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‘मानव पर्यावरण को प्रभावित करते हैं तथा उससे प्रभावित होते हैं. हमारी सांवेगिक प्रतिक्रियाओं पर भी पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है. प्राणी अपनी शारीरिक आवश्यकताओं को पूरा करने तथा अन्य विभिन्न उद्देश्यों से प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर रहता है. इस क्रम में वे पर्यावरण को कई तरीके से नुकसान भी पहुंचाते हैं, जिसका नतीजा होता है- प्रदूषण. यह प्रदूषण मनुष्य के भौतिक एवं मनोवैज्ञानिक जीवन को काफी गहरायी से प्रभावित करता है.

हाल ही में मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में हुए एक शोध में यह पाया गया कि उच्च स्तरीय प्रदूषण का संबंध लोगों के कम होते आनंद के स्तर से है. भारत जहां कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में विकास दर के साढ़े सात फीसदी रहने की उम्मीद जतायी जा रही है, वहां यह विचारणीय है कि क्या लोगों का संतुष्टि स्तर इस दर से बढ़ेगा या नहीं?

मनोवैज्ञानिकों की राय है कि भारत का आर्थिक विकास दर जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसकी तुलना में उनकी मानसिक विकास स्तर नहीं बढ़ पा रहा है. इसकी एक बड़ी वजह है- अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएं, रोटी-कपड़ा-भोजन और आवास के निरंतर बढ़ते मूल्य, वायु प्रदूषण आदि.

शहर के कल-कारखानों, जलते चिमनियों या भट्टियों, पेट्रोज-डीजल की गाड़ियों आदि से निकलनेवाला काला धुंआ लगातार वायु को प्रदूषित कर रहा है, जिसका नकारात्मक प्रभाव न केवल हमारे शारीरिक स्वास्थ, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ पर भी पड़ता है.

 

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पूर्व के शोधों में अब तक वायु प्रदूषण की वजह से व्यक्ति के स्वास्थ, संज्ञानात्मक निष्पादन, उसकी श्रम उत्पादकता तथा उसकी शैक्षिक उपलब्धि पर नकारात्मक प्रभाव होते पाया गया है, लेकिन अब मनोवैज्ञानिकों ने माना है कि वायु प्रदूषण व्यक्ति के सामाजिक जीवन और व्यवहार को भी काफी गहरायी से प्रभावित करता है. इसके चलते लोगों में चिड़चिड़ापन, अवसाद, गुस्सा आदि की बारंबारता बढ़ जाती है.

पिछले कुछ सालों में कई लोगों द्वारा वायु प्रदूषण से बचने के लिए हरित स्थानों में शिफ्ट होने, फेस मास्क, एयर प्यूरिफायर जैसे सुरक्षात्मक कवच आदि खरीदने या फिर पीक आवर में घर से बाहर निकलने को अवॉयड करने का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. ऐसे माहौल में कुछ महीने तक समय गुजारने के पश्चात जब उनकी खुशी के स्तर पर पूर्व की तुलना में आंका गया, तो वे पहले से ज्यादा खुश, स्वस्थ और व्यवस्थित पाये गये.

अत: अगर आप भी खुद को प्रसन्न और स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो आज से ही अपने आसपास के माहौल को साफ-स्वच्छ रखने की पहल शुरुआत कर दें. स्वस्थ रहने के लिए अपने वातावरण को साफ-सुथरा रखना तो वैसे भी जरूरी है, लेकिन अब चूंकि इससे आपकी खुशियां भी जुड़ी हैं, तो जाहिर सी बात है कि इस ओर आपको और भी गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.

 

 

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