मारेय नाम का किसान

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“अचानक किसी चमत्कार की वजह से मेरे भीतर मौजूद सारी घृणा और क्रोध पूरी तरह ग़ायब हो गए थे। चलते हुए मैं मिलने वाले लोगों के चेहरे देखता रहा। वह किसान जिसने दाढ़ी बना रखी है, जिसके चेहरे पर अपराधी होने का निशान दाग दिया गया है, जो नशे में धुत्त कर्कश आवाज़ में गाना गा रहा है, वह वही मारेय हो सकता है।”

लच्छू

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“सप्ताहभर बाद लच्छू ने कारखाने की शुरुआत की, जिसका उद्घाटन लच्छू के पिता जी के साथ क्षेत्रीय सांसद के हाथों हुआ। उस दिन गांव के बीस और युवकों को लच्छू के कारखाने ’मुन्नी अगरबत्ती प्राडक्ट्स’ में नौकरी मिली।”

गुलशन‌

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उसका नाम था गुलशन। छोटी-सी प्यारी-सी गुड़िया। उम्र कोई 10-11 साल। जैसे गुलशन में फूल महकते हैं और अपनी आभा बिखेरते हैं, वह भी अपने नाम के अनुरूप, अपने गुणों, अपनी योग्यता और अपनी वाणी से अपने घर और आसपास के वातावरण को महकाती रहती थी।

चूहा और सांप

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उस चूहे ने चारों ओर देखा। तभी उसे एक सांप नजर आया। सांप ही 'बचाओ-बचाओ' चिल्ला रहा था। सांप के ऊपर एक बड़ा सा पत्थर रखा था।' चूहे को देख कर सांप ने कहा,'चूहा भाई, मुझे आजाद करो। इस पत्थर के नीचे दबा होने के कारण मैं रेंग नहीं पा रहा हूं।'

अम्मा

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बात तब की है जब हम बहुत छोटे थे। इतने छोटे कि हमारे मन में भूत-जिन्न, डायन- जोगी आदि अपना स्थाई डेरा जमाए रहते। रात में अकेले उठने में नानी मरती। कभी उल्लू महोदय जोर से चिल्लाते हुए उड़ते तो हमारी घिग्घी बंध् जाती।

चील ओर लोमड़ी    

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चील और लोमड़ी एक चील और लोमड़ी काफी लंबे अर्से से एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहते चले आ रहे थे। चील का घोसला पेड़ के ऊपर स्थित था और लोमड़ी की माँद उसी पेड़ के नीचे।.

मुझे नहीं बुलाया

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बाल हृदय चोट खाकर तिलमिलाता हुआ घर पहुंचा था, ‘‘मम्मा, पापा को कहो कितनी भी देर हो जाए, वह मुझे कार से ही स्कूल पहुंचाएं. लड़के मेरा मज़ाक उड़ा रहे थे. वैभव कह रहा था, ‘मेरे घर तो 3 कारें हैं… मेरे पापा 200 रु. कमाते हैं.’’ स्मिता को 200 रु. सुनकर हंसी आ गई कि बच्चों को अभी सौ और हज़ार-लाख की क्या समझ, फिर भी उसका मन कड़वाहट से भर उठा.

मालिक कुत्ता

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कुत्ते के मालिक होते हैं यह तो आपने हमने सबने सुना है। और मालिक के साथ चलते हुये कुत्ते का गरूर देखते ही बनता है। यह जीभ बाहर निकाल कर बेवजह लम्बे समय तक मुंडी हिलाता रहता है।

मूर्ख भेड़िया और समझदार पिल्ला

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एक बार की बात है कि एक कुत्ते का पिल्ला अपने मालिक के घर के बाहर धूप में सोया पड़ा था। मालिक का घर जंगल के किनारे पर था। अतः वहां भेड़िया, गीदड़ और लकड़बग्घे जैसे चालाक जानवर आते रहते थे।

गरीबों की पहचान

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एक समय की बात है। कि एक छोटे से गांव में रामू नाम का व्यक्ति रहता था। वह बहुत गरीब था वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए वह दिन रात मेहनत करता और उससे जो चार पैसे मिलते वह अपने बच्चों की किताबे व कॉपी लाता और फीस जमा कर देता था ।

नाग और चींटियाँ

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एक घने जंगल में एक बड़ा-सा नाग रहता था। वह चिड़ियों के अंडे, मेढ़क तथा छिपकलियों जैसे छोटे-छोटे जीव-जंतुओं को खाकर अपना पेट भरता था।

तेनाली राम महामूर्ख

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विजयनगर के राजा कृष्णदेव राय होली का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाते थे। इस अवसर पर हास्य-मनोरंजन के कई कार्यक्रम होते थे। हर कार्यक्रम के सफल कलाकार को पुरस्कार भी दिया जाता था।

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