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भारत ने विद्युत क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। राष्ट्र गर्वित है कि पहली बार विद्युत और कोयले की कमी खत्म हुई है और ये पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। नागरिकों को चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराना और वह भी उचित दामों पर यह केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय का लक्ष्य है। यह नए भारत का निर्माण का सोपान है।

 

सरकार प्रत्येक क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नए भारत की दूरदर्शी दृष्टि की दिशा में कदम बढ़ा रही है। नए भारत को मूर्त रुप देने में एक प्रमुख उपलब्धि है- उज्ज्वल भारत योजना। आधुनिक समाज के कार्यकलापों के लिए बिजली अनिवार्य है। यह सामाजिक उत्थान का भी एक साधन है। यह उत्थान आर्थिक प्रगति सुनिश्चित करने से होता है। इसलिए, इस क्षेत्र का आमूलचूल परिवर्तन करने को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

उज्ज्वल भारत को हासिल करने के लिए मंत्रालय ने सभी के लिए ‘चौबीसों घंटे, सस्ती एवं पर्यावरण-हितैषी बिजली’ का मिशन चलाया है। यह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की ‘अंत्योदय’ (समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति को ध्यान में रखना) की सोच पर आधारित है। इस सोच के बिना किसी भी प्रकार की सामाजिक – आर्थिक प्रगति बेमानी है। इस मिशन में पारदर्शिता एवं सूचना के माध्यम से जन-सशक्तिकरण किए जाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

भारत ने विद्युत क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। राष्ट्र गर्वित है कि पहली बार विद्युत और कोयले की कमी खत्म हुई है और ये पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। जहां पहले बिजली के प्लांट को कोयले की भारी कमी हुआ करती थी, अब सभी को पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध है। जहां पहले भारत पड़ोसी देशों से बिजली खरीदता था, वहां अब बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार को विद्युत का निर्यात करते हुए भारत ने मित्र पड़ोसी देशों की सहायता करने की शुरुआत की है। इसके अतिरिक्त, २०१६-१७ में नवीकरणीय ऊर्जा में पारंपरिक विद्युत की तुलना में ज्यादा क्षमता जुड़ी होने से उस पर भी ध्यान दिया गया है। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था।

सरकार द्वारा प्रत्येक गांव में बिजली पहुंचाने के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (डी.डी.यू.जी.जे.वाई) चलाई गई है। २०१५ के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से संकल्प लिया था कि शेष बचे लगभग १८,५०० गांवों में से प्रत्येक गांव में अगले १,००० दिनों के अंदर -अंदर बिजली पहुंचा दी जाएगी। माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा संकल्प लेने के बाद, लगभग ६०% समय के अंदर ही विद्युत मंत्रालय ने तीन चौथाई लक्ष्य (१३,३०७ गांव) पूरा कर लिया है। इससे एक कदम बढ़कर देश के गरीब से गरीब नागरिक के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए प्रत्येक घर को बिजली देने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। इस सूचना को डैश बोर्ड पर रियल-टाइम में अपडेट किया जाता है। इससे इस कार्यक्रम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

मिशन को पूरा करने में एक बड़ी बाधा विद्युत वितरण क्षेत्र में थी। इसे उदय और अन्य स्कीमों के द्वारा पूरी तरह से एक नया रूप दे दिया गया है। इसके फलस्वरूप होने वाली बचत से उपभोक्ताओं के लिए बिजली सस्ती हो रही है। सस्ते ब्याज दरों पर उदय बॉंड जारी करने पर राज्यों को लगभग १२००० करोड़ रुपये की बचत हो रही है जिसका लाभ उपभोक्ताओं को मिल रहा है। विद्युत की खरीद के वेबसाइट दीप (डिस्कवरी ऑफ एफिशिएंट इलेक्ट्रिसिटी प्राइस) से सुनिश्चित होता है कि डिस्कॉम्स को सर्वोत्तम मूल्य मिले। राज्यों द्वारा खरीदी गई ऊर्जा के मूल्य में तीन वर्ष पहले की तुलना में आज एक तिहाई या अधिक की गिरावट है। इस सूचना को विद्युत प्रवाह डैश बोर्ड पर रियल टाइम में देखा जा सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए एक प्रमुख सुधार – ऊर्जा मित्र पोर्टल, जो उपभोक्ताओं को सशक्त बनाता है- बिजली की कटौती की सूचना के लिए समय रहते एस.एम.एस. भेजता है। लोग एक हेल्पलाइन नंबर के द्वारा इस पर अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं।

उजाला के अंतर्गत एल. ई. डी. बल्ब का बड़े पैमाने पर वितरण करके बिजली की बचत को सुनिश्चित किया जा रहा है। अभी तक २३ करोड़ से भी ज्यादा एल. ई. डी. बल्ब वितरित किए जा चुके हैं। इसके फलस्वरूप बिजली बिल में उपभोक्ताओं को प्रतिवर्ष लगभग १२००० करोड़ रुपये की बचत हो रही है। पारदर्शिता और दक्ष खरीद को ध्यान में रखते हुए एल. ई. डी. की खरीद का मूल्य फरवरी २०१४ में रु.३१० से घटाकर रु. ४१ लाया गया है। कोयला क्षेत्र पहले की कमी से पर्याप्त मात्रा की ओर बढ़ा है। इसमें अब अति उत्तम कोयले से हम विद्युत मंत्रालय की लागत में कमी लाना सुनिश्चित कर रहे हैं। कई कार्यक्रमों के द्वारा अब विद्युत उत्पादन में तीन वर्ष पहले की तुलना में ८% कम कोयला खर्च हो रहा है।

अपने निवासियों को पर्यावरण-हितैषी विद्युत उपलब्ध करवाने और पृथ्वी को बचाने के लिए भारत नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक विश्वस्तरीय नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आई.एस.ए) में नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाकर जगद्गुरु का दर्जा हासिल किया है। निर्धारित प्रशुल्क की बजाय प्रतिस्पर्धात्मक बोली का चलन प्रारंभ करके सरकार ने इस वर्ष सौर और पवन, दोनों ही क्षेत्रों में कम मूल्य रखने का कीर्तिमान स्थापित करना सुनिश्चित किया है। हमारे किसान सस्ती और विश्वसनीय बिजली प्राप्त कर सकें, इसके लिए १.१ लाख सौर पम्प प्रदान किए जा चुके हैं। यह पम्प १९९१ से २०१४ के बीच वितरित पम्पों की तुलना में ९ गुणा ज्यादा हैं।

सरकार का प्रत्येक कार्य गरीबों के प्रति समर्पित है। यदि प्रधानमंत्री के शब्दों में कहा जाए तो इस कार्य से ‘‘गरीबी से मुक्त-समृद्धि से युक्त, भेदभाव से मुक्त-समानता से युक्त, अन्याय से मुक्त-न्याय से युक्त, भ्रष्टाचार से मुक्त-पारदर्शिता से युक्त, बेरोजगारी से मुक्त-रोजगार से युक्त, महिला उत्पीड़न से मुक्त-स्त्री सम्मान से युक्त, निराशा से मुक्त- आशा से युक्त नए भारत का निर्माण होगा।’’

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