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केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया प्रधानमंत्री जन धन योजना और मुद्रा बैंक जैसी योजनाएं लाकर बैंकिंग इंडस्ट्री की प्रगति में सहायता की है।

सन २०२२ में देश की स्वतंत्रता के ७५ वर्ष पूरे हो जाएंगे। देश के प्रधानमंत्री ने कई मौको पर देश को विश्व गुरु बनाने की बात को प्रमुखता से रखा है और उनकी पूरी टीम इस दिशा में अथकनीय कार्य कर रही है। वे अपने मार्ग के प्रति निश्चिंत हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य इस लक्ष्य की प्रप्ति हैं।

उनका कहना है कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने की दिशा में देश में त्वरित परिवर्तन की शुरुआत होनी आवश्यक हैं। मेरी समझ से यह परिवर्तन (रुपांतरण) ३ चीजों का होना चाहिए – जनता, प्रक्रिया और गति; जो कि प्रगति की ओर या कहें कि भारत के ‘विकास‘ की ओर ले जाएगा। यदि हमें एक राष्ट्र के तौर पर विकास करना है तो उद्योग और अर्थव्यवस्था की तेज बढ़त परमावश्यक है।
संजय ढवलिकर एक उद्योगपति और ‘आर्चीज बिजनेस सोलुशंस प्रा.लि.‘ के संस्थापक हैं। इनकी कंपनी बीएफएसआई उद्योग और व्यवसाय प्रणाली समाधान में, खासकर ग्राहक सेवा प्रबंधन, लेखा परीक्षण और अनुपालन के क्षेत्र में कार्य करती है। यह संस्था देश को एक बौद्धिक अर्थव्यवस्था में रुपांतरित करने के लिए ‘बैंकिंग अनुभव एवं उत्कृष्टता केंद्र‘ स्थापित करने जा रही है।
इस केंद्र में विभिन्न प्रणालियों पर आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा एवं बीएफएसआई क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक प्रशिक्षार्थियों को ‘कोर समाधान एवं ग्राहक प्रबंधन‘ का व्यावहारिक व क्रियाशील प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां प्रशिक्षुओं को भविष्य की तकनीकों के लिए भी तैयार किया जाएगा ताकि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में कारगर और
उत्पादक साबित हो सकें।
यहां पूरी तरह से भविष्य की तकनीकों, जैसे कि डेटा विश्लेषिकी और आभासी बैंकिंग, इसके लिए मानव पूंजी तैयार करने, विक्रय कला जैसे सॉफ्ट स्किल्स, बीएफएसआई के उत्पादों के लिए ग्राहक जीवन चक्र प्रबंधन, क्रॉस बिक्री और महंगी बिक्री की तकनीक, ग्राहक संकलन योग्यता, ग्राहक अनुबंध और ग्राहक अवरोधन योग्यता का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
चूंकि अवरोधन बीएफएसआई उद्योग में सभी स्तरों पर योग्य मानव पूंजी उपलब्ध कराता है, इसलिए आंतरिक कर्मचारी के तौर पर या संविदा आधारित पेशेवर के तौर पर इस प्रयास का अन्य अनपेक्षित लाभ यह होगा कि इस जनबल के द्वारा काफी हद तक प्रथाओं और प्रक्रियाओं का मानकीकरण हो सकेगा।
पिछले कुछ समय की बेकार की चुनौतियों, वैश्वीकरण,मध्यम वर्ग की वृद्धि, बुनियादी ढाचे के विकास के वित्तपोषण के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था की ८ प्रतिशत की वृद्धि् दर रखते हुए शीघ्र ही वैश्विक अर्थ़़वस्था बनने की राह पर है, जिसने भारत के उद्योगो की मजबूती में भरपूर सहायता प्रदान की है।
देश में और वैश्विक स्तर पर जबरदस्त तरीके से सफल ‘मेक इन इंडिया‘ के साथ निर्माण और सेवा उद्योग में अभी और भविष्य में ; भविष्य के दौर को समझने और नवीन तकनीक का उपयोग करते हुए अर्थव्यवस्था की वृद्धि और बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली प्रशिक्षित जन शक्ति को बढ़ाने को लेकर चुनौतियां सामने आएंगी।
इस महती आवश्यकता को देखते हुए ‘कौशल विकास‘ योजना शुरु की गई जो कि देश के विकास की अगुआई करने वाली प्रशिक्षित जन शक्ति का निर्माण करने मे सहायक होगी।
‘मेक इन इंडिया ‘, ‘स्किल इंडिया‘ और ‘स्टार्ट अप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया ‘ जैसे उपक्रमों के द्वारा इतना तो तय है कि उद्यमी राष्ट्र के मूल्य, निर्माण और नौकरी के भरपूर अवसर उपलब्ध कराने में सक्षम होंगे। कर्मियों की यह फौज देश के अगली छलांग लगाने हेतु तैयार रहेगी।
वर्तमान सरकार जानती है कि यदि भारत को प्रगति के पथ पर ले जाना है तो जनता और (निर्माण) प्रक्रिया पर तीव्र गति से कार्य करना पडेगा।
भारत के पास बहुत बडी युवा जनसंख्या है। वर्तमान युवा पीढ़ी तकनीक प्रेमी है और बखूबी समझती है कि सही तरह की लाभकारी तकनीक और ढांचे के बल पर ही सफलता संभव है। उन्हें चुनौतियां और उन पर विजय प्राप्त करने के तरीके पता हैं तथा वे भविष्य की तकनीक डिजिटलीकरण निर्दिष्ट वैश्लेषिकी जैसे मार्गों के प्रयोग द्वारा अपने लक्ष्य की प्रप्ति भी कर सकते हैं।
