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  पुलवामा हमले का प्रतिशोध लिया जाएगा, यह घोषणा भारत की ओर से करने के बाद पाकिस्तान भी जवाब देने की गीदड़भभकी दे रहा था। भारतीय वायुसेना द्वारा की गई एअर स्ट्राइक से झटका लगना आश्चर्य की बात नही है। पाकिस्तान के रडार व विमानभेदी प्रणाली को भेद कर भारत के लड़ाकू विमानो ने लगातार 20 मिनट तक करीब 1 हजार किलो के बमो की बरसात कर दी। इस हमले में पीओके में स्थित आतंकवादी ट्रेनिंग केम्पों सहित आंतकवादियों का समुल सफाया हो गया। यह कार्रवाई अत्यंत खतरनाक एवं साहसिक होने के चलते इसे सफल बनाने के लिए भारतीय सेना एवं राजनैतिक नेतृत्व अभिनंदन की पात्र है। पाकिस्तान के बालाकोट, चाकोटी व मुझफ्फराबाद स्थित जैश-ए-मोहम्मद के लॉन्चिंग पैड पर भारतीय वायु सेना के फाययर प्लेन मिराज ने भारी बमबारी की थी। जिसमें 200 से 300 आतंकवादीयों के मारे जाने की खबर है। इसमें जैश के अनेक कंमाडरो भी शामिल थे।

     पुलवामा हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर हमला कर उसे सबक सीखाने का फैसला कर लिया था। उसके प्रतिशोध स्वरूप पुलवामा हमले से संबंधित 3 आंतकवादियों को यमलोक भेज दिया गया और इसके तुरंत बाद फिर से 3 आतंकवादियों को परलोक भेजने में भारतीय सेना को सफलता मिली। बावजुद इसके पाकिस्तान को सबक सीखने हेतू यह कार्रवाई निश्चित रूप से पर्याप्त नही थी। दूसरी ओर देश भर से यह मांग उठ रही थी कि पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जाए। भारत सरकार पर कड़ी कार्रवाई करने के लिए दबाव बढ़ने लगा।

उरी हमले के बाद की गई सर्जिकल स्ट्राईक के चलते पाकिस्तान यह जानता था कि अब भारत आंतकियों के ट्रेनिंग केम्पो पर हमला करेगा। इसलिए उसने सरहद से 20-25 किमी अंदर स्थित ट्रेनिंग केम्पो को सर्जिकल स्ट्राईक से बचाने हेतु 50-60 किमी अंदर स्थापित कर दिया था। इसके मद्देनजर भारत ने एक बड़ा सामरिक निर्णय लिया और पीओके में घुसकर आक्रमण करने के लिए वायु सेना का प्रयोग किया।

     ज्ञान हो कि कारगिल युध्द में पाकिस्तान ने विमानभेदी प्रणाली की सहायता से भारत के 2 भिग विमान को धरासाई कर दिया था। यदि इस कार्रवाई की थोड़ी सी भी भनक पाकिस्तान को लगती या कार्रवाई में अधिक समय लगा होता तो पाकिस्तान पलटवार करने की स्थिति में आ जाता और हमारे फायटर विमानों को नष्ट करने के लिए प्रयास जरूर करता। इसलिए सर्जिकल स्ट्राईक 2 की सफलता में सरकार व वायु सेना के गुप्त कार्रवाई की मुख्य भुमिका थी।

भारत की रक्षात्कम दृष्टि से उक्त कार्रवाई बेहद आवश्यक थी और उसे सफलतापूर्वक पूर्ण भी किया गया। फिर भी वायु सेना के एक सर्जिकल स्ट्राईक से आतंकवादी केम्प खत्म नही होंगे। क्योंकि पाकिस्तान आंतकवादियो को तैयार करनेवाला एक बड़ा कारखाना है। आज भी पीओके में 40-50 ट्रेनिंग केम्प है। जिसमें से हर वर्ष 2000 से 3000 आंतकवादी तैयार करने की पाकिस्तान की क्षमता है। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई हमें दिर्घकालिक रूप से लड़नी पड़ेगी। हालांकि भारतीय आक्रमण से यह निश्चित रूप से स्पष्ट हो गया है कि अब पाकिस्तान का भ्रम टूट गया है।

     पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार है इसलिए हम उस पर आक्रमण नही कर सकते एैसा पाकिस्तान और हमारे तथाकथित विशेषज्ञों की राय थी। किंतु भारत के सर्जिकल स्ट्राईक से पाकिस्तान को जबरदस्त धक्का लगा है। परमाणु हमले की धमकी एवं ब्लेकमेलिंग करते हुए आतंकवादी हमला करने वाले पाकिस्तान को सर्जिकल स्ट्राईक से सही संदेश मिल चुका है। भारत आगे से सहनशील भूमिका में रहकर संयम नही बरतेगा। हमारे 10 मारोगे तो तुम्हारे 100 मारेंगे यही भारत की नीति होगी। यही उक्त कार्रवाई का अर्थ निकलता है। 

इसके लिए राजनेताओं की इच्छाशक्ति की भी सराहना करनी चाहिए।ऐसे समय में राजनैतिक पार्टियों और नागरिकों की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।हम सभी को मिलकर सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए।
आतंकवादी हमलों का बदला लेने के लिए अब तक हम थल सेना का प्रयोग कर रहे थे।पहली बार भारत ने वायु सेना का प्रयोग किया है।आगामी समय में जरूरत पड़ने पर भारत जग्वार, सुखोई आदि अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों के विध्वंसक शस्त्र सामग्री का उपयोग कर सकता है।अभी हमने पीओके में कार्रवाई की है किंतु आगे पाकिस्तान के अंदर स्थित टारगेट पर भी वायुसेना हमला कर सकती है।इसे ध्यान में रखे।ऐसे किसी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान भी हवाई हमला करेगा,यह डर कुछ लोग जताते है।पर भारत पर हवाई हमला करने की पाकिस्तान की क्षमता नही है।यदि भारत पर हवाई हमला हुआ तो पाकिस्तान के लड़ाकू विमान फिर से पाकिस्तान नही जा पाएंगे।यही पत्थर की लकीर है।

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