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अवामी लीग को बहुमत

हाल ही में हुए आम चुनावों में बांग्लादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजेद की अवामी लीग ने प्रचंड बहुमत प्राप्त किया। उन्होने बेगम खालिदा जिया की बांग्लादेश, नेशनलिस्ट पार्टी की अगुवाई में बने 20 दलों के मोर्चे ‘जातिया औक्य फ्रंट’ को हराया। चुनावों में शेख हसीना की पार्टी को 300 में से 260 सीटे प्राप्त हुई। खालिदा जिया एवं उनकी पार्टी बीएनपी धर्मान्ध एवं जातीयवादी है एवं कट्टर भारत विरोधी है। बांग्लादेश में कट्टर पंथियों को हराकर शेख हसीना द्वारा पुन: सरकार बनाना भारत की दृष्टि से अनुकुल घटना है।

     सन् 1971 में भारत के सक्रिय सहयोग से पाकिस्तान का विघटन होकर बांग्लादेश का जन्म हुआ। शेख मुजीब -उर-रहमान बांग्लादेश के पहले प्रधानमंत्री बने। पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यानमार, भूटान, नेपाल सरीखे पड़ोसी देशों में चुनाव एवं सत्ता परिवर्तन परस्पर संबधो पर परिणाम डालने वाले होते हैं इसलिये उसपर ध्यान रखना पड़ता है।

दक्षिण एशिया के शासक भारत के लिये अनुकुल हों,यह भारत की सुरक्षा एवं दक्षिण एशिया में उसके स्थान के लिये हितकर होता है। हमारे एक और पड़ोसी चीन द्वारा इन 6 देशों को अपने प्रभाव में रखने की कोशिश के बीच मालदीव, श्रीलंका और भूटान में वर्तमान में चुने गये शासक एवं पार्टीयां हमारी दृष्टि से विशेष स्वागतयोग्य घटना है।

शेख हसीना भारत के आश्रय में

भाषा, संस्कृति इ. अनेक बातों के कारण पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के साथ पश्चिम पाकिस्तान की पटरी कभी नही बैठी। इसके कारण पश्चिम पाकिस्तान द्वारा पूर्व पाकिस्तान को दबाने/अत्याचार करने की मुहिम प्रारंभ हुई। 40 लाख लोग मारे गये जिसमें 30 लाख हिन्दु थे। इसके कारण शेख मुजीब -उर-रहमान के नेतृत्व में आन्दोलन प्रारंभ हुआ एवं 1971 में बांग्लादेश स्वतंत्र हुआ। परंतु दुर्भाग्य से 15 अगस्त 1971 को सेना के कुछ अधिकारीयों द्वारा निवास स्थान में घुसकर शेख मुजीब -उर-रहमान की एवं उनके कर्मचारियों की जघन्य हत्या कर दी गई. उस समय शेख हसीना को भारत में शरण दी गई थी एवं वे नई दिल्ली में परिवार सहित रहती थी। सन् 1996 में बांग्लादेश के कट्टर पंथियों, पाकिस्तान समर्थक सेनाधिकारियों के विरोध का सामना करते हुए वे पहली बार देश की प्रधानमंत्री बनी।

 

दरिद्रता, भ्रष्टाचार से आर्थिक प्रगति की ओर –

पिछले एक दशक से शेख हसीना की सरकार बांग्लादेश में है। उसके पूर्व एक दशक तक बेगम खालिदा जिया की सरकार थी। बेगम खालिदा जिया से शासक की, बागडोर  संभालते हुए अराजकता, अव्यवस्था एवं दरिद्रता विरासत में मिली। वर्तमान में जलवायु परिवर्तन, दरिद्रता, भ्रष्टाचार एवं म्यानमार से आये हुए रोहिंग्या मुसलमानों का प्रश्न भी देश के सामने मुंह पसारे खड़े हैं। एक दशक पूर्व शासन संभालते समय विश्व के पहले पांच दरिद्र देशों में बांग्लादेश शामिल था।

शासकीय काम कराने के लिए भ्रष्टाचार ही एक मात्र उपाय था। इस मामले में खालिदा जिया के पुत्र बिचौलिया थे। उनके हाथ में जब तक रकम नही आती थी शासकीय काम नही होता था। भ्रष्टाचार का केंद्रीकरण हो गया था। इन सब के विरोध में शेख हसीना ने खालिद जिया को टक्कर दी और उन्हें सत्ता से बाहर किया। शेख हसीना ने पूरी ताकत से अर्थव्यवस्था को गति दी। देश में निवेश बढ़े एवं देश की प्रतिमा विश्व में अच्छी हो इसका प्रयत्न किया।

