हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

सोशल मीडिया एक महत्वपूर्ण उपकरण है। अनुमान है कि लगभग 60-70% आबादी इस मीडिया तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया के माध्यम से सकारात्मक खबर आप तक पहुंच सकती है। यहां तक ​​कि शत्रु राष्ट्र एक-दूसरे के बारे में बुरी खबरें बताने और दूसरों को गुमराह करने के लिए उनका इस्तेमाल करते हैं। हर दिन एक नया शोध होता है। सोशल मीडिया पर पोस्ट के लिए कोई वित्तीय बोझ नहीं होने के कारण, हर आम व्यक्ति अपनी खुद की टीवी, समाचार पत्र या कोई अन्य विचारधारा चलाने में सक्षम हो गया है। हालाँकि, जब इसका उपयोग समाज में कुप्रथाओं को फैलाने या गलत विचारों को फैलाने के लिए किया जाता है, तो नागरिक  व सरकार की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। पिछले कुछ महीनों से, सोशल मीडिया, टीवी और अखबारों के माध्यम से आरोप लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों में से 99 प्रतिशत कभी साबित नहीं होंगे। फिर ऐसे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्या होगी? जैसे-जैसे तकनीक आम आदमी के हाथों में आसान होती जा रही है, देश विश्वासघाती विचारों का विरोध करने के लिए अपनी ताकत बढ़ा रहा है।
कुछ राष्ट्रों ने चुनावों से पहले डोनाल्ड ट्रम्प के  पक्ष  में  प्रचार  किया और  इन  प्रचारो  से  डोनाल्ड ट्रम्प ने इस अभियान को जीत लिया। ऐसी खबर है कि रूसी मीडिया ने डोनाल्ड ट्रम्प के पक्ष में डोनाल्ड ट्रम्प के साथ प्रचार किया है, जिससे सोशल मीडिया पर उनकी  प्रतिद्वंदी   डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन के खिलाफ भारी शरारत हुई है। उन समाचारों में से 99 प्रतिशत झूठे थे, उससे हम सोशल मीडिया की शक्ति को पहचान सकते हैं।

जिस पक्ष में चाहिए निर्णय उस पक्ष के विशेषज्ञ बुलाओ
शरारत में एक महत्वपूर्ण तत्व कोई आरोप लगाना है, इन आरोपों को सोशल मीडिया के माध्यम से सभी ओर फैलाया जाता है। उसके लिए कई दलों ने एक तकनीशियन या सलाहकार को काम पर रखा है जो सोशल मीडिया का उपयोग करना जानता है। उनका काम उस बयान में गलतियों का पता लगाना है जो दूसरी पार्टी करेगी और उनके खिलाफ अभियान शुरू करेगी। यही नहीं, मीडिया में इस तरह की खबरें फैलाई जाती है, तब कुछ टीवी चैनल इस मुद्दे पर चर्चा कर पाएंगे। चर्चा के लिए दबाव डालते हुए, निर्णय के पक्ष में पत्रकारों या विशेषज्ञों को बुलाया जाता है ।
दर्शक सोचते होंगे कि चार विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर घोटाला हुआ, तो निश्चित रूप से एक घोटाला होगा। वर्तमान पेपर में, अपने पक्ष में विशेषज्ञों से लेख लिखवाये जाते है । इसके बाद घोटाला कैसे हुआ ? इस पर बहस करने हेतु विशेषज्ञों को ख़रीदा जाता है ,ऐसा आरोप लगाए जाते रहे है। आरोप है कि कुछ टीवी चैनलों, अखबारों और पत्रिकाओं को पैसे से खरीदा जा रहा है।
अगले पांच महीनों में, विभिन्न प्रकार के मीडिया में झूठी खबरें फैलाने और आरोप लगाने का प्रयास किया जाएगा। यह लड़ाई हर दिन किसी न किसी के खिलाफ एक नया अभियान शुरू करेगी। उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस द्वारा हवा दी जाएगी। सोशल मीडिया का मुख्यालय अमेरिका या यूरोप में है। ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सऐप की मदद से आप अपने खिलाफ होने वाली किसी भी खबर को रोक सकते हैं और उस तरह की खबरें शुरू कर सकते हैं जिनसे आपको अपनी सुविधाजनक खबर मिल सके। एक नेता को 10 लाख अनुयायी दिखाए गए हैं, लेकिन उसके सच्चे अनुयायियों की संख्या कम होगी। इस तरह दुष्प्रचार करनेवालों का अभियान बड़े स्तर पर पहुँच गया है।

गोबल्स प्रोपेगैंडा

दूसरे महायुद्ध में सायकोलॉजिकल वॉर फेयर की लड़ाई हर स्तर पर लड़ी गई थी।जर्मनी के तानाशाह हिटलर के झूठी खबरों को फैलानेवाला प्रमुख रूप से गोबेल्स नामक एक व्यक्ति था।उसने ही हिटलर के पक्ष में समाचार संसार भर में प्रचारित किए। इसे परसेप्शन मैनेजमेंट कहा जाता है। अखबार पर लेख लिखने के लिए कई विशेषज्ञ (??) काम कर रहे हैं। इसमें बड़ी मात्रा में आर्थिक निवेश किया जा रहा है। इसलिए यह सब रोकना एक बड़ी चुनौती है।

दुष्प्रचार को कैसे रोके ?

जिस तरह कुछ राजनैतिक पार्टिया मतदाताओं को रिझाने हेतु मनोवैज्ञानिक तरीको का इस्तेमाल करती है ।उसी तरह कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और सेना के कार्यो में रोड़ा डालने के लिए बड़े स्तर पर सायकोलॉजिकल वॉर फेयर की लड़ाई लड़ी जा रही है।माओवादी (नक्शलवादी) क्षेत्रों और पूर्वोत्तर  (ईशान्य )भारत में भी मनोवैज्ञानिक युद्ध लड़ा जा रहा है।

ऐसे समय में हमारा नागरिक कर्तव्य क्या है ? सर्वप्रथम सोशल मीडिया में दुष्प्रचार करने वाले ग्रुप में शामिल न हो,किसी भी सूचनाओं को भेजने के पूर्व विचार करे,गुमराह और हिंसा फ़ैलाने वाले मेसेज को न फैलाये,उसे नजरअंदाज करे।यदि संदिग्ध लगे तो इसका लिंक पुलिस को भेजकर सूचित करे।जिससे पुलिस उस पर नजर रख सके।आनेवाले समय में सुरक्षा एजेंसिया सोशल मीडिया पर विशेष नजर रखने वाली है।जो कोई भी हिंसा फ़ैलाने का प्रयास करता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी। हम इस तरह के दुष्प्रचार के शिकार नहीं हो सकते।

कहा जाता है कि भारत में अराजकता फैलाना हो तो उसके लिए नक्शलवादी ,माओवादी ,आतंकवादियों की जरुरत नहीं है.सामान्य सन्देश इसके लिए पर्याप्त है.जब इंटरनेट का प्रसार विश्वभर में फैला तब इसके शिल्पकारों ने पहले ही आशंका जताई थी कि  भविष्य में इन प्रौद्योगिकियों के प्रसार और गति साइबर क्राइम और साइबर युद्ध  को जन्म देनेवाली हो सकती है। इसलिए सभी देशों और समुदायों को इस संबंध में सतर्क रहना चाहिए।

भारत को क्या करना चाहिए ?

नेपोलियन ने 100 साल पहले कहा था कि बुराइयों को फैलाने वाले अखबार 10,000 दुश्मन सैनिकों की तुलना में अधिक मजबूत हैं। जब नेपोलियन ने यह बयान दिया, तो कोई टीवी, अखबार और सोशल मीडिया नहीं थे। अब इन सभी ने दुष्प्रचार के अभियान को एक बड़ा आयाम दिया है।

युद्ध होने पर स्वयं की रक्षा करने में देश समर्थ है किन्तु देशांतर्गत होनेवाले दुष्प्रचार का मुकाबला कैसे किया जाये ? यह आज का यक्ष प्रश्न हमारे सामने उपस्थित है।

भारत को बदनाम और देश में हिंसक गतिविधियों द्वारा अराजकता फ़ैलाने के उद्देश्य से पाकिस्तान ने चीन की सहायता से ऑपरेशन स्मीयर की शुरुआत की है।अभीतक इसपर २१५ करोड़ डॉलर्स खर्च किया गया है।आगामी २०१९ चुनाव के पूर्व हजारो करोड़ डॉलर्स  ऑपरेशन स्मीयर पर खर्च होगा।

सरकार को अपनी ख़ुफ़िया एजेंसिया,पुलिस एवं अन्य संस्थाओ का प्रयोग कर इसकी  जाँच करनी चाहिए कि पाकिस्तान द्वारा कौन-कौन सी संस्थाओ को आर्थिक फंडिंग की गई है।इस पर तत्काल प्रतिबन्ध लगाना देशहित में जरुरी है।इसके अलावा अनेक व्यक्तियों व संस्थाओ को फंडिंग की सम्भावना है,इन सभी की जाँच कर कड़ी सजा देनी चाहिए।

भारत सरकार को सोशल मीडिया फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप ऐप की जांच करनी चाहिए। ऐसे संदेश ब्लॉक करना चाहिए जो हिंसा को बढ़ा सकती है। गलत तरीके से फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाई गई है ? खुद को सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म से परिचित कराना बहुत जरूरी है, ताकि झूठी खबरें फैलाना आसान न हो। व्हाट्सएप ने नियमन करना शुरू कर दिया है लेकिन उसको  सही ढंग से अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।

चीन जैसे देशों में हिंसा को बढ़ावा देने वाले, नफरत फैलाने वाले या एक-दूसरे के खिलाफ लिखने वाले सोशल मीडिया टूल्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।  अब समय आ गया है कि सोशल मीडिया पर फर्जी लेख द्वारा दुष्प्रचार करने वाले को कहने का कि ऐसे दुष्प्रचार करने से भारतीयों का दिल नहीं जित सकते।भारतीय मतदाता समझदार है और किसको मतदान करना है इसकी उन्हें पहचान है।मनोवैज्ञानिक रूप से झूठी खबरों का प्रसार करने पर अंकुश लगाना बेहद जरुरी है, ताकि सोशल मीडिया का दुरूपयोग न हो सके।

 

This Post Has 4 Comments

  1. बहोत अच्छी तरह से मार्गदर्शन किया हैं

  2. Sir yours opiniance absuletly right..main point is very important is use midia for country impovement midia use by every cityzan for serve the nation and diffence. Because the realy defence serve the nstion
    Sir sent message is very important for cityzan. Congrets.

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu
%d bloggers like this: