताई। मैंने उनके इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया। काम शुरू करने के उपरांत वे बीच-बीच में मूर्ति किस प्रकार तैयार हो रही है यह देखने आया करते थे। सरकार तथा कला निदेशालय से सभी प्रकार की अनुमति लेकर हमने यह कार्य शुरू किया था।’

अपने अन्य प्रकल्पों के बारे में उत्तम पाचारणे का कहना है कि ‘महापुरुषों के शिल्पों के अलावा देश के लिए लड़ते हुए जो सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जिन्हें परमवीर चक्र प्राप्त हुआ है, उन सैनिकों की मूर्तियां स्थापित कर उनके बलिदान की गाथा वहां लिखी जाए, इस हेतु परमवीर चक्र उद्यान बनाने का विचार कर रहा हूं। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस संदर्भ में चर्चा की जा रही है।’

उत्तम पाचारणे ने अंदमान में स्थित शिल्प का भी निर्माण किया है। साथ ही विदेशों में भी उनके द्वारा बनाए गए शिल्प तथा महापुरुषों की मूर्तियां स्थापित की गईं हैं।

This Post Has 2 Comments

  1. Hardik Abhinandan Sir,
    Khup changle kam kartay sir anek shubhechha.

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