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इस यांत्रिक युग में यदि हमने कुछ पाया है तो कुछ खोया भी है | रिश्ते- नातों की परिभाषाएं बदली हैं साथ ही बदल गया है प्रेम का स्वरूप | सोशल मीडिया पर प्रेम प्रदर्शित करने वाले कई संदेश आते हैं किंतु प्रेम का उदात्त स्वरूप खो गया है | फेसबुक पर परिचय , व्हाट्सएप पर बातें ,इन्सट्राग्राम पर तस्वीरें और ट्विटर पर झगड़ें इन सब के बीच देखा जाए तो सच्चा प्यार गायब ही मिलेगा | ऑनलाइन चैटिंग को ही प्रेम का विशाल रूप मान लिया गया है | यही हाल प्रेम संदेशों का है एक-दूसरे के जन्मदिवस पर या और किसी विशेष दिवस पर प्यार प्रदर्शित करने वाले ईमोजी और गुलाब ,गुलदस्ते के चित्र इत्यादि भेज कर ही संतुष्ट हो लिया जाता है |

कभी सोचा है आपने कि इन रूखी-सूखी शुभकामनाओं में से प्रेम और आत्मीयता गायब होती जा रही है | यथार्थ और चित्र में अंतर होता है | भावनाएं और संवेदनाएं चित्रात्मक नहीं होती ये आकारहीन होती हैं जिन्हें समीप रहकर अनुभव किया जा सकता है | वे भी दिन होते थे जब तीज-त्यौहारों में प्रत्यक्ष भेंट लेकर मिठाई आदि देकर शुभकामनायें दी जाती थी अब जब बर्फी ,लड्डू ,पेड़े के चित्र नहीं मिलते तो केक ,पेस्ट्री ,डोनट इत्यादि की तस्वीरें व्हाट्सएप पर भेज कर कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है | इस तरह की शुभकामनाओं के चलते त्यौहारों के रंग फीके पड़ गए हैं | शुभकामना कार्ड अब बिरले ही भेजते हैं | मोबाइल की स्लेंग भाषा में संवाद हो जाते हैं | शुभकामनाओं का सही आनंद स्वयं मिलकर या अपने द्वारा बनाए गए सुंदर कार्ड या मिठाई भेज कर ही होता है |

समय की कमी और फोन पर ही बातें कर लेने की आदत के कारण पत्र संस्कृति समाप्त हो गई है | पोस्ट ऑफिस में सिर्फ शासकीय और व्यवसायिक पत्र ही पहुँचते हैं ,घर-परिवार ,नाते-रिश्तेदार को लिखे जाने वाले पत्र न के बराबर हैं | एक जमाना था जब पत्र सहेज कर रखे जाते थे अब तो “पत्र” शब्द भी हम भूलने लगे हैं | कभी समय निकालकर अपने प्रियजनों को पत्र लिखिए सचमुच आपको बहुत आनंद मिलेगा और इससे कहीं अधिक आनंद उसे मिलेगा जिसे पत्र प्राप्त होगा |

 

यांत्रिक युग में हमें कई तरह की सुविधाएँ प्राप्त हैं पर संबंधों को सुविधा न बनाए, आप जितना प्रेम से इन्हें सीचेंगे ये उतनी तेजी से पनपेंगे | याद रखें प्रेम का कोई पर्याय नहीं उसे आप कितने भी महँगे यंत्र के द्वारा प्राप्त नहीं कर सकते |

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