परिवार के मुखिया बैरिस्टर नरेंद्रजीत सिंह

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में संघचालक की भूमिका परिवार के मुखिया की होती है। बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह ने उत्तर प्रदेश में इस भूमिका को जीवन भर निभाया। उनका जन्म 18 मई, 1911 को कानपुर के प्रख्यात समाजसेवी रायबहादुर श्री विक्रमाजीत सिंह के घर में हुआ था। शिक्षाप्रेमी होने के कारण इस…

दिल्ली के राजा वसंतराव ओक

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संघ की प्रारम्भिक प्रचारकों में एक श्री वसंतराव कृष्णराव ओक का जन्म 13 मई, 1914 को नाचणगांव (वर्धा, महाराष्ट्र) में हुआ था। जब वे पढ़ने के लिए अपने बड़े भाई मनोहरराव के साथ नागपुर आये, तो बाबासाहब आप्टे द्वारा संचालित टाइपिंग केन्द्र के माध्यम से दोनों का सम्पर्क संघ से…

विहिप क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीरंग राजे की हिंदी विवेक कार्यालय में सदिच्छा भेंट

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विश्व हिन्दू परिषद् के क्षेत्रीय संगठन मंत्री श्रीरंग राजे ने हिंदी विवेक कार्यालय में सदिच्छा भेंट की। इस दौरान उन्हें शाल ओढ़ाकर उनका स्वागत सम्मान किया गया। परिचय सत्र होने के बाद श्रीरंग राजे जी ने विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना, उद्देश्य एवं भूमिका स्पष्ट की और इसके साथ ही…

संघ विस्तार में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं का योगदान

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य विस्तार में प्रचारकों का बड़ा योगदान है। साथ ही उस कार्य को टिकाने तथा समाज के विविध क्षेत्रों में पहुंचाने में वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं की बहुत बड़ी भूमिका है। 11 मई, 1929 को नरवाना (हरियाणा) में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता बाबू दिलीप चंद्र गुप्त के घर…

कैसा होगा संघ का शताब्दी वर्ष ? 

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना को वर्ष 2025 में 100 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। 1925 में नागपुर में संघ स्थापना हुई थी। इस घटना को इस वर्ष 2022 की विजयादशमी को 97 वर्ष पूर्ण होंगे। संघ का कार्य किसी की कृपा से नहीं, केवल संघ के कार्यकर्ताओं के परिश्रम,…

सेवा को समर्पित डॉ. रामगोपाल गुप्ता

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पूर्वोत्तर भारत के सेवा कार्यों में अपना जीवन लगाने वाले डा. रामगोपाल गुप्ता का जन्म कस्बा शाहबाद (जिला रामपुर, उ.प्र.) में 10 मई, 1954 को हुआ था। उनके पिता श्री महेश चंद्र जी की वहां कपड़े की दुकान थी। रामगोपाल जी आठ भाई-बहिन थे। उनका नंबर भाइयों में दूसरा था।…

कर्मनिष्ठ प्रचारक ऋषि मुनि सिंह

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जीवन की अंतिम सांस तक बिहार में संघ का कार्य करने वाले श्री ऋषि मुनि सिंह का जन्म 1927 में बिहार के कैमूर जिले के चांद विकास खंड के एक ग्राम में हुआ था। उनके अभिभावकों ने उनका यह नाम क्यों रखा, यह कहना तो कठिन है; पर उन्होंने अपने…

प्रवासप्रिय यादवराव कालकर

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श्री यादवराव कालकर का जन्म 10 मई, 1916 को देऊलघाट (महाराष्ट्र) में श्री जानकीराम एवं श्रीमती सरस्वती बाई के घर में हुआ था। बुलढाणा में उनकी खेती थी। उन्होंने प्राथमिक शिक्षा बुलढाणा तथा हाई स्कूल अमरावती से किया। अमरावती में ही उनकी भेंट डॉ. हेडगेवार से हुई।  1937 में कामठी…

संघ हिंदुत्व के लिए प्रतिबद्ध – डॉ. मोहन भागवत

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‘‘भारत एक चिरंजीवी राष्ट्र है। हिंदुत्व हमारी संस्कृति है। यह सर्व पुरातन संस्कृति हजारों साल से भारत वर्ष को एक सूत्र में पिरोये हुए है और मजबूती प्रदान कर रही है। सभी मत-पंथ, वर्ण, जाति व विचार को सम्मान देना तथा एकता के सूत्र में बांधे रखना ही हिंदुत्व है।’’…

सेवाप्रिय राधेश्याम जी त्रिपाठी

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संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेन्द्र सिंह का प्रयाग से बड़ा गहरा नाता था। उन्होंने वहां से उच्च शिक्षा प्राप्त की तथा फिर वहीं प्राध्यापक भी रहे। उनका वहां एक निजी मकान भी था। उनके निधन के बाद वहां ‘प्रो. राजेन्द्र सिंह स्मृति सेवा न्यास’ का गठन किया गया है।…

सेवा के धाम विष्णु कुमार जी

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सेवा पथ के साधक श्री विष्णु जी का जन्म कर्नाटक में बंगलौर के पास अक्कीरामपुर नगर में पांच मई, 1933 को हुआ। छह भाई और एक बहिन वाले परिवार में वे सबसे छोटे थे। घर में सेवा व अध्यात्म का वातावरण होने के कारण छह में से दो भाई संघ…

सरसेनापति मार्तण्डराव जोग

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नागपुर के डोके मठ में 9-10 नवम्बर, 1929 को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में डा. हेडगेवार को आद्य सरसंघचालक, श्री बालासाहब हुद्दार को सरकार्यवाह तथा श्री मार्तंडराव जोग को सरसेनापति घोषित किया गया था। 1899 में एक उद्योगपति परिवार में जन्मे श्री जोग नागपुर में शुक्रवार पेठ स्थित ‘जोगबाड़ा’ के…

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