बॉलीवुड के बेशर्म रंग

Continue Readingबॉलीवुड के बेशर्म रंग

‘बेशर्म रंग’ वैसे तो शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण अभिनीत नई फिल्म पठान का एक गीत मात्र है, जिसे लेकर पिछले कई दिनों में कई चर्चाएं हुई हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों में बॉलीवुड का ही रंग ‘बेशर्म’ हो चला है। एक समय था जब फिल्मों को समाज का आईना कहा जाता था, फिल्म बनाने वालों…

ग़ड़रिया बने हिंदू समाज

Continue Readingग़ड़रिया बने हिंदू समाज

लैंड जिहाद के माध्यम से ये लोग हिंदुओं की भूमि को हथियाने के लिए तरह-तरह के रास्ते अपनाते रहते हैं। किसी की जगह पर हरा कपड़ा डालकर मजार बना देना और धीरे-धीरे उसके आस-पास चबूतरा बना कर वह जमीन हथिया लेना या कैराना जैसी सुनियोजित घटना को अंजाम देना आदि उनके ‘मंसूबों’ को साफ करते हैं।

प्रकाशमान यात्रा का सशक्त संदेश : भारतीय संस्कृति

Continue Readingप्रकाशमान यात्रा का सशक्त संदेश : भारतीय संस्कृति

हिंदी विवेक मासिक पत्रिका के ’सांस्कृतिक भारत’ दीपावली विशेषांक के साहित्यिक प्रयास के संदर्भ में आपकी सटीक प्रतिक्रियाओं की हमें प्रतीक्षा रहेगी। पुन: आप सभी पाठकों, हितचिंतकों, विज्ञापनदाताओं, लेखकों आदि को दीपावली एवं नूतन वर्ष की पुनः शुभकामनाएं। धन्यवाद।

शक्ति सम्पन्न भारत

Continue Readingशक्ति सम्पन्न भारत

पिछले माह की 16 तारीख को भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन की शंघाई सहयोग संगठन की शिखर बैठक में हुई चर्चा में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि ‘यह समय युद्ध का नहीं है’ और पुतिन ने उत्तर में कहा था कि ‘हम आपकी चिंता को समझते हैं और इस दिशा में प्रयास करेंगे।’

मुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

Continue Readingमुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

भारत में रहने वाले हिंदुओं का अब यह कर्तव्य है कि वे अपने श्रद्धा स्थानों को दासता के चंगुल से मुक्त कराने का बीड़ा उठाएं, जिससे आनेवाली पीढ़ियां अपना सही इतिहास जान सकें। अब भी अगर हिंदू अपनी आंखें मूंदे बैठे रहे, अपने आस-पास रातभर में बन जाने वाली मजारों पर कुछ नहीं बोले और अपने श्रद्धा स्थानों और अपने प्रतीकों को मुक्त करने के लिए उद्यत नहीं हुए तो शिव को शव बनाने के जो प्रयत्न अभी असफल रहे हैं, वे आगे सफल भी हो सकते हैं। 

चीन से दोस्ती, जी का जंजाल

Continue Readingचीन से दोस्ती, जी का जंजाल

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच भी चीन ने ताइवान पर हमले की बात कहकर विश्व को दो खेमों में बांटने की योजना बनाई थी परंतु वह उसे आगे नहीं ले जा सका क्योंकि वह चाहता था कि चूंकि चीन रूस के साथ है तो रूस भी ताइवान मुद्दे पर उसके साथ खड़ा रहेगा, परंतु यह बात अधिक आगे नहीं बढ़ी।

भारतबोध जागृत हो रहा है

Continue Readingभारतबोध जागृत हो रहा है

पिछले कुछ महीनों से भारतीय समाज में एक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। इसे कुछ लोग सामाजिक ध्रुविकरण कह रहे हैं, कुछ लोग बंटवारे की राजनीति कह रहे हैं, कुछ लोग गंगा-जमुनी संस्कृति पर प्रहार मान रहे हैं। कर्नाटक में हिजाब प्रकरण के बाद हिंदू युवाओं द्वारा भगवा गमछे ओढ़ना,…

चुनावों से पहले का दावानल

Continue Readingचुनावों से पहले का दावानल

बेंगलुरु के माउंट कार्मेल पीयू कॉलेज में 17 साल की सिख लड़की को पगड़ी उतारकर कॉलेज आने के लिए कहा गया। कॉलेज का कहना था कि उसे 10 फरवरी को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा, जिसमें समान ड्रेस कोड की बात कही गई है। हालांकि…

जाति नहीं, विकास होगा चुनावी आधार

Continue Readingजाति नहीं, विकास होगा चुनावी आधार

उत्तरायण के साथ ही भारत के कुछ प्रांतों में गर्मी की अनुभूति होने लगी है और उत्तरप्रदेश, पंजाब और अन्य तीन राज्यों में चुनावों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। आजकल किसी भी बड़े प्रदेश का चुनाव उस प्रदेश तक सीमित रहता ही नहीं है, उसकी परछाई और रणभेरी का…

काशी विश्वनाथ : राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि

Continue Readingकाशी विश्वनाथ : राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बाबा विश्वनाथ के मंदिर का विहंगम दृश्य मात्र एक भवन का नवीनीकरण नहीं है। यह हमारी मान्यताओं, प्रतीकों और संस्कृति के संरक्षण का ऐतिहासिक उत्सव है।

सवाल नाक का नहीं, राष्ट्रहित का है!

Continue Readingसवाल नाक का नहीं, राष्ट्रहित का है!

गुरु नानक जयंती पर सम्पूर्ण राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले तो देश को शुभकामनाएं दीं और फिर देश से क्षमा मांगते हुए जो कहा उसका आशय यह था कि केंद्र सरकार कृषि कानून वापिस ले रही है क्योंकि वह कुछ किसानों को कृषि कानून…

प्रकृति और अध्यात्म के सम्मोहन का सिद्ध मंत्र उत्तराखंड

Continue Readingप्रकृति और अध्यात्म के सम्मोहन का सिद्ध मंत्र उत्तराखंड

भारत देश विविधताओं से भरा है। अपने देश में भाषा, धर्म, जातियों-उपजातियों तथा रहन-सहन की विभिन्नता के कारण भारत के सामाजिक रंग-रूप में भी विविधता दिखाई देती हैं। भारत कि यह वैविध्यपूर्ण लोक संस्कृति ही भारतीय जीवन शैली की परिचायक है। रीति-रिवाज, वेशभूषा, खानपान, लोक-कथाएं, लोक-देवता, मेले, त्योहार, मनोरंजन के…

End of content

No more pages to load