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जबसे मामी का फोन आया बड़ी दुविधा में थी रिया, उसकी ममेरी बहिन पूनम की सगाई इसी महीने की पच्चीस तारीख को थी और ऑफिस में ऑडिट का काम चल रहा था, वह दुविधा में थी कैसे छुट्टी ले, बॉस खामख्वाह नाराज होंगे और यहाँ यदि सगाई में नहीं गई तो मामा-मामी और पूनम का गुस्सा झेलना पड़ेगा | फिर भी किसी एक को तो मना करना ही होगा | फिर उसने काफी सोच-समझ कर मामी को फोन लगाया और अपनी परेशानी बताई कि वह ऑफिस का आवश्यक काम छोड़कर नहीं आ सकती पर शादी में चार-पाँच दिन पहले ही आ जाएगी और शादी के कामों में उनका हाथ बटायेगी | मामा- मामी ने उसकी परेशानी समझी और खुशी-खुशी स्वीकार भी किया | अकसर नौकरीपेशा औरतों को इस तरह की दुविधाओं का सामना करना पड़ता है | जहाँ नौकरी आवश्यक है वहाँ आपसी रिश्ते-नाते भी निभाना उतना ही जरुरी है | इन परिस्थितियों से कैसे निपटा जा सकता है ?

लें वाइज डिसीजन –

रिया की तरह आपको भी वाइज डिसीजन लेने होंगे, जब दो काम एक साथ पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन में आ रहे हो, तो बारीकी से सोचना होगा कि इस वक़्त कौन सा काम ज्यादा आवश्यक है, फिर जो काम ज्यादा जरुरी है उसे ही करना होगा |

दें अपना सौ प्रतिशत –

आप जो भी काम कर रही हो घर का या ऑफिस का, अपना सौ प्रतिशत देना आवश्यक है | यदि परिवार और रिश्तेदारों के साथ हैं तो अपना पूरा समय उन्हें दें और यदि ऑफिस में हैं तो पूरी एकाग्रता से वहाँ काम करें, जो भी काम हो लगन से हो तभी आपके साथ जो लोग हैं वे खुश हो सकेंगे |

संवाद बनाए रखें –

आपसी रिश्तों में संवाद आवश्यक है, यदि मिलने के लिए समय नहीं है तो कभी-कभार फोन ही कर लें, इस तरह के संवाद रिश्तों में तरोताजगी बनाए रखते हैं |

जीवन में करियर जरुरी है उसके साथ आता है पैसा, इज्जत, संतोष पर पारिवारिक सम्बन्ध भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं | वे जीवन को खुशनुमा बनाते हैं, उनमें रंग भरते हैं, हमें जीने के लिए उर्जा ये  आत्मीय सम्बन्ध ही देते हैं | घर में नारी ही वह होममेकर होती है जो सभी को रिश्तों की परिभाषा समझाती है और प्रीत के धागे से जोड़े रखती है, वह जहाँ तक हो यही चाहती है सब जुड़े रहें | प्रोफेशनल और पर्सनल जिन्दगी दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण है यदि दोनों में से किसी एक की भी उपेक्षा की तो परिणाम भुगतने होंगे |

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