तनाव में तारे

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बच्चे को यह बतलाएं कि जीवन के विशाल कैनवस पर, स्कूली परीक्षाएं केवल एक रंग है जो तस्वीर को अकेले पूरा नहीं कर सकता। तस्वीर को सुन्दर बनाने के लिए उसमें विभिन्न रंगों का होना ज़रूरी है और उससे भी ज़रूरी है उन रंगों का तालमेल। इस तरह चमकते तारे को तनाव से बचाए।

हिंदी विवेक की दशक पूर्ति

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जब सूचना क्रांति ने मासिक पत्रिकाओं को परदे के पीछे ढकेल दिया हो तब ‘हिंदी विवेक’ जैसी वैचारिक पत्रिका के अविरत प्रकाशन के दस वर्ष पूर्ण होना अपने आप में कमाल की घटना है। इस संदर्भ में प्रस्तुत है कुछ अनुभव-आधारित निरीक्षण-

दशावतार: मिथकों को वैज्ञानिक आधार देता उपन्यास

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सृष्टि की उत्पत्ति जानने के लिए ही बिग-बैंग अर्थात महामशीन का प्रयोग किया गया था। तत्पश्चात निष्कर्ष में कहा गया कि इसकी उत्पत्ति का कारक ‘गॉड पार्टिकल‘ अर्थात ‘ईश्वरीय-कण‘ हैं। इन कणों को ही गीता में अल्पांश कहा गया है।

अपशब्दों की राजनीति

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भारत में ऐसा लोकसभा चुनाव इससे पहले कभी नहीं हुआ जब पार्टियों के बीच बहस, आरोप-प्रत्यारोप का स्तर इतना नीचे गिरा हो। इसमें जिस तरह अशालीन शब्दों, मुहावरों, शब्दयुग्मों और यहां तक कि अपशब्दों का मुख्य शिकार देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हो रहे हैं इसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। चुनाव में सरकार पर हमले, प्रधानमंत्री की आलोचना, आरोपों में तीखापन संसदीय लोकतंत्र की कतई अस्वाभाविक स्थिति नहीं है। इनसे ही चुनाव का वातावरण निर्मित होता है जिनके आधार पर आम मतदाता अपना मन बनाता है।

मनोहर पर्रीकर कुछ अलग ही बिंदास अंदाज

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जिस राजनीति में धन और पद का अहंकार नेता जी की पहली पहचान बन गई है, वहां पर्रीकर एक गजब के अपवाद थे जिनकी सादगी और अपनेपन ने राजनीति के साधक रूप का दर्शन कराया।

संघ द्वेष से पुष्पवर्षा तक बदलता मुस्लिम मानस

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भारतीय मुस्लिम मुल्ला-मौलवियों के शिकंजे से त्रस्त हो चुके हैं और देश की मुख्य धारा में आना चाहते हैं, आने की कोशिश भी कर रहे हैं। संघ के प्रति उनके नजरिये में अब बहुत बदलाव आ गया है। संघ से उनकी दूरी घटती जा रही है। ऐसे एवं रामजन्मभूमि, पाकिस्तान, मदरसे की शिक्षा आदि ज्वलंत प्रश्नों पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संयोजक इंद्रेश जी से हुई विशेष भेंटवार्ता के महत्वपूर्ण अंशः-

संस्कृति – सभ्यता की विरासत भारतीय नववर्ष शोभायात्रा

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मुंबई के निकट डोंबिवली से आबासाहेब पटवारी द्वारा आरंभ ‘भारतीय नव वर्ष यात्रा’, पूरे भारत वर्ष में, हर शहर, हर गांव में आयोजित की जानी चाहिए। जाति, धर्म, भाषा, भेदभाव से ऊपर उठकर वर्तमान और भविष्य के साथ साथ आधुनिकता से परंपरा और अतीत को जोड़ने वाली यह यात्रा नए भारत का निर्माण करेगी।

महागठबंधन का सपना कांग्रेस मुक्त भारत

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एनसीपी जैसी एकाध क्षेत्रीय पार्टी के अलावा कांग्रेस को कोई साथ नहीं रखना चाहता। विपक्ष के महागठबंधन से यह बात साफ हो गई है कि क्षेत्रीय दल खुद ही कांग्रेस मुक्त भारत चाहते हैं।

आम चुनाव किस के ताबूत की आखरी कील

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माना जाता है कि चुनाव में यदि सत्ता विरोधी लहर पैदा होती है तो इससे विपक्ष को फायदा होता है। लेकिन, नोटा विपक्ष की इस उम्मीद को ढहाने का काम भी करता है।

विदेश नीति: बदलती कूटनीति

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नरेंद्र मोदी ने भारत की विदेश नीति का प्रवाह ही बदल दिया। दूर की कौड़ी नांपते समय अपने आसपड़ोस पर भी अधिक ध्यान दिया। इससे अपना सामर्थ्य भूल चुका भारत विश्व पटल पर अपनी ताकत के सहारे जोरदार दस्तक देता रहा है। ...जो कभी हमसे मुंह मोड़ लेते थेे, वे आज गले मिल रहे हैं। यह कूटनीति की ही विजय है।

सबके हित का निर्णय लें

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“मोदी ने पांच साल में क्या किया यह प्रश्न पूछा जाता है। उसका एक वाक्य में उत्तर है डरपोक हिंदू को मोदी ने निडर हिंदू के रूप में खड़ा किया। उनका यह ऐतिहासिक कार्य है। ...इसलिए मतदान करते समय विचार करें और सबके हित का ध्यान रखें।”

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