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हमारा भारत देश अपने आप में एक अद्वितीय देश है। विश्व के किसी भी देश को, अर्थात् उस देश के समाज के मन में अपनी राष्ट्रीयता के बारे में कोई संदेह नहीं होता है। वैसे तो हमारा देश अपनेे कण-कण में हिंदू संस्कृति को समाहित किए है। हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने जो आस्थाएं इस समाज के डीएनए में डाली हैं, उन्हीं के आधार पर वह चल तो रहा है। पर दूसरी तरफ कुछ लोगों के मन में अपनी राष्ट्रीयता को लेकर संदेह है। उन्हें लगता है कि, क्या हम हिंदू हैं? या फिर विधर्मी हैं!

हिंदू समाज के मन का यह संदेह मिटाने और उसे अपनी हिंदू राष्ट्रीयता का सम्मानजनक परिचय दिलाने, स्मरण कराने और जगाने के लिए ही तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निर्माण हुआ। यह किसी भी देश के नागरिकों को उनकी राष्ट्रीयता के प्रति संभ्रम को मिटाने का कार्य करने वाला पूरे विश्व का एकमेव अद्वितीय संगठन है।

डॉ.अनिरुद्ध जोशी मुंबई के विख्यात् चिकित्सक अर्थात व्यावसायिक डॉक्टर हैं। परंतु विगत कई वर्षों से आम जनता उन्हें एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक और संत के तौर पर माननीय पुण्य अनिरुद्ध बापू के नाम से जानती है। उनका आध्यात्मिक मंडल ‘प्रत्यक्ष’ नामक एक गैरराजनीतिक दैनिक चलाकर समाज प्रबोधन करता है।

पूजनीय अनिरुद्ध बापूजी ने पहले रा.स्व.संघ के द्वितीय सरसंघचालक पूजनीय श्रीगुरुजी गोलवलकर के विचार पढ़े। फिर उत्सुकतावश श्रीगुरुजी की जीवनी तथा संघ संस्थापक परम पूजनीय डॉ.हेडगेवार की जीवनी पढ़ी। तब उन्हें ध्यान आया कि एक तरफ जहां रा.स्व.संघ राष्ट्रनिर्माण का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य तन-मन-धन से कर रहा है तो दूसरी तरफ वह विरोधियों की अति तीव्र आलोचना का भाजन भी बन रहा है।

तब उन्होंने अपने एक मित्र तथा रा.स्व.संघ के दबंग कार्यकर्ता श्री रमेशभाई मेहता से अपने समाचार पत्र ‘दैनिक प्रत्यक्ष’ के लिए रा.स्व.संघ का परिचय देने वाली एक लेखमाला प्रारंभ करवाई। शुरू से ही यह लेखमाला पाठकों के बीच बहुत लोकप्रिय रही है। प्रस्तुत ग्रंथ ‘विश्व का अद्वितीय संगठन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ू उसी लेखमाला का पुस्तक स्वरूप है। विषय का प्रस्तुतीकरण अत्यंत सहज, सरल परंतु आकर्षक है। जो पहले से ही संघ के कार्यकर्ता हैं, वे भी इस पुस्तक को पढ़ें और अपने मित्रों को दें। जो संघ को नहीं जानते या जिनके मन में संघ के बारे में संभ्रम है, वे तो अवश्य पढ़ें तथा दूसरों को भी दें ताकि लोग संघ और उसकी राष्ट्रवादी विचारधारा को अच्छी तरह समझ सकें।

रा.स्व.संघ के निर्माण की पृष्ठभूमि, गत ९० वर्षों से चल रहा उसका कार्य, यह सारा विषय अधिकाधिक पाठकों तक पहुंचाने हेतु इस पुस्तक का प्रकाशन मराठी, हिंदी, गुजराती और अंगे्रजी भाषाओं में एकसाथ हुआ है।
अत्यंत आकर्षक मुखपृष्ठ, सुंदर मुद्रण के साथ लोटस पब्लिकेशन की सुंदर प्रस्तुति है यह।

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