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क्या आपको 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘मुंगेरीलाल के हसीन सपने’ सीरियल याद है, जिसमें एक व्यक्ति मुंगेरीलाल गाहे-बगाहे दिन हो या रात दिवास्वप्न देखा करता था, जबकि उसके हकीकत की दुनिया उससे बिल्कुल अलग थी.

दिवास्वप्न देखने को कभी-कभी बुरा समझा जाता है क्योंकि कुछ लोग इसको समय की बर्बादी समझते हैं. उनके अनुसार दिन में सपने देखने का काम नकारे लोगों का काम होता है, जो बगैर मेहनत किये सबकुछ पा लेना चाहते हैं, ऐसा नहीं है. दिवास्वप्न देखना नये विचारों को लाने का सबसे बढ़िया तरीका है.

हाल ही में जॉर्जिया इंस्टीट्यूट  ऑफ टेक्नोलॉजी में किये गये एक अध्ययन में यह बात साबित हो गयी है कि दिवास्वप्न व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य और उसकी उत्पादकता को प्रभावित करते हैं. शोधकर्ताओं के अनुसार, जब हम अपने मस्तिष्क को विचरण का अवसर देते हैं, तब वह उसकी सृजनशीलता बढ़ जाती है. अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए दिवास्वप्न देखने से आपको उनकी प्राप्ति के लिए प्रेरणा मिलती है. इसी तरह कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में भी सृजनात्मक विचारशीलता से संबंधित एक परीक्षण में दिवास्वप्न देखने वाले, दिवास्वप्न नहीं देखने वालों से 41% अधिक सृजनात्मक पाये गये. दिवास्वप्न व्यक्ति की रचनात्मकता को दर्शाते हैं. जो व्यक्ति जितना अधिक रचनात्मक प्रवृति का होता है, उसके दिवास्वप्नों में उतनी ही विविधता देखने को मिलती है. प्रसिद्ध मनोविश्लेषक सिग्मन फॉयड ने कहा है कि स्वप्न हमारी अंतर्चेतना से प्रभावित होते हैं, अर्थात पूरे दिन में हम जो कुछ भी देखते, सोचते या करते हैं अथवा जिन लोगों या परिस्थितियों से रूबरू होते हैं, हमारे स्वप्नों पर इन सबका प्रभाव पड़ता है.

दूसरी ओर, यह जानना भी दिलचस्प है कि जब आप अपने मस्तिष्क को वर्तमान से हटा कर उन कल्पनाओं की ओर ले जाते हैं, जो कि शायद ही कभी सच नहीं होंगी, तब दिवास्वप्न वास्तव में आपके लिए नकारात्मक साबित होता है. यह आपकी प्रसन्नता के स्तर को कम कर सकता है. अध्ययनों से यह संकेत भी मिलता है कि वर्तमान पर ध्यान केन्द्रित करने से व्यक्ति को अधिक प्रसन्नता मिलती है, क्योंकि हमारा वर्तमान हमारे यथार्थ से जुड़ा होता है.

दिवास्वप्न दरअसल रात के स्वप्नों की तरह ही होते हैं, जिसमें व्यक्ति एक काल्पनिक दुनिया में विचरता है. रात के स्वप्नों की तरह ही दिवास्वप्न भी सबसे अच्छे तब आते हैं जब हमारे आसपास अपेक्षाकृत शांत वातावरण हो जिसमें व्यक्ति का ध्यान न भटके.

दिवास्वप्न अनेक प्रकार के होते हैं, लेकिन उन सभी का व्यक्ति के मस्तिष्क और मनोभावों पर सकारात्मक प्रभाव ही पड़े- यह जरूरी नहीं है. यदि आप अपने मस्तिष्क को नकारात्मक विचारों से भरे रहेंगे (जैसे किसी से बदला लेने या किसी को धोखा देने का विचार), तो  जाहिर-सी बात है कि इससे आपका संज्ञान और आपकी अंतर्चेतना भी प्रभावित होगी, जिसका असर आपके दिवास्वप्न पर भी देखने को मिलेगा.

अत: अगली बार जब आपके पास कुछ खाली समय हो, तब वीडियो गेम खेलने या ऑनलाइन समाचार पढ़ने के स्थान पर, दिवास्वप्न देखिए, आप पायेंगे कि इससे आपके वर्तमान का स्तर कम हो गया है और आप खुद को तनावरहित, सकारात्मक और प्रेरित महसूस करेंगे.

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