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किसी भी जंगल में सबसे खतरनाक प्राणी कौन सा ? तो है उस जंगल का सबसे बड़ा शिकारी प्राणी / जैसे ताडोबा, बांधवगड़, कान्हा, रणथबोर इन जंगलो में जिसके शरीर पर पट्टे हैं ऐसा बाघ। जयपूर के पास झालना पार्क में यह स्थान चीते का है। गुजरात में सासनगीर राष्ट्रीय उद्यान में यह स्थान सिंह का है। परंतु यदि किसी जंगल में बाघ या सिंह जैसा शिकारी प्राणी होता है तो अन्य शिकारी प्राणी होते ही नही हैं ऐसा नही है। जंगली बिल्लीयों से लेकर सियार जैसे अन्यों की तुलना में छोटे शिकारी प्राणी भी उसी जंगल में रहते हैं। फर्क केवल इतना है कि वे बड़े शिकारी प्राणियों से दूर रहते है। परंतु एक शिकारी प्राणी ऐसा भी है जिसके अस्तित्व का संज्ञान शेर एवं चीते भी लेते है। ये शिकारी प्राणी याने जंगली कुत्ते। जीवशास्त्र के वर्गीकरण के अनुसार ‘कॅनिडे’ इस जाति में जंगली कुत्ते, जिन्हे ‘ढोल’ भी कहते हैं, आते हैं। इसी जाति में सियार, लकड़बग्धा, पालतू कुत्ते ये प्राणी भी आते हैं। जंगली कुत्ते आकार एवं रंगरूप में पालतू कुत्तों जैसे ही दिखते हैं। केवल उनकी बड़े बालों वाली पूंछ का रंग काला होता है। उसके लाल एवं कुछ – कुछ तांबे के रंग जैसे रंग पर वह खूब फबते  है।

आकार से बाघ या चीते से छोटे होते हुए भी जंगली कुत्ते उनकी अपेक्षा ज्यादा खतरनाक क्यों माने जाते हैं? इसका कारण वे झुंड (समूह) में रहते हैं और समूह में ही शिकार करते हैं। जहां तक शिकारी प्राणियों का प्रश्न है वे कभी समूह में नही रहते। परंतु जंगली कुत्ते ये उसका अपवाद है।जंगली कुत्तों के समूह में साधारणत: बारह से चौदह सदस्य होते हैं। इनमें 5-6 नर, 3-4 मादा एवं कुछ पिल्ले होते हैं। समूह में रहने वाले ये जंगली कुत्ते एक ही जगह हमेशा नही रहते। वे थोड़े – थोड़े समय के बाद अपना स्थान बदलते रहते है।

जंगली कुत्तों के शिकार करने की पध्दति बेहद विशेष होती है। भक्ष्य (शिकार) जैसे हिरन, सांभर जैसे प्राणी मिलने पर समूह के नर कुत्ते उसे उसके समूह से अलग करते हैं एवं बाद में उसका पीछा करते हैं। यह पीछा वे रिले पध्दति से करते हैं। इसमें पहले दो कुत्ते शिकार के पीछे दौड़ते हैं और दौड़- दौड़ाकर उसे थकाते हैं। बाद में दुसरे दो कुत्ते उसकी पीठ पकड़ते हैं। इसके लिये ये कुत्ते आपस में सीटी बजाकर एक दूसरे को इशारा करते हैं और तय करते हैं कि शिकार पर किसने कहां से हमला करना है। इतने अनुशासित तरिके से शिकार करने के कारण जंगली कुत्तों के प्रयत्न कभी असफल नही होते हैं। शिकार को वे इतने तेजी से खाते हैं कि पचास किलो से कम वजन का शिकार वे केवल दो मिनट में चट कर जाते हैं। इससे बड़ा शिकार समाप्त करने में अधिकतम दस मिनट का समय लगता है। हमेशा इकठ्ठे रहने के कारण एक समय बाघ को भी मारने की उनकी क्षमता होती है। यह बाघ को भी पता है। भारत में ताडोबा, कान्हा, नागरहोले के साथ- साथ असम एवं मेघालय के जंगलों में भी जंगली कुत्ते पाये जाते हैं।

“झुडं में तो कुत्ते आते हैं… शेर तो अकेला आता है… ” यह डायलॉग सुनते समय यह नही भूलना चाहिये कि जंगली कुत्ते झुंड में आते हैं और शेर पर भारी होते हैं।

This Post Has One Comment

  1. सोने वालों को जंग के लिए प्रर्याप्त समय है उठाया जा सकता है 🤔🙏

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