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पाकिस्तान में एक 16 वर्षीय हिंदू युवती का अपहरण कर एवं उसका धर्मांतरण कर जबरदस्ती मुस्लिम युवक के साथ विवाह कराने की घटना 27 जनवरी को सामने आई है। यह सिंध प्रांत की घटना है जहां इस तरह की घटनायें आम हैं।

पाकिस्तान, अफगाणिस्तान एवं बांग्लादेश में अत्याचार सहन करने वाले हिन्दुओं ने सन् 2014 तक भारत में आश्रय लिया है। नागरिकता संबधी विधेयक जो हाल ही में संसद ने पास किया है, इन्ही नागरिकों के विषय में है। पाकिस्तान भारत से एवं बांगलादेश पाकिस्तान से धार्मिक आधार पर ही अलग हुए हैं। इन देशों में धार्मिक आधार पर 6 अल्पसंख्यक समुदायों पर अनन्वित अत्याचार किये जाते हैं। धार्मिक आधार पर जो देश हैं वहां हमेशा ही अल्पसंख्यकों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है एवं उनपर अत्याचार किये जाते हैं। जब यह अत्याचार इन देशों में असह्य हो जाता है तब वे भारत में आते हैं। इस परिस्थिति में मानवतावादी भूमिका अपनाकर उन्हे आश्रय देने का विचार इस विधेयक में है। हिंदू बांग्लादेश मे अनावश्यक नागरिक हैं इस आधार पर एवं “राष्ट्रीय देशभक्ति” के आधार पर हिन्दूओं पर अत्याचार, उनकी संपत्ति (चल एवं अचल) पर कब्जा, उनको वहां से भगाना यही संदेश देता है कि बंगलादेश में हिन्दूओं को कोई स्थान नही है। 1971 का इतिहास यही दिखता है कि पाकिस्तानी अत्याचारों के कारण भारत में भाग कर आये हिंदुओं की संपत्ति पर वहां के मुसलमानों ने कब्जा कर लिया। बाद में जब ये हिंदु वहां वापस गये और उन्होने अपनी संपत्ति वापस मांगी तो वे ही मुसलमानों के द्वेष का कारण बन गये। वर्तमान सरकार ने हिंदुओं की संपत्ति वापस करने हेतु कानून भी बनाया परंतु वह एक नाटक ही सिध्द हुआ। बंगलादेश के 40% हिंदू परिवार शत्रु-संपदा-कानून(Enemy Property Act) के कारण प्रभावित हुए। उसमें कम से कम 750000 गैर खेतिहर परिवार समाविष्ट थे। परिणाम स्वरूप हिंदू परिवारों द्वारा गंवाई गई कुल जमीन 16.4 लाख एकर के करीब है जो हिंदू समाज के मालकियत की कुल जमीन का 53% है। हिंदू, यद्यपि, बंगलादेश की जनसंख्या का 8% है फिर भी सत्ता में उनकी भागीदारी शून्य ही है।

मानवतावादी, बुद्धिवादी हिंदू-बौद्ध हत्याकांड के विषय में मौन क्यों?

सभी छोटे बड़े 11 दलों को बंगलादेश से निर्वासित हिंदुओं भारत में प्रवेश नही देना चाहिये ऐसा लगता है। लोकसभा चुनावों के पास आते आते सभी प्रादेशिक दल प्रादेशिक अस्मिता का ढ़ोल बजाने लग जायेंगे। अपने आपको प्रगतिशील, मानवतावादी एवं बुद्धिजीवी कहने वाले लोग पडोस मे होने वाले हिंदुओं एवं बौध्दों की हत्या पर चुप क्यों है? क्या गैरमुस्लिमों को मानवता नही है? इन लोगों को गैरमुस्लिमों के मानवीय हकों के उल्लंघन के विषय में जनजागरण करना आवश्यक है। बंगलादेश को यह अहसास कराना होगा कि यदि वहां अल्पसंख्यकों पर अत्याचार होते ही रहे तो इसका प्रभाव भारत के साथ उसके संबधों पर पडेगा। इसके लिये सरकारी स्तर पर बंगलादेश पर दबाव बनाना बहुत आवश्यक है।