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में काफी संभावनाएं हैं जो कि २०२० तक दुनिया का पांचवा सबसे बडा बैंकिंग उद्योग बन जाएगा। अत: ‘डिजिटल इंडिया‘ ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना‘ और ‘ मुद्रा बैंक‘ जैसी योजनाएं लाई गई और बैंकिंग इंडस्ट्री की प्रगति में सहायता की गई। इससे आरबीआई द्वारा नए बैंकों को लायसेंस देने में उदार नीति, ग्रामीण क्षेत्रों में बैकिंग क्षेत्र में सुधार और प्राइवेट सेक्टर में निवेश द्वारा वित्तीय ढांचागत विकास में सहायता की। बैंक और वित्तीय संस्थान वित्तीय समावेशन पर ध्यान केंद्रिंत कर रहे हैं। बैंक ग्राहय अनुभाग के वित्तीय समावेशन के कारण बैंक प्रमुख क्षेत्र के तौर पर उभर रहे हैं। कई बैकों ने ग्राहक हितैषी और नवीन दृष्टिकोण, कार्पोरेट क्रेडिट पर ध्यान देने, म्युचुअल फंड जैसी बिक्री सेवाओं, मोबाइल बैंकिग जैसी शुल्क आधारित आय के साधनों की वजह से आक्रामक एवं स्वस्थ विकास किया है।
वित्तीय सेवा अनुभाग में तकनीकी बदलाव काफी कारगर साबित हुआ। कानूनी स्वीकृति ने डिजिटल सुरक्षा के साथ महत्व प्राप्त कर लिया है । आनलाइन लेन-देन, इ-गवर्नेंस, इलेक्ट्रॉनिक फंड स्थानांतरण, आरबीआई द्वारा पुनःस्थापित डेबिट और क्रेडिट क्लीयरिंग की इलेक्ट्रॉनिक समाशोधन सेवा के साथ यह प्रमुखता हासिल कर लेगी। तमाम मूल्य उत्पादों की शुरुआत करते हुए वाणिज्यिक बैंक जन बैंकिंग से क्लास बैंकिंग की ओर मुड़ते हुए, एक सुपर मार्केट में तब्दील हो रहे हैं। नव तकनीक यथा, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, बीसी बैंकिंग, शाखाविहीन बैंकिंग, डिजिटल बैंकिंग, आभासी बैंकिंग और एटीएम कम कीमत पर ग्राहकों तक पहुंचने के प्रतिमान बन चुके हैं। इसका देश और बैंकों की तरक्की और विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
नई नीतियां लाने और कई अनावश्यक नीतियों में संशोधन के गहन प्रयास किए जा रहें हैं; जैसेकि श्रम कानून में संशोधन, बैंकिंग एक्ट के कई प्रावधान, दिवालियापन कोड, एन पी ए और मुख्यतः जी एस टी का क्रियान्वयन।
यद्यपि, ऊपर दिये गए कार्य लोगों और प्रक्रियाओं को बदलने की दिशा में कुछ मुख्य कदम हैं, इनकी निगरानी रखने के लिए गहन प्रयत्न किए जा रहे हैं। सभी टीमों को काफी जिम्मेदारियां दी गई हैं, साथ ही इन सारी चीजों की सफलता की भी जिम्मेदारी दी गई है। अधिवेशनों, प्रस्तुति विभाग द्वारा उपलब्ध कराए गए डेटा और तथ्यों के द्वारा इन पर निगरानी भी रखी जाती है।
सामान्यत: माननीय प्रधानमंत्री ‘मन की बात‘ के द्वारा हित धारकों को जोड़ने की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए इन सभी उपक्रमों पर विशेष ध्यान देते हैं। सहभागिता का वातावरण विकसित हुआ है जहां आम आदमी को समझ में आने वाली और त्वरित नीतियों, क्रिया कलापों कार्रवाइयों के विषय में जागरुकता एवं जानकारी मुहैया कराई जाती है।
इससे हितधारकों की मनोवृत्ति बदली है और मैं समझता हूं कि एक राष्ट्र के तौर पर माननीय प्रधानमंत्री आम जनमानस को सम्मान दिलाने और उसकी खोई हुई गरिमा वापस दिलाने में समर्थ हैं । उन्होंने इस समूची प्रणाली के महत्वपूर्ण भाग को महसूस किया। इससे वे विभिन्न स्तर के सरकारी और गैरसरकारी पदाधिकारियों की मनोवृत्ति को बदलने में सफल हो सकते हैं।
इसी तरह विनिर्माण के विकास में भी कई उपक्रम लाए गए हैं, जैसे कि सोलर क्षमता का उपयोग, विकास की गति को बढ़ाने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में तकनीक और डिजिटल पर्यावरण का उपयोग। इसमें कोई संदेह नहीं कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा लाए गए सभी उपक्रम भारत को उच्च शिखर तक ले जाएंगे। हर नागरिक को भारतीय होने पर गर्व महसूस होगा। निकट पूर्व में हुए तमाम चुनाव भारतीय गर्व और इस महान नेता में उनके विश्वास को ही बयां करते हैं। इन सारे उपक्रमों का लागू करने, सफलता एवं तीव्रता पर सीधे माननीय प्रधानमंत्री जी की नजर है। उन्हें पता है कि यदि सभी के सहयोग द्वारा नतीजे पाना है तो मन और शरीर के बीच पूर्ण संतुलन होना चाहिए इसलिए ‘योग‘ बहुत जरुरी है। कहा गया है कि ‘क्रांति हमेशा एक व्यक्ति से शुरु होती है।‘ मेरी समझ से हमारे पास वह एक (महान) व्यक्ति है जो कि विकास के रास्ते पर ले जाकर भारत को २०२२ तक ‘विश्वगुरु‘ बनाने की क्षमता रखता है।

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