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मुंबई का विकास देश की अर्थव्यवस्था के विकास हेतु बहुत आवश्यक है। इस दृष्टीसे मुंबई में ‘इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर’ की स्थापना की जा रही है। बुलेट ट्रेन और कोस्टल रोड के माध्यम से मुंबई के विकास का व्हिजन भारतीय जनता पार्टी ने रखा है। गढ्ढों और रस्तों से परे जाकर मुंबई का देश की आर्थिक राजधानी के रूप में विकास होना आवश्यक है। ऐसा मत सांसद पूनम महाजन ने व्यक्त किया। हिंदी विवेक के साथ हुई खास बातचीत में उन्होंने यह बताया।

मुंबई के विकास से आपका क्या तात्पर्य है?
मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है। भारत तीव्रता से आर्थिक विकास कर रहा है। पिछले महीने ही कई अखबारों में छपा था की भारत ब्रिटेन को भी पीछे छोडकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के स्तर पर छठे स्थान पर है। इसका तात्पर्य यह है कि हमनें भारत के लिए जो ध्येय निश्चित किया है, उसे पूर्ण करने हेतु हम सही दिशा में जा रहे है। वैश्विक स्तर पर सबसे अच्छी अर्थव्यवस्थाओं में भारत पहले तीन देशों में शामिल हो, अब हमारा यही ध्येय है। उस दृष्टीमें हमने एक और कदम आगे बढाया है। लेकिन देश आर्थिक दृष्टी से सफलताएँ प्राप्त कर रहा हो और ऐसे समय में देश की आर्थिक राजधानी कमजोर रहे तो यह भारत की अर्थव्यस्था की दृष्टीसे हानिकारक है। मुंबई यह केवल एक शहर नहीं, तो एक मेट्रोपॉलिटिन रीजन है। भारत की जीडीपी में मुंबई का २५ % हिस्सा है। इस लिए दुनिया की छठी सबसे मजबूत अर्थव्यव्सथा वाले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को ‘ग्लोबल आर्थिक सिटी’ में परिवर्तित करना बेहद जरूरी है। और उसके लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास होना आवश्यक है। मुंबई का विकास यह केवल १ गली या २ रास्तों तक सीमित न रखकर उसका सर्वांगीण विकास करना आवश्यक है। मुंबई भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बडा हिस्सा माना जाता है। इसलिए उसका ‘ग्लोबल’ विकास होना बहुत जरूरी है।

आपके नेतृत्व में इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर की स्थापना होने जा रही है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से मुंबई के विकास में क्या मदत होगी?
जैसा की मैने पहले भी कहा है, मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है। इसलिए मुंबई को हमें वैश्विक स्तर पर आगे लेकर जाना है। आज एशिया की सर्वाधिक शक्तीशाली अर्थव्यवस्था की बात की जाय तो शांघाई, सिंगापुर और टोकियो इन शहरों का नाम सामने आता है। सिंगापुर के बाद इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर दुबई में स्थापित हुआ है। हालाकि दुबई इंटरनॅशल फायनॅन्स सेंटर के लिए योग्य केंद्र ना होते हुए भी दुबई इसके लिए प्रयास कर रहा है। लेकिन मुंबई में स्वाभाविक रूप से इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर होने की दृष्टी से सारे गुण हैं। ‘मुंबई इस अ नॅचरल सेंटर फॉर फायनॅन्स सेंटर’। आर्थिक राजधानी के लिए जो जरुरी है, वह सबकुछ मुंबई में है। यहाँ बॉलिवुड है, यहाँ लघु एवं मध्यम आकार के उद्योग हैं, मुंबई में कॉर्पोरेट सेक्टर है और छोटे बडे व्यापारी भी हैं। मुंबई आर्थिक दृष्टी से संपूर्ण और स्वावलंबी है। और देश के अन्य शहरों के लिए पूरक भी है। मेरे निर्वाचन क्षेत्र में एशिया का सबसे बडा चप्पलों का बाजार है। इस बाजार के छोटे व्यापारी बताते हैं की, इसकी स्पर्धा चीन से है। मुंबई में ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ है, ‘एनएसई’ भी यहीं है। इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर बीकेसी में शुरु करने के पीछे सबसे बडा कारण, सभी राष्ट्रीय और प्रायवेट बँकों के कार्यालय यहाँ हैं। बडे बडे बिझनेस हाउस बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में हैं। मुंबई का सबसे बडा बिझनेस यहीं से चलता है।

अब मुंबई का फैलाव और भी तीव्र गती से हो रहा है। पूर्व और पश्चिम उपनगरों के लिए बीकेसी मध्यवर्ती स्थान पर है। पीएमआरडीए के माध्यम से यहाँ तीन नये पुल बनाए गए हैं। इस मार्ग से हम ईस्ट मुंबई, वेस्ट मुंबई, एससीएलआर और एक्सटेंडेड एससीएलार पश्चिम की तरफ से भी जा सकते हैं, तथा धारावी की ओर से भी जाया जा सकता है। इसलिए संचार की दृष्टी से भी ‘आयएफसी’ के लिए बीकेसी एक मध्यवर्ती स्थान है।

फिलहाल भारत की जीडीपी ग्रोथ तेजी से आगे बढ रही है। आर्थिक राजधानी की भी इस में मदद हो जाय तो वैश्विक स्तर पर पहली तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का नाम जरुर शामिल हो सकता है। इस दृष्टी से इंटरनॅशनल फायनॅन्स सेंटर एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है।

