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दक्षिणी राज्य केरल और तमिलनाडु अपने मनमोहक प्राकृतिक नजारों एवं धार्मिक स्थलों के कारण प्रसिद्ध हैं। वन्य जीवन की विविधता, पहाड़ों की शीतल बयारें और बैक वाटर की सैर को कौन भूल सकता है!

भारतकी दक्षिण दिशा में बसे केरल एवं तमिलनाडु इन दो राज्यों को भारत मां के चरणकमल कहा जाता है। तमिलनाडु के कन्याकुमारी शहर में अरब सागर, बंगाल की खाड़ी एवं हिंद महासागर का संगम होता है। यह त्रिवेणी संगम है ऐसा प्रतीत होता है मानो वह भारत मां के चरणकमलों को पखार रहा है। केरल को देवभूमि और भारत का दक्षिणी स्वर्ग कहा जाता है। केरल को ‘धान का कटोरा’ भी कहा जाता है; क्योंकि भारत में चावल की खेती सब से ज्यादा केरल में होती है। केरल की जलवायु के कारण यहां गरम मसाले जैसे दालचीनी, तेजपत्ता, इलायची, लौंग तथा कॉफी, रबड़ इत्यादि अधिक मात्रा में उगाए जाते हैं। इन सब का निर्यात विदेशों में भी किया जाता है; अत: केरल आर्थिक दृष्टि से सक्षम राज्य है। केरल के कारण ही हमारे देश का निर्यात का ग्राफ बढ़ता रहता है।

आर्थिक दृष्टि से केरल राज्य सशक्त है। यहां की महिलाएं उच्च शिक्षित हैं। केरल में सभी कार्यालयों, उद्योग-व्यवसायों में महिलाओं की संख्या अधिक दिखाई देती है। जब घर में एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार सुशिक्षित होता है। केरल की आर्थिक स्थिति भी उत्तम होने के कारण यहां पर विकास भी हो रहा है। पर्यटन को तो केरल की ‘जीवन रेखा’ कहा जा सकता है। पर्यटन क्षेत्र में केरल का कोई सानी नहीं है। पर्यटकों को भी पर्यटन के लिए केरल किसी खजाने से कम नहीं।

किसी भी प्रकार की छुट्टी के लिए भारत में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थलों मे से एक है यह केरल राज्य। यह राज्य सुजलाम् सुफलाम् है। इस राज्य की संस्कृति और परंपरा भारत में चारों दिशाओं में फैली हुई है। केरल और तमिलनाडु राज्य की खाद्य संस्कृति तो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। पूरे विश्व में सब से खूबसूरत जगहों में राज्य का बोलबाला है। इस राज्य के लोकनृत्य भी तो सारे विश्व भर में सिखाए जाते हैं। भरत नाट्यम, कुचीपुडी इत्यादि नृत्य प्रकार देखते ही मन खुश हो जाता है। केरल राज्य का पर्यटन करना है तो आपको कम से कम तीन या चार विभागों में इसे प्रमाणित करना चाहिए।

सब से पहले प्राकृतिक सौंदर्य से भरे पूरे हिल स्टेशन जैसे कि देवीकुलम, नीलमपेथी, पोनमूडी, कोझीकोडे और सब से प्रसिद्ध विश्व प्रसिद्ध स्थल मून्नार! यह नाम लेते ही मानो मन खिल उठता है। मुन्नार का प्राकृतिक सौंदर्य देखकर ऐसा लगता है जैसे स्वर्ग पृथ्वी पर उतर आया है। मुन्नार को भारत का स्विट्जरलैण्ड भी कहा जाता है। यह मुन्नार शहर समुद्र तल से ५००० से ८००० ऊंचा बसा हुआ है। इदुकी जिले में स्थित यह हिल स्टेशन चाय के बागानों से भरापूरा है। जहां पर भी नजर डालो पूरे पहाड़ों ने जैसे हरे रंग की चादर ओढ़ी हो एसा लगता है। यहां पर पहाड़ों पर फैले हुए चाय के बागानों के बीच बीच में निलगिरी के बड़े-बड़े पेड़ दिखाई देते हैं। इन चाय के बागानों में पर्यटक अपने फोटो खिंचवाने के लिए बहुत ही उत्सुक रहते हैं।

