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प्रकृति में मनुष्य प्राणी प्रकृति के अन्य घटकों अर्थात पशु, पक्षी, कीटक, रेंगने वाले प्राणी, जलचर इ. से यदि किसी बात में अलग है तो वह है उसकी संवाद क्षमता। इस संवाद के माध्यम से वह अपनी भावनायें व्यक्त कर सकता है। अब प्रश्न यह है कि क्या अन्य पशु – पक्षी – किटक आपस में संवाद साधते ही नही? क्या उनकी भाषा नही है? परंतु ऐसा नही है। सभी पशु – पक्षी – किटक आपस में संवाद साधते हैं। उनकी भाषा भी होती है परंतु वह अपनी भाषा से अलग होती है। छोटी सी मधुमक्खी जैसे किटकों को भी आपस में संवाद साधने की आवश्यकता होती है और वे उसे अपनी भाषा में पूरा करते हैं।

साधारणत: हम मधुमक्खियों को पहचानते है। वे अनुशासनात्मक जीवन जीने के लिये जानी जाती है। दिनभर फूल पर बैठकर शहद एकत्रित करने वाली मधुमक्खियों का छत्ता याने एक अनुशासित बसाहट होती है। इस बसाहट (छत्ते) की रचना से लेकर उसमें रहने वाली मधुमक्खियों के सामुदायिक जीवन तक अनेक विशेषतायें हमें देखने को मिलती है। इस छत्ते में एक रानी मक्खी होती है और वह केवल नई पीढ़ी को जन्म देने का काम करती है। इस नई पीढ़ी में से मजदूर मक्खियां और सैनिक मक्खियां बनाई जाती हैं। वैसे ही नई रानी मक्खी भी निर्माण की जाती है। रोज जाकर शहद इकठ्ठा करके लाने की जिम्मेदारी मजदूर मक्खियों की होती है। इसलिये हमें फूलों पर बैठने वाली और उसका रस सोखने वाली मधुमक्खियां अक्सर दिखाई देती है। प्रत्येक फूल पर बैठकर शहद इकठ्ठा करना कितना मेहनत का काम होता, परंतु योग्य रीति से मेहनत करने से ये अपने काम में सफल होती है।

इसके लिये उन्हे सहायता मिलती है उनके नृत्य – भाषा की। हां, मधुमक्खियों की अपनी एक खास नृत्य भाषा होती है। रोज सुबह मधुमक्खियों के छत्ते से एक खोजी दस्ता बाहर निकलता है। ये मक्खियां आजू- बाजू के परिसर में घुमकर कहां फूल हैं, किन फूलों में रस हैं, इसकी खोज करता है और उसकी जानकारी लेकर छत्ते की ओर वापस आता है। छत्ते के सामने आकर ये मक्खियां एक निश्चित हावभाव करती हैं। देखने वाले को लगता है कि ये मक्खियां शायद नृत्य कर रही हैं। परंतु छत्ते में की मक्खियों को उनकी इस हलचल से ही पता लगता है छत्ते से बाहर आने के बाद फूल दायें तरफ हैं या बायें तरफ हैं, किन फूलों में रस ज्यादा है, किस दिशा में फूल ज्यादा हैं इ.। यह जानकारी मिलने से मजदूर मक्खियों को शहद इकठ्ठा करने में आसानी होती है। उन्हे फूलों में शहद को ढूंढ़ने में वक्त जाया नही करना पड़ता। मधुमक्खियों की नृत्य भाषा को ढूंढ़ने का श्रेय डॉ. कार्ल वॉन फ्रिश्च को जाता है। इस संशोधक ने अपने विद्यार्थियों सहित मधुमक्खियों के नृत्य का अभ्यास कर उसका अर्थ खोजा एवं मधुमक्खियां नृत्य भाषा में संवाद साधती हैं, यह विश्व को बताया।

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