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मिले सुर मेरा तुम्हारा, शास्त्रीय गायन का महारथी

भीमसेन जोशी का जन्म 4 फरवरी 1922 को कर्नाटक में हुआ। बहुत छोटी उम्र से ही ये संगीत के बहुत बड़े प्रेमी बन गये थे और 11 वर्ष की उम्र में ही गुरु की खोज में अपना घर छोड़ दिया। हिन्दूस्तानी शास्त्रीय संगीत के एक रुप किराना धारा के ये उत्तराधिकारी है। ये ‘ख्याल’ संगीत के लिये प्रसिद्ध है। हिन्दूस्तानी गायकों में ये एक किंवदंती है। हमलोग इन्हें जीवित किंवदंती कह सकते है और जिन्होंने पूरी दुनिया में सच्चे प्रशंसक कमाये है। ये ख्याल की व्याख्या दक्ष तरीके से करते थे और हिन्दी और मराठी में बहुत से भजन गाये।

इनकी सबसे यादगार प्रस्तुति जो आज भी हर एक के द्वारा याद किया जाता है ‘मिले लुर मेरा तुम्हारा’, था। इनकी स्वर्णिम आवाज ने लोगों को एक साथ आने के लिये अपील किया।

1972 में इन्हें भी पदम् श्री, 1985 में पदम् भूषण और 1976 में संगीत नाटक अकादमी अवार्ड नवाजा गया। हिन्दूस्तानी शास्त्रीय संगीत को समृद्ध करने के लिये 2009 में इन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

 

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