दूसरा विभाग अगर केरल के पर्यटन का देखा जाए तो वह है धार्मिक तीर्थस्थल। केरल में स्थित सारे मंदिरों में एक विशेषता है जो बहुत ही उल्लेखनीय है वह है मंदिरों में अपनाई जाने वाली पवित्रता। किसी भी मंदिर में अगर आप देखेंगे तो मंदिर के गर्भगृह में भगवान की मूर्ति के पास अंदर किसी को भी जाने नहीं देते। सिर्फ और सिर्फ उस मंदिर के पुजारी ही अंदर जाते हैं। बाकी कोई भी अंदर जाकर भगवान को छू नहीं सकते। हर एक भगवान के मूर्ति को वस्त्र पहनाए हुए दिखाई देंगे। गर्भगृह में बड़े-बड़े दीपक तेल डाल कर जलाए जाते हैं। उसी तेल के दीपक के प्रकाश में ही भगवान का विलोभनीय दर्शन होता है। अपने हिंदू शास्त्र के अनुसार तेल या घी से जो दीपक जलाते हैं उससे वातावरण शुद्धि होती है। इसीलिए अपने घरों में भी तेल या घी का दिया जलाने की ही परंपरा है।

केरल के प्रसिद्ध मंदिरों में से हैं गुरुवायुर का चतुर्भुज विष्णु मंदिर, त्रिचुर का वडकुमनाथम मंदिर, त्रिवेंद्रम का शेषशायी विष्णु भगवान जिसका दर्शन तीन दरवाजों से लिया जाता है। पहले दरवाजे से भगवान का मुख दर्शन होता है, दूसरे दरवाजे से नाभी दर्शन होता है और तीसरे दरवाजे से चरण दर्शन होते हैं।

केरल राज्य में सिर्फ हिंदुओं के ही धार्मिक स्थल नहीं हैं तो ख्रिश्चन, ज्यू धर्म के भी धार्मिक स्थल यहां पर हैं। कोचिन के मट्टनचेरी द्वीप समूह पर भारत का सब से पहला चर्च देखने लायक है। १५हवीं शती में ब्रिटिश लोगों ने यह सेंट फ्रान्सीस चर्च बंधवाया है। इसका एक अपना ही ऐतिहासिक महत्व है। इसी मट्टनचेरी द्वीप समूह पर ज्यू लोगों का धार्मिक स्थल है जिसे सिनेगॉग कहा जाता है। यह सिनेगॉग १५६८ में ज्युईश लोगों ने बंधवाया है। वैसे ही यहां पर सेन्टाकृज बैसलिका नाम का भी एक ऐतिहासिक चर्च है। यह चर्च १५०० में पुर्तुगीज लोगों ने बंधवाया था।

तीसरा विभाग अगर केरल राज्य का देखना हो तो वह है भौगोलिक स्थिति से जुड़े हुए सागर किनारे; क्योंकि केरल स्वयं संपूर्ण रूप से सागर किनारे से ही जुड़ा हुआ है। शांत मनभावन समुद्र तट, सुहाना मौसम, समुद्र तट पर फैले हुए नारियल के पेड़ जैसे पूरे विश्व को पुकार-पुकार कर बोल रहे हैं आओ पधारो हमारे केरल राज्य में। जो भी पर्यटक सागर किनारों में घूमना पसंद करते हैं वे केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में आना पसंद करेंगे। यहां के समुद्र किनारे समुद्र स्नान के लिए बहुत ही बढ़िया है। यहां आपको हर प्रकार के समुद्र तट मिलेंगे जैसे कि रेतीले, नारियल से भरे, चट्टानी। यहां पर समुद्र का पानी साफ नीले हरे रंग का मिलेगा। केरल राज्य में बहुत सारे समुद्र तट हैं जो भारत तथा सारे दुनियाभर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षीत करते हैं। यहां के कुछ मशहूर तट हैं अलमपुझ्झा बीच, अक्सा बीच, कोवलाम बीच, चराई बीच, कोल्लम बीच, वर्कला बीच।

