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जीवन में आगे बढ़ते रहने की चाह हर किसी के मन में होती है। हर व्यक्ति अपनी वर्तमान स्तिथि से ऊपर उठना चाहता है। लेकिन ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जो अपनी इस चाहत को पूरा कर पाते हैं।

             तो फिर ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या अलग है उनमें ऐसा जो बाक़ियों में नहीं? तो इसका केवल एक ही उत्तर है- जीवन में एक सफल व्यक्ति बनने के लिए, कुछ कर दिखाने की चाहत होना सबसे आवश्यक है। बड़ा ही आम शब्द है सफलता लेकिन इसकी प्राप्ति विशेष लोगों को ही होती है। शायद यही कारण है कि बड़ी साधारण सी पात्रता मानदंड होने के बाद भी इसे हासिल करने के लिए आपमें कुछ विशेष होना बहुत ही आवश्यक हो जाता है।

सफलता का अर्थ केवल यही नही कि आप सभी मटेरिअलिस्टिक अर्थात भौतिक संसाधनों से सुसज्जित जीवन का निर्माण कर पाए हैं, कितना धन, कितनी प्रसिद्धि प्राप्त कर पाए हैं।  बहुत बार ये भी होता है कि हम ‘उपलब्धि’ को ‘सफलता’ का पर्यायवाची समझ बैठते हैं और इसीलिए कई बार हम सर्वाधिक उप्लाब्धियाँ हासिल करने वाले व्यक्ति को सबसे सफ़ल मानने लगते हैं। सफ़लता की परिभाषा बड़ी विस्तृत और गहरी है। स्वयं अपने लिए चुने हुए लक्ष्य की प्राप्ति सफलता है। लेकिन दूसरे की सफलता में आपका छोटा सा योगदान उससे भी बड़ी सफलता है।

             उदाहरण स्वरूप- एक स्त्री जो केवल एक गृहणी है, का भी अपनी संतान की सफल जीवन रचना में उतना ही योगदान होता है, जितना कि उस बच्चे के नौकरीपेशा पिता का होता है। एक शिक्षक का उदाहरण सफ़लता का एक और सश्क्त उदाहरण है। वह स्वयं तो अपने लक्ष्य को प्राप्त करता ही है साथ ही अपने शिष्यों का मार्गदर्शन कर उन्हें सफ़लता की राह बताता है। फलतः जितनी बार उसके शिष्य सफल होते हैं उतनी बार वह भी सफल होता है।

ऐसे में ही सफ़लता की सम्पूर्ण परिभाषा सार्थक होती है। इसलिए, जीवन में सफल होने के लिए सबसे आवश्यक है स्वयं को समझना, अपने व्यक्तित्व को निखारना, स्वयं पर विश्वास रखना, मुश्किलों से डटकर निपटना, स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना, अपनी उप्लाब्धियों का आंकलन करना, अपने लिए चुने हुए लक्ष्य और उस तक पहुँचने के लिए चुने हुए मार्ग का आंकलन करना और फिर आगे बढ़ते रहने की इस क्रिया को गतिशील रखना। गतिशीलता को बनाये रखने के लिए हर सुबह उठकर, एक कार्य योजना या कहें एक्शन प्लान बनाएं और अपने इस एक्शन प्लान के लिए एक समय सीमा  भी तय करें। एक नई ऊर्जा, एक नए उत्साह के साथ अपने दिन की शुरुआत करें। यदि ये छोटी-छोटी बातें रोज़मर्रा के जीवन में शामिल हो जाएं तो किसी के लिए भी एक बड़ा और सफ़ल व्यक्ति बनना बहुत मुश्किल नहीं होगा। निश्चित ही सफ़लता जहां भी होगी आपके जीवन में आ घुलेगी।

            सफलता प्राप्ति की कठिन राह पर चलना भी किसी पहाड़ी पगडंडी पर चलने के समान ही है। यदि ऐसा सोच कर हम चलेंगे तो रास्ते की सारी रुकावटें, टेढ़े-मेढ़े  घुमावदार मोड़, और ऊंचे-ऊंचे पर्वत भी किसी खूबसूरत चित्र अथार्त पेंटिंग  जैसे प्रतीत होंगे और सारी मुश्किलें हमें थोड़ा मेहनत तो करवाएंगी मगर मंज़िल पाने से रोक नहीं पायेंगी।

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