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किसी घने जंगल में एक विशाल पेड़ था जिसकी ऊची टहनियों पर एक चिड़िया का परिवार घोसला बनाकर रहता था उस चिड़िया का परिवार मजे से जीवन आनन्द गुजार रहे थे, फिर कुछ दिनों के बाद वर्षा ऋतू प्रारम्भ हो गयी तो चिड़िया अपने बच्चो और अन्डो के साथ घोसले में छिप गयी इतने में उस पेड़ पर बहुत सारे बन्दर भी बारिश से बचने के लिए जो की भीग गये थे और ठंड के काप भी रहे थे

बंदरो की ऐसी स्थिति देखकर चिड़िया को दया आ गयी और बंदरो से बोली आप लोग तो इतने बड़े हो आपके हाथ पाँव भी है फिर आप लोग बारिश से बचने के लिए अपना घर क्यू नही बनाते हो

चिड़िया की यह बात सुनकर भीगे बंदरो को बड़ा गुस्सा आया और उनमे से एक बन्दर बोला तुम ज्यादा नही बोल रही हो, ज्यादा शिक्षा हमे मत दो और तुम मत समझाओ की क्या करना हैयह बात सुनकर चिड़िया को दुःख हुआ और बोली की हमने तो आपको अच्छे जानकर यह बात कही लेकिन आप लोग समझते ही नही तो भला मै क्या कर सकती हु

यह बात सुनकर एक दुष्ट बन्दर बोला रुक जाओ पहले इसका घर तोड़ देते है फिर इसको समझ में आएगा हमलोगों का दुःख, इसके बाद वह बन्दर पेड़ की टहनियों से चिड़िया का घोसला गिरा दिया जिसमे चिड़िया के अंडे और बच्चे जमीन पर गिरते ही मर गये और चिड़िया का घर भी टूट गया फिर चिड़िया चीखती चिल्लाती रही लेकिन वह बंदरो का कुछ नही कर सकती थी.

कहानी से शिक्षा

इसलिए इस कहानी से हमे यही शिक्षा मिलता है की दुष्ट प्रवित्ति के लोगो को सलाह देना अपने ऊपर विपत्ति मोल लेना है इससे अच्छा है की दुष्ट लोगो से जितना दूर रहा जाय उतना ही अच्छा है

 

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