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अगर आप भी मनोरंजन और नए संदेशों को देखने और सुनने के लिए उत्सुक हैं तो जुड़िए सोशल मीडिया से और कीजिए बस एक क्लिक….

कुछ दिन से व्हाट्सएप पर एक वीडियो बहुत वायरल है, जिसके ३डी इफेक्ट देखने के लिए आपको अपनी एक आंख बंद करनी होती है। दोनों आंखों से देखने पर तो यह सामान्य ही लगता है परंतु एक आंख बंद करके जैसे ही हम क्लिक करते हैं उसके फूल और पक्षी इतने सजीव लगते हैं मानो हम उन्हें छू सकते हैं।

इसी प्रकार व्हाट्सएप और फेसबुक पर ही एक लिंक भी शेयर की जा रही है जिसमें दुनिया का चित्र अर्थात ग्लोब दिखाई देता है। आप इस ग्लोब पर कहीं भी क्लिक कीजिए आपको उस देश का एफएम सुनाई देगा। इसका मतलब है आप चाहे दुनिया के किसी भी कोने में हों आपको आपकी पसंद के, आपकी भाषा के एफएम चैनल सुनाई देंगे, बस एक क्लिक करते ही।

क्या आप ४-५ दिनों के लिए कहीं बाहर जा रहे हैं? अपने पसंदीदा सीरियल के एपिसोड या क्रिकेट मैच मिस नहीं करना चाहते? तो कोई बात नहीं…….। चैनल की वेबसाइट पर क्लिक कीजिए और अपने पसंदीदा प्रोग्राम का मजा लीजिए।

गर्मी की छुट्टियां आते ही बच्चों का एक सवाल परिवार के सभी सदस्यों की नाक में दम किए रहता है, ‘अब मैं क्या करूं?’ छोटे-मोटे कुछ काम या बहाने बना कर इन्हें एकाध घंटे से ज्यादा टालना मुश्किल है। आपकी यह परेशानी भी एक क्लिक से हल हो सकती है। इंटरनेट पर विभिन्न ऐसे चैनल उपलब्ध हैं, जो बच्चों को कागज, रंग, ब्रश, गुब्बारे जैसी छोटी-छोटी तथा सहज रूप से उपलब्ध होेने वाली वस्तुओं से सुंदर तथा उपयोगी वस्तुएं बनाना सिखाते हैं। कुछ थोड़ी कठिन वस्तुओं को आप पहले स्वयं सीख कर भी बच्चों को सिखा सकते हैं। आपको केवल अपने बच्चों को सामान देना है और साइट पर एक क्लिक करना है।

क्लिक, क्लिक, क्लिक……..आपके कम्प्यूटर या स्मार्टफोन की एक क्लिक से आज आप कई सारे काम घर बैठे कर सकते हैं। वस्तुओं की खरीदारी, नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल का पता, बैंक या एटीएम की जानकारी और यहां तक कि रास्ते पर ट्रैफिक की जानकारी भी तुरंत मिल जाती है। इस क्लिक ने जहां लोगों की शारीरिक मेहनत को कम कर दिया है, वहीं उनके मानसिक तथा भावनात्मक जगत पर भी असर डाला है।

आज सोशल मीडिया पर की गई एक क्लिक आपको लाखों लोगों से रूबरू कराती है। किसी भी घटना पर आपके विचार, आपकी प्रतिक्रियाएं लोगों तक तुरंत पहुंच जाती हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, सामाजिक, राजनैतिक आदि विभिन्न विषयों पर सोशल मीडिया पर जिस त्वरित गति से चुटकुले, व्यंग्य, कार्टून, वीडियो आते हैं उन्हें देख कर ऐसा लगता है कि अब लोगों का ध्यान घटनाओं की ओर जाता ही इसलिए है कि उन पर प्रतिक्रियाएं दे सकें। खैर जो हो, यह बात सोलह आने सच है कि सोशल मीडिया लोगों के मन-मस्तिष्क पर असर डालने वाला प्रभावी कारक बन गया है।

रेडियो, टीवी, कैसेट, कम्प्यूटर, स्मार्ट फोन जैसे-जैसे तकनीक का विकास हुआ लोगों के मनोभावों पर प्रभाव डालने वाले कारक भी बदलते गए। क्रिकेट मैच की कॉमेंट्री सुनने के लिए रेडियो को कंधे पर उठाए लोगों को जब मैच देखने को मिलने लगा तो उनकी खुशी की सीमा नहीं रही। टीवी पर रामायण शुरू होते ही उस पर फूलमाला चढ़ाने के किस्से हम सभी जानते हैं। परंतु इसका सुपरिणाम यह हुआ कि दादी-नानी की कहानियों के पात्र अब सजीव रूप में दिखाई देने लगे और लोगों के भावविश्व पर इसका असर दिखने लगा था।

दृश्य तथा श्राव्य माध्यम लोगों के दिलों पर सीधा परिणाम करते हैं। इस सूत्र को सोशल मीडिया भलीभांति जानती है। अत: आजकल २० सेकेंड से लेकर २० मिनट तक के ऐसे प्रभावशाली वीडियो बनाए जा रहे हैं जो कम से कम समय में लोगों तक अपेक्षित संदेश पहुंचा सकें।

