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‘पंच परिवर्तन’ ही वर्तमान हिंदू धर्म का युगधर्म – दत्तात्रेय होसबाळे

‘पंच परिवर्तन’ ही वर्तमान हिंदू धर्म का युगधर्म – दत्तात्रेय होसबाळे

by हिंदी विवेक
in संघ
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अनंत बिरादार और पद्मा बिरादार के रजत जयंती विवाह समारोह में ‘कुटुंब प्रबोधन’

राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (निसर्ग ग्राम) पुणे के सभागार में एक अनोखा पारिवारिक और सामाजिक चेतना जागृत करने वाला समारोह आयोजित किया गया। अंतरराष्ट्रीय निसर्गोपचार संस्था (INO) राष्ट्रीय अध्यक्ष व सूर्या फाउंडेशन के ट्रस्टी अनंत बिरादार और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती पद्मा बिरादार के विवाह के २५ वें रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में ‘परिवार स्नेह मिलन’ तथा ‘कुटुंब प्रबोधन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाळे मुख्य अतिथि एवं प्रमुख वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही वीरशैव लिंगायत पंचमसाली जगद्गुरु पीठ के जगद्गुरु श्री वचनानंद महास्वामी जी (श्वासगुरु) का दिव्य सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।
इस शुभ अवसर पर मंच पर महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील उपस्थिति रहे। यह समारोह केवल एक परिवार का उत्सव न रहकर भारतीय पारिवारिक मूल्यों के पुनर्जीवन का एक विराट संगम बन गया।

‘व्यक्ति निर्माण और परिवार व्यवस्था राष्ट्र निर्माण की नींव’ – दत्तात्रेय होसबाळे

कार्यक्रम में मुख्य वक्तव्य देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाळे ने अत्यंत ओजस्वी, अध्ययनपूर्ण और मार्गदर्शक विचार प्रस्तुत किए। अपने विस्तृत भाषण में उन्होंने बदलते वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारतीय परिवार व्यवस्था के महत्व और समाज के सामने उपस्थित चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
मा. होसबाळे ने कहा, “हिंदुओं का संगठन ही हिंदुत्व का शाश्वत धर्म है, इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन बदलते समय और परिस्थितियों के अनुसार आज सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वबोध (स्वभाव जागरण) और नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन- यह ‘पंच परिवर्तन’ का महामंत्र ही अब हिंदुत्व का वास्तविक युगधर्म बन गया है।” उन्होंने इन पांच स्तंभों पर कार्य करके सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का आह्वान किया।

आज के आधुनिक और तकनीकी युग में पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग के कारण मानवीय संबंधों में आत्मीयता कम होती जा रही है। पारिवारिक संवाद समाप्त होता जा रहा है। भौतिक साधनों से केवल सीमेंट-कंक्रीट का ‘घर’ बनाया जा सकता है, लेकिन ‘परिवार’ केवल आत्मीयता, प्रेम और परस्पर विश्वास से ही बनता है। आज संयुक्त परिवार व्यवस्था व्यवहारिक रूप से कठिन होती जा रही है, फिर भी परिवार के सदस्यों के बीच मानसिक जुड़ाव बनाए रखना आवश्यक है। परिवार को केवल एक व्यवस्था न बनाकर संस्कारों का केंद्र बनाना माता-पिता की बड़ी जिम्मेदारी है। पाश्चात्य प्रभाव में आकर एकल परिवार प्रणाली को बढ़ावा देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि परंपरागत संयुक्त परिवार व्यवस्था को बनाए रखना आज एक बड़ी चुनौती है। व्यक्तिवादी प्रवृत्ति और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग- ये दो प्रमुख बाधाएँ हैं जो लोगों के बीच संबंधों को कमजोर कर रही हैं।

भाषा के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को मराठी भाषा आनी चाहिए। अपनी मातृभाषा के प्रति किसी प्रकार का हीनभाव रखने की आवश्यकता नहीं है। बच्चों को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए विदेशी भाषाएँ अवश्य सिखाएँ, लेकिन घर में मातृभाषा का सम्मान बना रहना चाहिए। केवल अपनी समृद्ध संस्कृति पर गर्व करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे दैनिक जीवन में अपनाना भी आवश्यक है।

कार्यक्रम के दिव्य सान्निध्यदाता जगद्गुरु श्री वचनानंद महास्वामी जी ने अपने आशीर्वचन में बिरादार परिवार के सामाजिक योगदान की सराहना की। उन्होंने 25 वर्ष पूर्व के अपने कठिन साधना काल की स्मृतियों को साझा किया। उत्तर भारत में योग और प्राकृतिक चिकित्सा का अध्ययन करते समय गंभीर बीमारी के दौरान डॉ. अनंत बिरादार और श्रीमती पद्मा बिरादार ने पुत्रवत उनकी सेवा की, इस ऋण को उन्होंने भावुकता से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अनंत बिरादार की दूरदर्शिता, विनम्रता और सेवा भावना संत बसवेश्वर के ‘दासोह’ विचार का जीवंत उदाहरण है।

चंद्रकांत दादा पाटील द्वारा सराहना…
महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत दादा पाटील ने बिरादार दंपत्ति को रजत जयंती की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि अपने विवाह की रजत जयंती को राष्ट्रीय चिंतन और परिवार प्रबोधन के साथ मनाना समाज के लिए एक आदर्श उदाहरण है। विधान परिषद सदस्य योगेश टिळेकर ने भी बिरादार परिवार के सामाजिक कार्यों की सराहना की और कहा कि उन्होंने अपने व्यक्तिगत उत्सव को समाज के साथ साझा कर एक नई परंपरा स्थापित की है।

‘निसर्ग ग्राम’ में राष्ट्रभक्ति का महासागर
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की संकल्पना से विकसित आलंदी– पर्वत श्रेणियों की गोद में बसे इस राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (निसर्ग ग्राम) के सभागार में पुणे जिले के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों नागरिक अपने परिवारों सहित उपस्थित थे। सभी आयु वर्ग के लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति पारिवारिक मूल्यों के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती थी।
दत्तात्रेय होसबाळे के प्रेरणादायी भाषण के बाद कार्यक्रम के समापन पर पूरा सभागार एक साथ खड़ा हो गया और हजारों कंठों से गूंजते “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के उद्घोष से पूरा वातावरण देशभक्ति से भर उठा। यह देशभक्ति, सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक संस्कारों का अद्वितीय संगम उपस्थित लोगों के मन में लंबे समय तक अंकित रहने वाला रहा।

कार्यक्रम की सफलता के लिए रंगराव दिगंबरराव बिरादार, तानाजी दिगंबरराव बिरादार, नारायण दिगंबरराव बिरादार सहित मनोज बिरादार, महेश बिरादार और किरण बिरादार ने विशेष प्रयास किए। अंत में सभी उपस्थित लोगों के लिए स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्धक ‘प्राकृतिक भोजन’ (निसर्गोपचार आधारित आहार) की व्यवस्था के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

 

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Tags: #PanchParivartan #TransformationJourney #ChangeMakers #Empowerment #SocialChange #CommunityDevelopment

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