शत्रु संपत्ति कानून 1965 लागू कर भारतीयों की संपत्ति जप्त की

सन् 1965 के युध्द के दौरान भारतीयों की संपत्ति शत्रु संपदा कानून के अंतर्गत पाकिस्तान ने पूर्व (अब बांग्लादेश) एवं पश्चिम पाकिस्तान दोनों जगह जप्त की जो बांग्लादेश बनने के बाद बांग्लादेश को हस्तांतरित हो गई। बंगला देश ने वह संपत्ति उसके मूल मालिक को वापस नही की। इसके उलट ऐसी संपत्ति की सूची में बढ़ोत्तरी ही की गई।

वर्ष 1985 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे तब असमय समझौता हुआ। घुसपैठियों की खोज, मतदाता सूची से उनके नाम निकालना एवं उन्हे वापस बंगलादेश भेजना समझौते के अनुसार वांछनीय था। परंतु तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस विषय में कुछ भी नही किया। घुसपैठियों को अपना वोट बैंक बनाने हेतु कांग्रेस काम कर रही है ऐसा आरोप लगाते हुए “आसू” एवं “अगप” ने विशाल आंदोलन किया एवं उसके माध्यम से वे दो बार 1986 से 1990 एवं 1996 से 2001 सत्ता पर बैठे परंतु उन्होने भी उनकी सरकार रहते हुए इस विषय में कुछ नही किया।

वर्तमान भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के माध्यम से घुसपैठियों की पहचान प्रारंभ की। सन् 1971 से भारत मे आये हुए हिंदुओं की संख्या अंदाजन 20लाख होगी वंही बंगलादेशी मुसलमानों की संख्या 54 से 5 करोड होगी। संसद में पारित वर्तमान कानून के कारण बांग्लादेश के शेष 1.5 करोड़ हिन्दू असम में आयेंगे और असमी भूमिपुत्र अल्पसंख्यक हो जायेंगे ऐसी शंका स्थानीय निवासिवों की है। परंतु यह धारणा गलत है क्यों कि उन्हे देश के अन्य भाग में बसाया जायेगा।

बांग्लादेश में पाकिस्तान परस्तों को निष्प्रभ करना आवश्यक

बांग्लादेश के वर्तमान घटनाक्रम के कारण भारत को अधिक सजग रहना आवश्यक है। वहां गत कुछ वर्षों मे पैदा हो रहे असंतोष का रूपांतर धर्मांध एवं अन्य लोगों के संर्घे में हुआ है। इस संघर्ष की आंच हम तक पहुंचेगी ही। इसलिये वहां की लोकतांत्रिक शक्तियों को हमारे समर्थन की आवश्यकता है। बांगलादेश मुक्ति के समय अत्याचारियों को सजा मिलना आवश्यक है। कुछ वर्ष पूर्व भारत में विघातक घटनाओं की जिम्मेदार ‘हूजी का जन्म बंगलादेश का ही है।

शंख हसीना के सत्तासीन होने के कारण परिस्थिति हमारे अनुकूल है। बांग्लादेश से संबध सुधारना अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत को जैसे बांगलादेश के सत्ताधारियों से अच्छे संबध रखना आवश्यक है वैसे ही वहां के विरोधी दलों से भी अच्छे संबध बनाने होंगे अन्यथा वहां शेब एक करोड हिंदु भारत में आ जायेंगे।

देशप्रेमी नागरिकों का कर्तव्य

किसी भी देश में घुसपैठ यह गंभीर अपराध है। अफगाणिस्तान, पाकिस्तान,बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की रक्षा नही होती। 2019 में होने वाले चुनावों में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों के विषय में बोलना ही होगा। इसके लिये विधेयक का विरोध करने वाले राजनितिक दलों पर दबाव डालकर उन्हे अल्पसंख्यकों (बंगलादेश, पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान के) के हितों की रक्षा करने पर मजबूर करना होगा।

 

This Post Has One Comment

  1. अच्छा लगा हिन्दू हितों की रच्छा होनी ही चाहिए वो विश्व मे कहि भी रहे

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