सोशल मीडिया पर एक पारिवारिक वीडियो वायरल है जिसमें एक पिता अपनी नौकरी पेशा बेटी के घर कुछ दिन रहने जाता है। ऑफिस से घर आने के बाद बेटी उन्हें चाय-नाश्ता देती है, घर ठीक करती है, कपड़े धोने के लिए मशीन शुरू करती है आदि….। उसे ये सारे काम करते हुए देख कर पिता को यह अहसास होता है कि न केवल उन्होंने बल्कि समाज ने जाने-अनजाने बेटियों के सामने ये गलत उदाहरण रखा है कि घर के काम केवल औरतों को ही करने चाहिए। वह मन ही मन इस बात के लिए बेटी से ‘सॉरी’ कहता है कि जब बचपन में वह अपने दोस्तों, सहेलियों के साथ घर-घर खेलता था तब लड़कियां घर के काम करती थीं और लड़के या तो टीवी देखते थे या अखबार पढ़ते थे, ठीक उसी तरह जैसा आज उसका पति कर रहा है, क्योंकि उसने भी बचपन में यही देखा और सीखा। पिता को अपनी भूल का एहसास होता है और घर जाते ही वह अपनी पत्नी का यह कह कर हाथ बंटाने लगता है कि ‘मैं भले ही किचन का किंग ना बन पाऊं, पर लॉन्ड्री का काम तो संभाल ही सकता हूं…।’

एक अन्य वीडियो में चाय की टपरी पर चाय बेचने वाली अत्यंत गरीब महिला के चाय के ग्लास आए दिन एक छोटे गरीब बच्चे से टूट जाते हैं। जब-जब ग्लास टूटता वह महिला उस बच्चे को भला बुरा कहती। परंतु वह बच्चा बुरा नहीं मानता। वह खुद भी काम करता है और पैसे जोड़ कर उस महिला को बिना बताए ६ नए ग्लास लाकर देता है। वीडियो का मकसद एक दूसरे की मदद का संदेश देता है लेकिन लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है वह बच्चा। उसके चेहरे की मासूमियत, ग्लास टूटने पर चेहरे पर आने वाले शरारती भाव, डांट खाते समय झुकी हुई आंखें और नए ग्लास देने की खुशी, ये सारे भाव उस दो मिनट के वीडियो में सिमट जाते हैं, और लोग बरबस ही उसे दोबारा देखने को लालायित हो उठते हैं।

दिल की बात, डॉट शॉट, स्कूपव्हूप वीडियो जैसे कई फेसबुक पेज हैं जिन पर विभिन्न विषयों पर आधारित छोटे-छोटे वीडियो चलाए जाते हैं। ये वीडियो अधिकतर किसी उत्पाद का विज्ञापन होते हैं परंतु उनसे मिलने वाले संदेश समाज को सोचने की एक नई दिशा देते हैं।

राजनैतिक घटनाओं पर आधारित कार्टून वीडियो से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है। लोकप्रिय राजनैतिक नेताओं के कार्टून बना कर किसी फिल्मी गीत पर उनकी थिरकन, देखने वालों के लिए हंसने का कोई मौका नहीं छोड़ती। ये कार्टून वीडियो खास कर तब अधिक लोकप्रिय हो जाते हैं जब चुनाव हो रहे हो या राष्ट्रीय स्तर पर कोई बड़ी घटना घटी हो। हाल ही में उत्तर प्रदेश के चुनाव हुए हैं। इनके दरम्यान मोदी, योगी, अखिलेश, राहुल गांधी और मायावती इनकार्टून वीडियो के निशाने पर थे। अखिलेश की ‘साइकिल’ टूटना, राहुल की ‘खाट’ को गांव वालों द्वारा राहुल समेत उठा ले जाना, मोदी द्वारा ‘योगी’, ‘मौर्य’ और ‘स्मृति ईरानी’ की उम्मीदवार के रूप में परीक्षा लेना और मायावती की हाथी की सवारी सब कुछ इतना मनोरंजक था कि दर्शक अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

ये सारे वीडियो लोगों को अपने फेसबुक या व्हाट्स एप अकाउंट पर क्लिक करते ही दिखने लगते हैं और जाने-अनजाने लोगों के दिलो-दिमाग पर अपना असर छोड़ जाते हैं। १५ अगस्त और २६ जनवरी के बाद रास्ते पर तिरंगे ना डालना, कचरा यहां-वहां ना डालना, घरेलू हिंसा के खिलाफ आवाज उठाना आदि जैसे अन्य सामाजिक विषयों पर समाज में हो रहे परिवर्तन का श्रेय कुछ हद तक इन वीडियो को जाता है।

अब आप भी इनसे अधिक दूर नहीं हैं। अगर आप भी मनोरंजन और नए संदेशों को देखने और सुनने के लिए उत्सुक हैं तो जुड़िए सोशल मीडिया से और कीजिए बस एक क्लिक….।

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