इंडीजेनस डे का खंडन करता है बिरसा मुंडा का उलगुलान

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B 5047
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मूलनिवासी दिवस या इंडिजिनस पीपल डे एक भारत मे एक नया षड्यंत्र है। सबसे बड़ी बात यह कि इस षड्यंत्र को जिस जनजातीय समाज के विरुद्ध किया जा रहा  है, उसी जनजातीय समाज के कांधो पर इसकी शोभायमान पालकी भी चतुराई पूर्वक निकाली जा रही है। वस्तुतः प्रतिवर्ष इस दिन यूरोपियन्स और पोप को आठ करोड़ मूल निवासियों का निर्मम नरसंहार करने के लिए क्षमा मांगनी चाहिए। यह दिन यूरोपियन्स के लिए पश्चाताप व क्षमा का दिन है। यह दिन चतुर गोरे ईसाई व्यापारियों द्वारा भोलेभाले जनजातीय समाज को  मार काट करके उनकी भूमि छीन लिए जाने का शर्मनाक दिन है। यूरोपियन्स ने इस दिन को षड़यंत्रपूर्वक उत्सव का दिन बना दिया और आश्चर्य यह कि भारत का वनवासी समाज भी इस कुचक्र में फंस गया है।

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