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Trump on iran

अमेरिकी साम्राज्य के पतन की नींव रख रहे ट्रंप ?

by रमेश पतंगे
in देश-विदेश
1

अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का इतिहास कैसे उल्लेख करेगा? इस प्रश्न का सटीक उत्तर देना थोड़ा कठिन है, परंतु पिछले 2000 वर्षों के इतिहास की धाराओं को देखते हुए ऐसा लिखने का मोह नहीं रुकता कि भविष्य में अस्त होने वाले अमेरिकी साम्राज्य की आधारशिला रखने वाले राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रम्प का इतिहास में उल्लेख किया जाएगा।

दुनिया में कई साम्राज्य निर्मित हुए, उनमें से कुछ साम्राज्यों का उल्लेख किया जाना चाहिए। रोमन साम्राज्य, इसका कालखंड 27 ईसा पूर्व से 476 ईस्वी तक है। यह यूरोप का विशाल साम्राज्य समझा जाता है। इस साम्राज्य ने दुनिया को चार महत्वपूर्ण देन दीं-

रोमन साम्राज्य | परिभाषा, इतिहास, समय अवधि, मानचित्र और तथ्य | ब्रिटानिका

१) रोमन कानून
२) अनुशासित आधुनिक सेना की संरचना
३) क्रिश्चियनिटी (ईसाई धर्म) और
४) भव्य इमारतों का निर्माण।

आगे चलकर इस साम्राज्य के बाद दो भाग हुए। रोमन साम्राज्य और बाइजेंटाइन साम्राज्य। बाइजेंटाइन साम्राज्य 1 हज़ार वर्षों तक टिका। 1452 ईस्वी में इसका अंत हुआ।

मंगोल साम्राज्य में धर्म (स्पष्टीकरण) - विश्व इतिहास विश्वकोश

दूसरे साम्राज्य का नाम है मंगोल साम्राज्य। यह साम्राज्य 13वीं शताब्दी में मध्य एशिया में खड़ा हुआ। अब तक जितने भी साम्राज्य खड़े हुए, उनमें से यह सबसे विशाल साम्राज्य माना जाता है। इसकी विशेषता है अनुशासित सेना, घोड़े पर बैठकर धनुष-बाण चलाने की कुशलता, युद्ध जीतने के बात अत्यंत क्रूरता, इस मंगोल साम्राज्य ने एशिया और यूरोप के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक आदान-प्रदान को जन्म दिया। कई भू-भाग जीतने के बाद आगे लगभग 300 वर्षों तक शांति रही। इससे व्यापार में बहुत वृद्धि हुई। इस साम्राज्य का अंत साम्राज्य के उत्तराधिकारियों में कलह होने और साम्राज्य का विभाजन होने से हुआ और फिर वहाँ की स्थानीय जनसंस्कृति में वह विलीन हो गया।

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दुनिया का तीसरा ऐसा साम्राज्य अंग्रेजों ने खड़ा किया। अंग्रेज व्यक्ति गर्व से कहते थे कि अंग्रेजी साम्राज्य का कभी सूर्यास्त नहीं होगा। यह साम्राज्य व्यापारिक साम्राज्य था। उसे औद्योगिक क्रांति का जोड़ मिला। कारखानों में उत्पादन शुरू हुआ। भाप की ऊर्जा और फिर बिजली की ऊर्जा के सहायता से प्रचंड औद्योगिक क्रांति हुई। अंग्रेजी साम्राज्य सोना और प्रतिष्ठा इन दो स्तम्भों पर खड़ा हुआ। साम्राज्य का विस्तार ही बाद में साम्राज्य के अस्त होने का कारण बना। पहले और दूसरे विश्वयुद्ध ने सारे आर्थिक समीकरण बदल दिए। साम्राज्य की जनता ने स्वतंत्रता के आंदोलन शुरू किए और धीरे-धीरे ब्रिटेन का सूर्यास्त होने लगा और वह छोटा सा साम्राज्य रह गया।

यूरोप के चौथे साम्राज्य का नाम है, रूसी साम्राज्य। 1721 में यह साम्राज्य प्रारंभ हुआ। पीटर द ग्रेट और कैथरीन द ग्रेट ने इस साम्राज्य का विस्तार किया। 1917 में ज़ार निकोलस द्वितीय ‘के कृत्यों’ से साम्राज्य का अंत हुआ। फिर खड़ा हुआ रूसी साम्यवादी साम्राज्य। उसे लेनिन और स्टालिन ने खड़ा किया, उसका अंत १९९० में हुआ। यह साम्राज्य वैचारिक साम्राज्य जैसा था, वैसे ही राज्य आतंकवाद का उपयोग करके लोगों की स्वतंत्रता की सभी आकांक्षाओं को टैंकों के नीचे कुचल डालने वाला था। चंगेज़ खान की तरह इस कम्युनिस्ट साम्राज्य ने लोगों को मारने का विश्वविक्रम किया है।