केरल राज्य का चौथा और बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है केरल के बैक वॉटर्स और उनके किनारों पर स्थित वन्य जीवन अभयारण्य। किसी के भी थकेहारे मन को शांति देने वाला केरल का बैक वॉटर्स। अहा हा बहुत ही खूबसूरत नजारों से भरा हुआ प्राकृतिक सौंदर्य यहां पर देखने को मिलता है। केरल में एक ऐसा पानी का बड़ा इंटर लॉकिंग नेटवर्क है जिसे हम बैक वॉटर कहते हैं। बारीश का जो पानी सागर में नहीं जाता न नदियों में जाता है वह पानी शहरों में बहता है उसे बैक वॉटर्स कहते हैं। इस बैक वॉटर्स से हम हाऊस बोट से आराम से यात्रा कर सकते हैं। केरल के इस बैक वॉटर्स मे आपको सब से खूबसूरत और दुर्लभ प्रजाति का जलीय जीवन देखने को मिलेगा। बैक वॉटर्स के दोनों किनारों पर पत्तेदार पौधे नारियल के पेड़, केले के पेड़, खजूर के पेड़, पूरे माहोल में हरियाली भर देते हैं। हम जब बैक वॉटर्स में से घूमते हैं तो ऐसा लगता है मानो हम इस पानी में और उसके प्राकृतिक सौंदर्य में डूब जाए। नजारे देखते-देखते नजर भर आती है लेकिन मन नहीं भरता। केरल के कुछ मनभावन खूबसूरत बैक वॉटर्स जो आप देख सकते हैं जिसे आप कभी भूल नहीं सकते वे हैं अलेप्पी बैक वॉटर्स, कोल्लम बैक वॉटर्स, कोझीकोडे बैक वॉटर्स, कुमार कोम बैक वॉटर्स। इसी बैक वॉटर्स में कुछ दुर्लभ प्रजातियां देखने को मिलती हैं। कोस्टल का वन्य जीवन और पक्षी भी यहां देखने को मिलते हैं।

जैसे केरल राज्य वैसा ही भारत की दक्षिण दिशा में बसा हुआ है तमिलनाडु राज्य है। केरल जैसा प्राकृतिक सौंदर्य नहीं लेकिन धार्मिक स्थलों से भरापूरा है यह राज्य। भारत के चार दिशाओं के जो धाम हैं उनमें से दक्षिण दिशा का धाम इसी राज्य में है। वह है रामेश्वरम, जो बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है। भारत भूमि का दक्षिण दिशा का आखरी शहर है कन्याकुमारी, जहां पर स्थित है साक्षात देवी श्री कन्याकुमारी जो बावन शक्ति पीठों में से एक है। कन्याकुमारी यह शहर तो स्वामी विवेकानंद के कारण ही पूरे विश्व में प्रख्यात है। स्वामी विवेकानंद जिन्होंने अपना धर्म बाहर देश में जाकर पूरे विश्व को समझाया। उन्होंने यहां पर जिस चट्टान पर बैठ कर तपस्या की वही चट्टान आज विश्व भर में विवेकानंद रॉक मेमोरियल के नाम से जानी जाती है। तमिलनाडु में स्थित मदुराई शहर की मां मीनाक्षी देवी भी बावन शक्ति पीठों में से एक है। रामेश्वरम का मंदिर, मदुराई का मीनाक्षी देवी का मंदिर भारतीय निर्माण कला और शिल्पकला का एक उत्कृष्ठ, सुंदर नमूना है। इन मंदिरों में सैकड़ों विशाल खंबे हैं जो देखने में एक जैसे लगते हैं लेकिन नजदीक जाकर बारीकी से देखा जाए तो मालूम होगा कि हर एक खंबे पर नक्काशी और अलग-अलग कारीगीरी की हुई है। तमिलनाडु बंगाल के उपसागर के तट पर बसा हुआ एक खूबसूरत प्रदेश है। उसका इतिहास समृद्धि से ओतप्रोत है। इसका इतिहास २००० साल से भी पुराना है। अनेक राजवंशों ने यहां राज किया है जैसे चेर, चौल, पल्लव और पांड्या। इन सब राजाओं ने इस राज्य की सांस्कृतिक विरासत को मजबुत किया है।

