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 कपिल देव का ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड

तारीख आठ फरवरी… साल 1994… समय सुबह 10 बजकर 34 मिनट… क्रिकेट के इतिहास का यह पल स्वर्णाक्षरों में लिखा गया था.. कपिल देव इसी दिन गेंदबाजी के एवरेस्ट पर काबिज हुए थे.. मैदान था गुजरात के अहमदाबाद शहर का मोटेरा स्टेडियम.. कपिल देव ने इस मैदान पर 432वां टेस्ट विकेट हासिल कर रिचर्ड हैडली के 431 विकेट के तत्कालीन विश्व रिकार्ड को तोड़ दिया था.

कपिल देव बरसों से टीम इंडिया की गेंदबाजी का बोझ अपने कंधों पर उठाए हुए थे… लेकिन दौर बदल चुका था…युवा मनोज प्रभाकर अपना जौहर दिखा रहे थे… टॉस जीतकर श्रीलंका ने पहले बल्लेबाजी का फैसला लिया था… कपिल को नयी गेंद तो सौंपी गई, लेकिन पहला ओवर प्रभाकर को दिया गया. प्रभाकर और कपिल की जोड़ी विकेट हासिल करने में नाकाम रही, ऐसे में गेंदबाजी का जिम्मा अनिल कुंबले को सौंपा गया. कुंबले ने कलात्मक बल्लेबाजी करने वाले रोशन महानामा को एलबीडब्ल्यू आउट कर भारत को पहली सफलता दिलाई थी.

पहले ड्रिंक्सx ब्रेक और खेल शुरू होने के 64 मिनट के बाद वो क्षण आया, जिसका कपिल देव सहित पूरा भारत लंबे समय से इंतजार कर रहा था. कपिल देव की एक गेंद को समझने में श्रीलंका के हसन तिलकरत्ने गच्चा खा बैठे और संजय मांजरेकर को कैच थमा बैठे.  यह टेस्ट क्रिकेट में कपिल देव का 432वां विकेट था. इसके साथ ही वह टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए थे.
कपिल की इस सफलता का जश्न मनाने के इंतजाम मोटेरा स्टेडियम पर पहले ही किए जा चुके थे. जैसे ही कपिल ने 432वां विकेट हासिल किया तो इतनें ही गुब्बारे स्टेडियम पर छोड़े गए थे. जमीन पर कपिल का जलवा था, तो आसमां में गुब्बारे उनके रिकॉर्ड की इबारत बयां कर रहे थे.

स्टेडियम में मौजूद सारे दर्शक उनके सम्मान में खड़े हो गए. इसके बाद ड्रेसिंग रूम में भी जमकर जश्न मनाया गया. टीम के लिए यह दोहरे जश्न का मौका था. कपिल की सफलता के साथ कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन का जन्मदिन भी था. जश्न का यह दौर काफी लंबा चला था.

भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह मैदान कई मायनों में खास रहा है. इसी मैदान पर सुनील गावस्कर ने पाकिस्तान के खिलाफ 1986-87 में टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन का जादुई आंकड़ा छुआ था. इसके सात साल बाद कपिल देव करियर का 432वां विकेट चटकाकर रिचर्ड हेडली को पछाड़ते हुए टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक विकेट लेने वाले बॉलर बने थे.

कपिल देव के बारे में कुछ खास बातें:

कपिल का जन्म चंडीगढ़ में 6 जनवरी 1959 को हुआ था.
-उन्होंने डीएवी स्कूल से शिक्षा प्राप्त की.
-कपिल ने वर्ष 1975 में हरियाणा की टीम से पंजाब के खिलाफ क्रिकेट करियर की शुरूआत की और पहले ही मैच में 6 विकेट लेकर सबको हैरान कर दिया था.
-सीजन खत्म होने तक कपिल ने तीन मैच में 12 विकेट चटकाए.
-कपिल ने फैजलाबाद में पाकिस्तान के खिलाफ 16 अक्टूबर 1978 को टेस्ट में पदार्पण किया.
-इस मैच में कपिल ने अपने टेस्ट करियर का पहला विकेट सादिक मोहम्मद के रूप में लिया.
-कपिल ने सादिक मोहम्मद को अपनी ट्रेडमार्क आउट स्विंग गेंद पर आउट किया था.
-वर्ष 1982-83 सीजन में  श्रीलंका के खिलाफ सीरीज के लिए कपिल देव को पहली बार कप्तान बनाया गया था.
-भारतीय क्रिकेट टीम को सन् 1983 में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट शृंखला में विश्व विजेता बनाने का श्रेय कपिल देव को ही जाता है.
-विश्व कप में उनके द्वारा बनाए गए 175 रनों की ऐतिहासिक पारी क्रिकेट जगत में हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में अंकित हो गई.
-क्रिकेट से संन्यास के बाद कपिल देव को वर्ष 1999 में टीम इंडिया का नेशनल कोच नियुक्त किया गया था.
-मनोज प्रभाकर की ओर से लगाए गए मैच फिक्सिंग के आरोप के चलते कपिल ने कोच पद से इस्तीफा दे दिया था. बाद में यह आरोप गलत साबित हुए थे.

कपिल देव को वर्ष:
1979-80 में अर्जुन अवॉर्ड,
1982 में पद्मश्री,
1983 में विस्डन क्रिकेटर ऑफ द ईयर,
1991 में पद्म भूषण,
2002 में विस्डन इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी,
2010 में आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम और
2013 में सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया.

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