The Russian Empire - Summary on a map

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका का साम्राज्य खड़ा हुआ। इससे पहले के साम्राज्यों और अमेरिकी साम्राज्य में एक मूलभूत अंतर है। अमेरिकी साम्राज्य भू-विस्तार का साम्राज्य नहीं है। अन्य साम्राज्यों ने देश जीतकर उन पर अपना राज्य शुरू किया। अमेरिका ऐसा नहीं करता। अमेरिका यह अलग प्रकार का विस्तारवादी साम्राज्य है।

उसके हथियार ये हैं –
• अलग-अलग देशों में सैनिक अड्डे, क्षेपणास्त्र अड्डे
• अपने हितों को दूसरे देशों से बलपूर्वक वसूल करना।
• अमेरिका के अनुकूल ऐसी राजसत्ताएँ प्रमुख देशों में निर्मित हों, यह आँखों में तेल डालकर देखना।
• हम लोकतांत्रिक हैं और दुनिया के लोगों को लिबर्टी अर्थात सभी प्रकार की स्वतंत्रता देना हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है। एकाधिकारशाही का हम धिक्कार करते हैं, हम लोकतांत्रिक हैं, यह अमेरिकी साम्राज्य की सैद्धांतिक भूमिका है।

इसे हम एक शब्द दे सकते हैं, लोकतांत्रिक साम्राज्यवाद। चंगेज़ खान, रोम के सम्राट, ख़िलाफ़त के ख़लीफ़ा, रूस के ज़ार, नेपोलियन, हिटलर, मुसोलिनी इन सबका साम्राज्यवाद व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, भू-विस्तार, इन मुद्दों पर हुआ। अमेरिका यह चेहरा धारण नहीं करता। अमेरिका का मुखौटा लोकतंत्र का है। अन्य साम्राज्यों की तरह ही अमेरिका का भी साम्राज्य ही है। बदलते समय के अनुरूप भू-भाग जीतकर उस पर राज्य करने की जिम्मेदारी अमेरिका को नहीं चाहिए, लेकिन अपने देश के लिए आवश्यक खनिज पदार्थ, कृषि उत्पाद, गृह उपयोगी वस्तुएँ, ऐसी सभी जैसा हम कहें उस प्रकार से उपलब्ध कराने की क्षमता यह साम्राज्यवादी क्षमता है। 英文圖書)Why Great Nations Fail: The Hidden Lessons Behind the Rise and Fall of Empires 平裝版, Independently Published, English - 經濟| 酷澎

दुनिया के साम्राज्य कैसे खड़े होते हैं, उनका परमोच्च बिंदु कब आता है और उनकी उतरती ढलान कब लगती है, इस पर अनेक पुस्तकें हैं। उनमें से एक पुस्तक का नाम है, ‘Why Great Nations Fail: The Hidden Lessons Behind the Rise and Fall of Empires’ लेखिका मारिया ने इस पुस्तक में अत्यंत शक्तिशाली रोमन साम्राज्य का पतन क्यों हुआ, इसकी अत्यंत सरल भाषा में व्याख्या की है।

वह लिखती हैं, ‘रोमन साम्राज्य के अध्ययन ने मुझे एक सबक सिखाया। वह सबक यह है कि कोई भी साम्राज्य अपना ह्रास रोक नहीं सकता। वह कितना भी अजेय लगे, उसका अंत निश्चित है। साम्राज्य के अधःपतन के कारण सूक्ष्म होते हैं। साम्राज्य खड़ा करते समय जो ऊर्जा और शक्ति होती है उसकी जगह बाद में आराम-विलास और मौज-मस्ती ले लेती है। साम्राज्य खड़ा करते समय कर्तव्य की भावना और आदर्शवाद होता है। बाद में स्वार्थ उसकी जगह ले लेता है। साम्राज्य खड़ा करते समय लोगों का एकजुटता होती है, राजकीय लक्ष्य समान होते हैं। साम्राज्य हो जाने पर, राजकीय विभाजन शुरू हो जाते हैं, आपस में कलह शुरू हो जाते हैं और वह साम्राज्य का पतन ले आते हैं।’

अमेरिकी साम्राज्य का पतन और अंत | मैट विलियम्स द्वारा | मीडियम

मारिया ने रोमन साम्राज्य के पतन की और आने वाले अमेरिकी साम्राज्य के पतन की तुलना की है। वह लिखती हैं कि आज अमेरिका प्रचंड धनसंपन्न है। साथ ही प्रौद्योगिकी और सैन्य शक्ति के मामले में अमेरिका महाशक्ति ही है। ऐसा होते हुए भी अमेरिका के आंतरिक तनाव, विभाजन, चरम राजनैतिक मतभेद, उपभोगवाद की ओर मतलब ऐशआराम (खाओ, पियो, मौज करो) की ओर बढ़ता जा रहा रुझान, उससे विश्व लक्ष्य हमें हासिल करना है, ऐसी जो राष्ट्रीय ऊर्जा होती है, वह क्षीण होती जाना, यह सब अमेरिका में घटित होता दिख रहा है।

डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के विरुद्ध युद्ध शुरू किया। भविष्य में ईरान से अमेरिका को प्रचंड खतरा संभव है, इसलिए आज ही ईरान को रोकना चाहिए, ऐसी ट्रम्प की भूमिका है। इसलिए ईरान की सैन्य शक्ति को नष्ट करने के लिए ईरान पर बम बरसाए जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प का यह युद्ध अमेरिकी जनता का युद्ध है क्या? आज का अमेरिका राजनैतिक रूप से प्रचंड जागरूक है। युद्ध शुरू होने के बाद अलग-अलग संस्थाओं ने जनमत का सर्वेक्षण किया और प्रत्येक का निष्कर्ष यह आया कि, ५३% अमेरिकी जनता को यह युद्ध पसंद नहीं है। केवल ४% से १०% लोग इस युद्ध का समर्थन करते हैं तो बाकी के लोग तटस्थ हैं।

We want to finish this one first': Trump hints action on this country after Iran war - US News | The Financial Express

इसका अर्थ क्या हुआ?, इसका अर्थ यह हुआ कि अमेरिका में राजनैतिक मतों का विभाजन हुआ है और वह अत्यंत धारदार है।
पर्ल हार्बर पर जापान ने विमान हमला किया था। तब अमेरिकी जनता खलबला कर उठी, दूसरे विश्वयुद्ध में उतरी और अंत में दो परमाणु बम जापान पर डालकर इस आकस्मिक हमले का बदला लिया गया। वह परिस्थिति अब नहीं है। अब ५३% लोगों को युद्ध नहीं चाहिए। डोनाल्ड ट्रम्प रिपब्लिकन पार्टी के हैं। अमेरिका का जनमत रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक विचार में विभाजित रहता है। यह विभाजन इस समय अत्यंत चरम पर हो गया है।

डोनाल्ड ट्रम्प विश्व जनमत के विचार से सामान्यतः खलनायक बन गए हैं। जिन देशों का इस युद्ध से किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है, उन्हें युद्ध के परिणाम भोगने पड़ रहे हैं। आज की दुनिया ईंधन पर चलती है। रसोईघर से लेकर विमान उड़ान तक सभी जगह ईंधन चाहिए। उसकी आपूर्ति ईरान और खाड़ी देशों से होती है। यह आपूर्ति संकट में फंस गई है। भारत में उसके परिणाम महसूस होने लगे हैं।

साम्राज्यों का अंत पराकोटी की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, अत्यधिक असहिष्णुता, दूसरे पर वर्चस्व जमाने की चरम भूमिका और जिस शक्ति के आधार पर साम्राज्य प्राप्त होता है, उसका प्रचंड गर्व, यह सभी लक्षण डोनाल्ड ट्रम्प के रूप में हम देख सकते हैं।

हमारी अनेक पुराण कथाओं में अलौकिक शक्ति प्राप्त करने वाले असुरों की कथाएँ आती हैं। वह असुर ऐसा सोचता है कि मैं अजेय हूँ, मुझे कोई मार नहीं सकता। शस्त्र मार नहीं सकता, मनुष्य मार नहीं सकता, रात-दिन के समय भी मैं मर नहीं सकता। इन सभी शर्तों की पूर्ति करने वाला नरसिंह अवतार होता है। जो मनुष्य भी नहीं, प्राणी भी नहीं, वह हिरण्यकश्यप को गोद में लेकर उसका पेट फाड़ता है।

डोनाल्ड ट्रम्प को यह कथा ज्ञात नहीं होगी। उसका आशय इतना ही है कि जैसे दुनिया में मनुष्य नश्वर है, वैसे ही उत्कर्ष को पहुँचा हुआ राष्ट्र भी अधःपतन के मार्ग पर जाने वाला है, यह निश्चित है। इसे इतिहास की पुनरावृत्ति होती है, ऐसा कहते हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के कार्यकाल में यह अवनति चरम पर जाएगी ऐसा नहीं, लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने इसकी नींव रख दी है, ऐसा इतिहास निश्चित रूप से कहेगा।

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Tags: #Trump #America #Iran #WorldWar #Geopolitics #BreakingNews #USvsIran #GlobalCrisis #HindiNews #WarAlert #MiddleEast

रमेश पतंगे

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Comments 1

  1. Anonymous says:
    25 minutes ago

    Good insights

    Reply

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