बांग्लादेश की प्रगति सराहना योग्य –

बेगम हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की प्रगति हुई, मानव विकास निर्देशांक कैसे बढ़ा, यह विश्व में सराहनीय रहा। सतत पांच वर्ष बांग्लादेश गरीब देशों की सूची में शामिल था। उसमें अब निम्म मध्यम वर्ग एवं मध्यम वर्ग की संख्या लक्षणीय है। रोजगार बढ़ा है, कृषि क्षेत्र में प्रगति हुई है। वस्त्र निर्मिती में बांग्लादेश अग्रणी है।

भारत की अनेक बड़ी कंपनीयां एवं विश्व के रेडीमेड ब्रांड्स को बांग्लादेश से मदत मिलती है। सस्ते एवं कुशल मजदूर, अन्य संसाधनों की उपलब्धता, मेक इन बांग्ला का आंदोलन, इसके कारण उद्योग एवं रोजगार को गति मिली। महिला सक्षमीकरण में भी वे अग्रणी रही। कट्टरवादियों का दमन बाजु कर एवं स्व सहायता समुहों के माध्यम से गरीब महिलाये आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनी। ‘वन बेल्ट वन रोड़’ प्रकल्प के लिये चीन ने 30 अरब डालर की सहायता दी है।

भारत ने भी साढ़ेचार अरब डॉलर की कर्ज के रूप में सहायता दी है। परंतु चीन के प्रभाव में न जाने की एवं भारत से मित्रताभाव रखने की और मुस्लिम देश होने के कारण सउदी अरब से भी सहायता प्राप्त की शेख हसीना की नीति है। चीन से दो पनदुब्बी लेंगे परंतु नौसेना का संयुक्त अभ्यास भारत के साथ करेंगे ऐसी बांग्लादेश की नीति है इसलिये बांग्लादेश में  राजनीतिक स्थिरता भारत के हित में है।

भारत की मांगे –

    सरकारी आंकड़ो के अनुसार भारत में 2 करोड़ से ज्यादा अवैध बांग्लादेशी है। गैर सरकारी आकड़ा चार से पांच करोड़ है। रजिस्टर ऑफ सिटिजंस के अनुसार चालीस लाख से ज्यादा बांग्लादेशी असम में है। पश्चिम बंगाल एवं अन्य प्रदेशों में भी इसी प्रकार की खोज करने की मांग बढ़ रह रही है। भारत की मांग है कि इन अवैध नागरिकों को बांग्लादेश वापस ले एवं भविष्य में जो पकड़ा जाये उसे वापस ले। नई घुसपैठ न हो एवं बांग्लादेश में हिन्दुओं की जमीन चोरी और उन पर अत्याचार तुरंत बंद हो। ऐसी और भी मांगे हैं। आशा करे कि बांग्लादेश की हसीना सरकार इन्हे पूरी कर भारत बांग्लादेश मित्रता को नया आयाम देंगी।

और क्या करना चाहिए

भारत में तेजी से हो रही अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ के खिलाफ आवाज उठाने का साहस (भाजपा और शिवसेना को छोड़कर) भारत के अनेक राज्य सरकार व राजनीतिक पार्टिया नहीं कर पा रही हैं।

बताया जाता है कि राजनीतिक पार्टियों के खुले समर्थन,संरक्षण एवं मौन सहमति से ही अवैध बांग्लादेशी घुसपैठीयों को बढ़ावा मिलता है।

आगामी समय में आम नागरिको को अपने मतदान का प्रयोग कर घुसपैठीयों के समर्थक पार्टियों के खिलाफ मतदान करना चाहिये।2019 के चुनाव में एैसी मुहिम शुरू कर राजनीतिक पार्टियों को

उनकी नीति बदलने पर मजबुर करने की आवश्यकता है।अपने मतदान का प्रयोग कर नीति भ्रष्ट पार्टियों को पराजित करे।

निर्णय को तत्काल लागु करना यह राज्य सरकार और केंन्द्र सरकार की जिम्मेदारी हैं –

घुसपैठ को यदि जल्द नही रोका गया तो फिर 2021 के पहले आसाम व पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद पर कोई बांग्लादेश बैठा हुआ हमें दिखाई देंगा।

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