मुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

Continue Readingमुसलमानों को भारतीयत्व अपनाना होगा

भारत में रहने वाले हिंदुओं का अब यह कर्तव्य है कि वे अपने श्रद्धा स्थानों को दासता के चंगुल से मुक्त कराने का बीड़ा उठाएं, जिससे आनेवाली पीढ़ियां अपना सही इतिहास जान सकें। अब भी अगर हिंदू अपनी आंखें मूंदे बैठे रहे, अपने आस-पास रातभर में बन जाने वाली मजारों पर कुछ नहीं बोले और अपने श्रद्धा स्थानों और अपने प्रतीकों को मुक्त करने के लिए उद्यत नहीं हुए तो शिव को शव बनाने के जो प्रयत्न अभी असफल रहे हैं, वे आगे सफल भी हो सकते हैं। 

चीन से दोस्ती, जी का जंजाल

Continue Readingचीन से दोस्ती, जी का जंजाल

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच भी चीन ने ताइवान पर हमले की बात कहकर विश्व को दो खेमों में बांटने की योजना बनाई थी परंतु वह उसे आगे नहीं ले जा सका क्योंकि वह चाहता था कि चूंकि चीन रूस के साथ है तो रूस भी ताइवान मुद्दे पर उसके साथ खड़ा रहेगा, परंतु यह बात अधिक आगे नहीं बढ़ी।

भारतबोध जागृत हो रहा है

Continue Readingभारतबोध जागृत हो रहा है

पिछले कुछ महीनों से भारतीय समाज में एक परिवर्तन दिखाई दे रहा है। इसे कुछ लोग सामाजिक ध्रुविकरण कह रहे हैं, कुछ लोग बंटवारे की राजनीति कह रहे हैं, कुछ लोग गंगा-जमुनी संस्कृति पर प्रहार मान रहे हैं। कर्नाटक में हिजाब प्रकरण के बाद हिंदू युवाओं द्वारा भगवा गमछे ओढ़ना,…

चुनावों से पहले का दावानल

Continue Readingचुनावों से पहले का दावानल

बेंगलुरु के माउंट कार्मेल पीयू कॉलेज में 17 साल की सिख लड़की को पगड़ी उतारकर कॉलेज आने के लिए कहा गया। कॉलेज का कहना था कि उसे 10 फरवरी को दिए गए हाई कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा, जिसमें समान ड्रेस कोड की बात कही गई है। हालांकि…

जाति नहीं, विकास होगा चुनावी आधार

Continue Readingजाति नहीं, विकास होगा चुनावी आधार

उत्तरायण के साथ ही भारत के कुछ प्रांतों में गर्मी की अनुभूति होने लगी है और उत्तरप्रदेश, पंजाब और अन्य तीन राज्यों में चुनावों की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। आजकल किसी भी बड़े प्रदेश का चुनाव उस प्रदेश तक सीमित रहता ही नहीं है, उसकी परछाई और रणभेरी का…

काशी विश्वनाथ : राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि

Continue Readingकाशी विश्वनाथ : राष्ट्र पुनर्जागरण की दृष्टि

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बाबा विश्वनाथ के मंदिर का विहंगम दृश्य मात्र एक भवन का नवीनीकरण नहीं है। यह हमारी मान्यताओं, प्रतीकों और संस्कृति के संरक्षण का ऐतिहासिक उत्सव है।

सवाल नाक का नहीं, राष्ट्रहित का है!

Continue Readingसवाल नाक का नहीं, राष्ट्रहित का है!

गुरु नानक जयंती पर सम्पूर्ण राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले तो देश को शुभकामनाएं दीं और फिर देश से क्षमा मांगते हुए जो कहा उसका आशय यह था कि केंद्र सरकार कृषि कानून वापिस ले रही है क्योंकि वह कुछ किसानों को कृषि कानून…

प्रकृति और अध्यात्म के सम्मोहन का सिद्ध मंत्र उत्तराखंड

Continue Readingप्रकृति और अध्यात्म के सम्मोहन का सिद्ध मंत्र उत्तराखंड

भारत देश विविधताओं से भरा है। अपने देश में भाषा, धर्म, जातियों-उपजातियों तथा रहन-सहन की विभिन्नता के कारण भारत के सामाजिक रंग-रूप में भी विविधता दिखाई देती हैं। भारत कि यह वैविध्यपूर्ण लोक संस्कृति ही भारतीय जीवन शैली की परिचायक है। रीति-रिवाज, वेशभूषा, खानपान, लोक-कथाएं, लोक-देवता, मेले, त्योहार, मनोरंजन के…

भारत की कूटनीति रंग लाएगी?

Continue Readingभारत की कूटनीति रंग लाएगी?

वर्तमान में भारत ‘वेट एण्ड वॉच‘ की नीति अपना रहा है जो कि सही भी है क्योंकि ऊंट किस करवट बैठेगा, कहा नहीं जा सकता। भारत को तालिबान की शत्रुता को आमंत्रित नहीं करना चाहिए और न ही अमेरिका का मोहरा बनना चाहिए।

भारत को बचना होगा तालिबानी सोच से

Continue Readingभारत को बचना होगा तालिबानी सोच से

अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ अफगानिस्तान के लोग शरणार्थी बनकर जा सकते हैं। क्योंकि पाकिस्तान की हालत किसी से छुपी नही है और चीन सांस्कृतिक दृष्टि से और सीमाओं की दूरी की दृष्टि से अफगानिस्तान से इतना दूर है कि वहां जाना अफगानिस्तान के लोगों को नहीं सुहाएगा। ऐसे में उन्हें भारत आना ही सबसे आसान लगेगा।

विरासत के आधार पर स्वतंत्र भारत का विकास

Continue Readingविरासत के आधार पर स्वतंत्र भारत का विकास

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में अगर हर भारतीय यह निश्चय कर ले कि वह अपनी हर कृति के केंद्र में अपने राष्ट्र को रखेगा, उस कृति का परिणाम अगर राष्ट्रहित में नहीं है तो वह कृति नहीं करेगा तो भारत को विकसित और सुखी राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता।

मूल संस्कृति से जोड़नेवाली – सिंधु दर्शन यात्रा

Continue Readingमूल संस्कृति से जोड़नेवाली – सिंधु दर्शन यात्रा

अपनी पारमार्थिक उन्नति के लिए आध्यात्मिक यात्राएं करना जितना आवश्यक है, उतनी ही आवश्यक है अपने देश की भौगोलिक संरचना, उसका इतिहास और अपनी संस्कृति को जानने के लिए यात्रा करना। सिंधु दर्शन यात्रा की गिनती इसी यात्रा के रूप में की जानी चाहिए और प्रत्येक भारतीय को इसका अंग बनने का प्रयत्न करना चाहिए।

End of content

No more pages to load