आयएफसी के माध्यम से यहाँ पर हजारो करोड रुपयों का व्यापार हो सकता है। स्टॉक एक्सचेंज, बँकिंग सेक्टर का विकास हो सकता है। ५० हेक्टेयर के क्षेत्र में हम फायनॅन्शिएल एसईझेड का निर्माण करने की योजना कर रहे हैं। यहाँ इन्वेस्टर्स को टॅक्स हॉलिडेज भी मिलेंगे।

बडी बडी कंपनियों को अपने काम के लिए फ्रंट ऑफिस की आवश्यकता होती है। सिंगापुर इसका सबसे बडा उदाहरण है। बिझनेस कंपनियाँ जब सिंगापुर में अपना फ्रंट ऑफिस खोलती हैं, तो उनका बॅक ऑफिस चीन में होता है। इसलिए सिंगापुर में जगह और इन्फ्रास्ट्रक्चर महंगा होता है जबकी चीन में सस्ता। बडे बडे फायनॅन्शिअल इन्स्टिट्यूट्स, प्रायव्हेट इक्विटी फंड जब बडे इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में अपना पैसा लगाते हैं, तब वे अपना फ्रंट ऑफिस सिंगापुर में रखते हैं, और बॅक ऑफिस शांघाई या दुबई में रखते हैं। आयएफसी की स्थापना के लिए जब तक हम पूरी जी जान से कोशिश नहीं करते तब तक अर्थव्यवस्था को उसका फायदा नहीं होगा। आयएफसी की स्थापना के कारण अर्थव्यवस्था के विकास में बहुत मदद होगी, इसलिए हमें आयएफसी से काफी आशाएँ हैं। आयएफसी से एक और लाभ होगा, इसके पहले चरण में १५ लाख रोजगारों का निर्माण होगा। इसमें कंपनी प्रमुख से लेकर सुरक्षा रक्षकों तक सभी प्रकार के अवसर होंगे। आयएफसी प्रोजेक्ट का निर्माण ५० हेक्टेयर क्षेत्र में हो रहा है साथ ही बांद्रा कुर्ला से लेकर कलीना तक लगभग ५ हजार एकर के क्षेत्र का इसमें समावेश किया जा सकता है।

बांद्रा ईस्ट में पीडब्ल्यूडी की गव्हर्नमेंट कॉलोनी है। यह १०७ से १११ एकर की जगह है। इसके पुनर्विकास का मास्टर प्लॅन तैयार है। आप खुद ही सोचिए आयएफसी के माध्यम से इन सारी चीजों का प्रोजेक्ट में समावेश किया गया है। इसके कारण उस जगह का एफएसआय और हाऊसिंग स्टॉक भी बढ रहा है। ये सारी बातें एक दूसरे से जुडी हुई हैं। इन सभी का विकास आयएफसी के माध्यम से होने वाला है।

बीकेसी से तीन मेट्रो भी जाएँगीं। मुंबई में कुल सात मेट्रो रेल शुरु करने की योजना है। ऑन वन टिकिट ट्रांस्पोर्टेशन हम शुरु कर रहे हैं। यह सारी चीजे एक ‘ग्लोबल’ शहर को ध्यान में रखते हुए ही की जा रहीं हैं। यह विजन, यह दृष्टी ग्लोबल शहर के हिसाब से है। गली से लेकर संपूर्ण मुंबई के विकास की योजना इन्फ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से पूरी की जा रही है। इतना सब कुछ करते हुए मैं यह भी आश्वासन देती हूँ की इन सभी प्रोजेक्ट्स पर मुंबई में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार होगा और उन्हें रोजगार भी मिलेगा। लेकिन इस तरह की ग्लोबल सिटी का विचार, योजना और किसी के पास भी नहीं है, ऐसा व्हिजन अन्य किसी भी पार्टी के पास नहीं है। आज भी सारा वाद विवाद सारी बहस गटर और गढ्ढों को लेकर ही हो रही है। यदी यह समस्या सुलझानी है, तो उसके लिए एक विचारपूर्ण और नियोजित प्लॅन की आवश्यकता है।

मुंबई के हित की दृष्टी से आने वाले समय में केंद्र सरकार की ओर से और कौन से प्रोजेक्ट चलाए जाएँगे?
केंद्र सरकार की ओर से मुंबई को बुलेट ट्रेन की सौगात मिलने वाली है। यह बुलेट ट्रेन आयएफसी के नीचे से होकर जाएगी। यह प्रोजेक्ट गिफ्ट सिटी और आयएफसी इन दोनों के लिए ही पूरक होगा। गिफ्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए सबसे बडा वरदान याने बडे पैमाने पर उपलब्ध जगह है। लेकिन मुंबई में जगह कम है, और जगह उपलब्ध हो भी जाय तो उसकी कीमत बहुत अधिक है। बुलेट ट्रेन के माध्यम से गिफ्ट सिटी के एसईझेड से लेकर मुंबई के आयएफसी तर कनेक्टिविटी का निर्माण होगा। साथ ही अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण भी किया जाएगा। कोस्टल रोड यह भी एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट मुंबई में शुरु किया जाने वाला है। इस संदर्भ में दिल्ली में एक बैठक भी आयोजित की गई थी। उस बैठक में मैं खुद उपस्थित थी। उस बैठक में कोस्टल रोड हेतु आवश्यक सारी इजाजतें मिल गई हैं। अब हम कोस्टल रोड विथ सी लिंक इस तरह का एक बडा प्लॅन तैयार कर रहे हैं। इस कारण मुंबईवासियों को ट्रॅफिक के कारण होने वाली समस्याओं से निजात मिलेगी।

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