तमिलनाडु के समुद्र तट पर स्थित कई तट पर्यटन के प्रमुख आकर्षण हैं जैसे कि चैन्नई, कांचीपुरम, महाबलीपुरम, रामेश्वर, कन्याकुमारी। वैसे तो पूरा राज्य ही समुद्र तट पर ही बसा हुआ है। तमिलनाडु राज्य में भी कई हिल स्टेशन हैं जो पर्यटकों को खींच लेते हैं।

तमिलनाडु राज्य में घूमने लायक और थकेहारे मन को ताजगी देने के लिए पहाड़ों में बसे हुए हिल स्टेशन्स हैं जो पर्यटकों को लुभाते हैं और अपनी ओर खींच लेते हैं। उनमें से एक है ऊटकमंड (ऊटी)। यह शहर कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा पर बसा हुआ है। यहां से नजदीक कोइम्बतूर हवाई अड्डा है जो पर्यटकों के लिए यहां आने का आसान मार्ग है। यह ऊटकमंड शहर समुद्र तल से लगभग ७४४० फीट ऊंचाई पर स्थित है। यह निलगीरी की पहाड़ियों मे बसा हुआ एक बहुत ही लोकप्रिय हिल स्टेशन है। यहां पर पर्यटकों के लिए देखने लायक है बॉटनीकल गार्डन, ऊटी झील, डोडाबेट्टा चोटी इस तरह से हरी भरी चोटीयां पर्यटकों को लुभाती है।

तमिलनाडु में घूमने लायक एक और हिल स्टेशन हैं विश्वप्रसिद्ध कोडाई कैनल। समुद्र तल से २१३३ मीटर ऊंचाई पर स्थित यह हिल स्टेशन अपनी सुंदरता और शांत वातावरण के कारण सब को अपनी ओर आकर्षित करता है। पाली हिल्स में बसा हुआ यह हिल स्टेशन तमिलनाडु राज्य का प्रमुख हिल स्टेशन माना जाता है। यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य विशाल चट्टानें, शांत झील, गुलाब से भरे बगीचे और यहां के हरेभरे दृश्य अपनी सुंदरता की मिसाल देते हैं।

यहां पर जॉगर्स पार्क, ब्रायंट पार्क, पाइन के पेड़ों का जंगल, सिल्वर कॅसकेड वॉटर फॉल ऐसे कई स्थान हैं जो अपनी ओर पर्यटकों को खींच लेते हैं। तमिलनाडु राज्य में स्थित श्री रामेश्वर यह एक बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक होने की वजह से मशहूर है। श्री रामेश्वर एक स्वयंभू स्थान है। इसकी प्रचीती हम भारत वासियों को सन २००४ में आई। जब २००४ मे बहुत बड़ी सुनामी दक्षिण भारत में आई थी तब कन्याकुमारी के किनारे बहुत बड़ा नुकसान हुआ लेकिन रामेश्वर के किनारे बसे हुए मंदिर में एक भी लहर आई नहीं। एक भी लहर इस मंदिर तक पहुंच नहीं पाई। यही है शिव शंभो की शक्ति और उस शक्ति की महिमा।

तमिलनाडु राज्य में घूमने के लिए और भी कई स्थान हैं जो हम जैसों को बुलाते हैं। दक्षिण दिशा में बसे हुए इस राज्य की खाद्य संस्कृति साऊथ इंडियन फुड तो पूरे विश्व में मशहूर है। किसी भी रेस्टॉरंट का मेनु कार्ड ऐसा नहीं होगा जिसमें साउथ इंडियन फुड का कॉलम नहीं है। शॉपिंग के लिए यहां पर कांचीपुरम सिल्क, मदुराई सिल्क, साऊथ सिल्क, टमत्तम सिल्क ऐसी कई साड़ियां और मटेरीयल है जो पर्यटकों को लुभाता है। आइये, चलें इन दो खूबसूरत मनभावन राज्यों के सफर पर।

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