हिंदी विवेक : we work for better world...

लोकसभा में वित्त वर्ष 2017-18 के लिए पेश किए गए आम बजट के साथ ही एक इतिहास भी जुड़ गया। 9& साल में पहली बार ऐसा हुआ कि रेल बजट, आम बजट के साथ पेश किया गया। मोदी सरकार के कार्यकाल में हुई नोटबंदी के बाद जो कयास लगाए जा रहे थे कि बजट भी कुछ नया होगा वैसा ही सामने आया है। बजट में राहतकारी कदम उठाने के साथ ही भविष्य की योजनाओं पर अमल लाने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाने को लेकर फोकस किया गया है, वहीं किसानों सहित सभी वर्ग को खुश करने के लिए केन्द्र सरकार ने अपने स्तर पर जो कदम उठाए है वह जरूर लोगों के लिए मददगार साबित होंगे। ऐसे बजट का जनता को वर्षों से इंतजार था। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मंगलवार को आर्थिक समीक्षा के दौरान सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की थी तभी से अंदाजा लगाया जा रहा था कि केन्द्र सरकार जो आम बजट पेश करेगी वह आर्थिक सुधारों को ध्यान रखने के साथ ही दूरदर्शी भी होगा, क्योंकि प्रणव मुखर्जी एक अ‘छे वित्त मंत्री भी रह चुके है जो अपने कार्यकाल में श्रेष्ठ बजट पेश करने में कायमब रहे। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में पेश किए 2017-18 के बजट में केंद्र सरकार ने करदाताओं को बड़ी राहत दी है। इनकम टैक्स ढांचे में बदलाव करते हुए मोदी सरकार ने बजट में अब तीन लाख तक की आमदनी टैक्स फ्री कर दी है। इनकम टैक्स स्लैब को 2.5 लाख से बढ़ाकर तीन लाख किया गया है। तीन से पांच लाख तक की आय पर पांच फीसदी टैक्स देना होगा। केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2.5 लाख रुपये और 5 लाख रुपये के बीच की आय वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए टैक्स स्लैब की मौजूदा दर को मौजूदा 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। इसके परिणामस्वरूप 5 लाख रुपये से कम आय वाले सभी करदाताओं की कर देनदारी घटकर शून्य (छूट सहित) हो जाएगी या उनकी मौजूदा देनदारी का 50 प्रतिशत रह जाएगी। केन्द्रीय वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि कराधान का वर्तमान बोझ मुख्यत: ईमानदार करदाताओं और वेतनभोगी कर्मचारियों पर है, जो अपनी आय को सही रूप में दर्शाते हैं। अत: नोटबंदी के पश्चात इस वर्ग के लोगों की यह आशा जायज है कि उनके कराधान के बोझ को कम किया जाए। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि यदि निम्न आय स्लैब के लिए टैक्स की दर को सामान्य रखा जाता है, तो बड़ी संख्या में लोग कर दायरे में आएंगे। उन्होंने भारत के सभी नागरिकों से यह अपील की कि यदि उनकी आय 2.5 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के सबसे निचले स्लैब के अंतर्गत आती है तो वे 5 प्रतिशत कर की छोटी सी अदायगी करते हुए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें। सरकार कर के दायरे में ऐसे लोगों को भी लाने का प्रयास कर रही है, जो करों की चोरी कर रहे हैं। अत: कर दायरे को बढ़ाने के लिए व्यावसायिक आय से इतर 5 लाख रुपये तक की कर योग्य आय वाले करदाताओं के लिए आयकर रिटर्न के रूप में भरे जाने हेतु सिर्फ एक पृष्ठ का फॉर्म पेश करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त इस श्रेणी के किसी भी व्यक्ति, जो प्रथम बार आयकर रिटर्न भरता है, को प्रथम वर्ष में तब तक किसी भी जांच का सामना नहीं करना पड़़ेगा, जब तक कि उसके उ‘च मूल्य वाले लेन-देन के बारे में विभाग के पास विशिष्ट सूचना उपलब्ध न हो। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि लाभ की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए लाभार्थियों के इस समूह को उपलब्ध छूट के मौजूदा लाभ को घटाकर 2500 रुपये किया जा रहा है, जो &.5 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले करदाताओं के लिए ही उपलब्ध है। इन दोनों उपायों का संयुक्त प्रभाव यह होगा कि प्रति वर्ष & लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर देनदारी शून्य होगी और & लाख रुपये से लेकर &.5 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों के लिए कर देनदारी मात्र 2500 रुपये होगी। चूंकि 5 लाख रुपये तक की आय वाले करदाताओं की कर देनदारी घटाकर आधी की जा रही है, अत: बाद के स्लैबों में आने वाले करदाताओं की सभी अन्य श्रेणियों को भी प्रति व्यक्ति 12,500 रुपये का एक समान लाभ मिलेगा। इस उपाय के फलस्वरूप सरकार द्वारा परित्यक्त की जा रही कुल कर राशि 15,500 करोड़ रुपये बनती है। जेटली ने अपने शुरुआती बजट भाषण में नोटबंदी को सरकार का एक साहसिक कदम बताया और कहा कि इससे दशकों से जारी कर चोरी को रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि महंगाई नियंत्रित हो गई है। निम्न विकास दर की जगह उ‘च विकास दर ने ले ली है और काले धन के खिलाफ व्यापक स्तर पर अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि अगले वित्त वर्ष में देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट आएगी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में बजट में शामिल प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। देश के इतिहास में पहली बार बजट तय समय से करीब एक महीने पहले पेश हो रहा है। इस बार रेल बजट और आम बजट एक साथ पेश हो रहे हैं, जबकि 1924 से ही रेल बजट अलग पेश होने की परंपरा रही है। इस बजट से लोगों को बहुत सी उम्मीदें हैं। आम लोगों को आयकर अधिनियम की धारा 80सीसी के तहत कर छूट की सीमा बढ़ाए जाने की उम्मीद है तो उद्योग जगत को कॉर्पोरेट कर, उत्पाद एवं सीमा शुल्क में सुधार की उम्मीद है। नोटबंदी के कारण आर्थिक गतिविधि में शिथिलता अस्थायी है और इसका प्रभाव अगले वित्त वर्ष पर नहीं पड़ेगा। जेटली ने लोकसभा में 2017-18 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि नोटबंदी से वित्तीय बचत के प्रवाह में वृद्धि और अर्थव्यवस्था के अधिक औपचारिक होने के रूप में दीर्घस्थायी लाभ मिलने की प्रबल संभावना है। जेटली ने कहा कि नोटबंदी का प्रभाव अगले वित्त वर्ष पर नहीं पड़ेगा। हमें पूरा भरोसा है कि नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लोगों के जीवन पर सकारात्मक असर होगा। जेटली ने कहा कि नोटबंदी जनहित में लिया गया एक बड़ा और साहसिक फैसला था। इससे हमारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) स्पष्ट और वास्तविक होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आम बजट की सराहना करते हुए कहा कि वित्त मंत्री ने ठोस और उत्तम बजट पेश किया है। इस साल के बजट में ये खास ख्याल रखा गया है कि देश का हर वर्ग लाभान्वित हो। पिछले दो सालों में सरकार ने जो फैसले किए हैं, उस पर आगे बढऩे का हमारा संकल्प है। ये बजट हमारे सपनों, संकल्पों से जुड़ा है। पीएम मोदी ने कहा कि कर प्रणाली में सुधार से मध्यम वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। व्यक्तिगत इनकम टैक्स कम करना साहसिक फैसला है। इस बजट से संपूर्ण आर्थिक विकास में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि बजट में किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया गया है। स्वास्थ्य और उ‘च शिक्षा के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने आम बजट पर कहा कि यह बजट देश के विकास के लिए, हमारे भविष्य और नयी पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण है जिसमें गांव, गरीब, किसान, शोषित, पीडि़त, दलित, महिलाओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। बजट से भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ निरंतर लड़ाई और इसे समाप्त करने की सरकार की प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। पीएम ने यह भी कहा कि राजनीतिक दल हमेशा से चर्चा में रहे हैं। बजट में राजनीतिक चंदे पर बनी योजना एक बड़ा काम है। पीएम ने कहा कि आम बजट में रेल बजट में विलय से ट्रांसपोर्ट सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा। केंद्र सरकार का मकसद है कि किसानों की आय में दोगुने की बढ़ोतरी हो। आम बजट 2017 किसानों, गरीबों और छोटे व्पारियों का बजट है। देश के आम लोगों में आशा और उत्साह का संचार होगा।
अरुण जेटली ने कहा कि रेल सेफ्टी फंड के तहत रेलवे को 5 साल के लिए 1 लाख करोड़ का फंड मिलेगा। 2017-18 में रेलवे में इन्वेस्टमेंट एक लाख &1 हजार करोड़ रु. का होगा जिसमें करीब 55 हजार करोड़ सरकार देगी। 2016-17 में यह राशि एक लाख 21 हजार करोड़ थी। जेटली ने कहा कि रेल सेफ्टी फंड के तहत पांच साल के लिए 1 लाख करोड़ मिलेंगे। सरकार गाइडलाइन बनाएगी ताकि इस फंड का इस्तेमाल हो सके। 2020 तक ब्रॉडगेज लाइन पर मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग खत्म कर दी जाएगी। रेलवे एक जगह से दूसरी जगह तक इंटीग्रेट ट्रांसपोर्ट सॉल्यूशन भी लाएगा। टूरि’म और तीर्थयात्रियों के लिए नई ट्रेनें शुरू की जाएंगी। इस फाइनेंशियल ईयर में रेलवे &500 किमी का ट्रैक बिछाएगा। ट्रेनों में एसएमएस के जरिए क्लीन माई कोच का विस्तार करके कोच मित्र सुविधा शुरू की जाएगी। ये कोच मित्र आपके डिब्बे से जुड़ी हर प्रकार की समस्या को हल करेंगे।

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu