कुरु प्रदेश से मुगल भी नहीं टकरा सके

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आजादी के पूर्व और बाद का हरियाणा का इतिहास युद्ध, शौर्य और बलिदान से भरा हुआ है। आजादी के पूर्व के काल पर गौर करें तो सतलुज के इस पार यही भारत का प्रवेश द्वार था और इस कुरु प्रदेश ने हर बाह्य आक्रमणकारियों से लोहा लिया। इस तरह भारत की रक्षा में इस क्षेत्र का अभूतपूर्व एवं ऐतिहासिक योगदान रहा है।

अनूठी ‘प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना’

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‘प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना’ गरीब तबके की महिलाओं के लिए अनूठी एवं ऐतिहासिक है। इस योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों की महिलाओं को रसोई गैस के कनेक्शन दिए जाएंगे। इससे रसोई की मशक्कत और श्रम की बचत होगी। चूल्हे के धुएं से होने वाले प्रदूषण एवं बीमारियों से उनकी रक्षा होगी। एलपीजी की वितरण व्यवस्था कायम की जाएगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार का सृजन भी होगा।

‘पहलवान पैठणी’ का तो कोई सानी नहीं

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पैठणी अर्थात साड़ियों की महारानी और महाराष्ट्र के नासिक जिले का येवला शहर उत्तम और बेहतरीन पैठणी मिलने वाला शहर। येवला महाराष्ट्र के चार जिलों नासिक, औरंगाबाद, धुलिया तथा अहमदनगर से जुड़ा हुआ है। येवला शहर में पिछले 200 सालों से पहलवान परिवार पैठणी साड़ी का व्यवसाय कर रहा है। उनके इस पारम्परिक व्यवसाय के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारे प्रतिनिधि प्रशांत मानकुमरे ने रमाकांत विट्ठल पहलवान तथा उनके सुपुत्र मनीष रमाकांत पहलवान से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ प्रमुख अंश।

शिपिंग उद्योग के ‘अच्छे दिन’

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प्रधान मंत्री मोदीजी का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने नितीन गडकरी जैसे कार्यक्षम नेता को शिपिंग मंत्रालय का कार्य सौंपा है। मेरी सोच से नितीन गडकरी जी ने बड़ा परिवर्तन इस विभाग में लाया है। शिपिंग इंडस्ट्रीज का जो चक्का बड़े दिनों से जाम था, उसमें ग्रीस डाल कर उसे घूमने लायक करने का महत्वपूर्ण काम नितीन गडकरी जी ने किया है। लगता है शिपिंग में ‘अच्छे दिन’ की शुरुआत हो रही है। शिपिंग में आने वाले बदलावों पर वी.आर मेरीटाईम सर्विसेस प्रा. लि. के श्री कॅप्टन संजय पराशर से हुई बातचीत के महत्वपूर्ण अंश-

मंगल ग्रह की ओर उड़ान भरने वाला उद्यमी- मिहिर घोटीकर

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“इसरो ने जो यान मंगल ग्रह पर भेजा है; उसमें हमारे उत्पादनों का उपयोग हुआ है। रॉकेट लांचिंग स्टेशन पर दो प्रकार के सिस्टम होते हैं। पीएसएलवी और जीएसएलवी। इन दोनों में एकॉस्टिक सेपरेशन सिस्टम लगता है। ...जब यान अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरता है तब बहुत तेज आवाज होती है। इस आवाज के कारण उपग्रह के इक्वीपमेंट्स को नुकसान हो सकता है। वह नुकसान न हो इसके लिए हमारी तकनीक मदद करती है।”

भारतीय औद्योगिक अर्थव्यवस्था

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लघु उद्योग भारती भारत के लघु उद्योगों का एकमात्र राष्ट्रीय संगठन है, जिसके भारत के लगभग सभी जिलों में सदस्य हैं। आज आवश्यकता है कि सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्षेत्र के सभी उद्यमी एक संगठित समूह के रूप में कार्य करें और भारतीय दर्शन के आधार पर, विश्व में विकास की अवधारणा को फलीभूत करें।

आकाश से ऊंचा आदमी

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“मेरा विवाह निश्चित हो गया, यह मालूम होते ही उन्होंने (श्री सुरेश जी हावरे) कहा कि विवाह करते समय पंचशील का पालन करना, तथागत द्वारा कह गए मंत्र जीवन की सभी समस्याओं पर मार्ग दिखाएंगे। ...संघ कार्य में अपना जीवन लगा देने वाले सभी मामलों में ऊंचा स्थान रखने वाले व्यक्ति ने मुझे पंचशील का सम्मान दिखाया, मेरे श्रद्धाकेद्र का सम्मान किया।”

भारत की औद्योगिक क्षमताओं का दर्शन

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पिछले माह फरवरी में मुंबई में आयोजित ‘मेक इन इंडिया’ सप्ताह यह एक साधारण प्रदर्शनी से कुछ ज्यादा थी। भारत की अर्थव्यवस्था पर दूरगामी सकारात्मक परिणाम करने वाला यह महाआयोजन रहा। भारत को अगले विनिर्माण स्थान के रूप में विश्व के समक्ष जो कुछ प्रस्तुत करना था, वह सब कुछ इस प्रदर्शनी में था।

सबके चहेते नेता पी.ए.संगमा

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लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्वोत्तर के नेता पी.ए.संगमा अब नहीं रहे, लेकिन मेघालय और गारो वनवासी समाज को उन्होंने जो विरासत दी वह हमेशा याद रखी जाएगी। उनका स्वभाव बेहद मिलनसार था और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मुहर लगाने के कारण सारा देश उन्हें एक राष्ट्रीय नेता के रूप में स्वीकार करता था।

हिंदी फिल्मो कि उद्योगप्रियता

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क्या आपको कोई ऐसी हिंदी फिल्म याद है जिसमें चारों ओर उद्योगपति किरदार दिखाई देते हों? हृिएकेश मुखर्जी की नमक हराम याद है? उसमें एक कारखाने का मालिक (ओम शिवपुरी) बीमार पडने कारण उसका बेटा विकी(अमिताभ बच्चन) कुछ दिन कारखाने का कामकाज संभालने का निश्चय करता है।

लाल और नीली कटोरी

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“कन्हैया जैसे नेता धूमकेतु की तरह होते हैं, जो कुछ समय तक आकाश में अपनी चमक बिखेर कर लुप्त हो जाते हैं। इसलिए लाल और नीले के मिलन के सपने देखना छोड़ कर उसे अपनी पढ़ाई और राजनीतिक भविष्य की चिंता करनी चाहिए।”

उद्योग का दार्शनिक पक्ष

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“उद्योगिनं पुरुषसिंह मुपैति लक्ष्मी”- व्यक्ति की संकल्प शक्ति, उसका श्रम करने का सामर्थ्य, उसकी क्षमता और दक्षता ही उसके भाग्य को संवारती है एवं ऐश्वर्य प्रदान करती है और यही उद्योग का मूल भाव है। उद्योग के मूल में श्रम है, पुरूषार्थ है और वस्तुओं को बदलने का सामर्थ्य है।

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