शिक्षा में संस्कृत अनिवार्य करें

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लाहौर के प्रोफेसर ख़्वाजा दिल मुहम्मद ने 1944 में भगवद गीता का उर्दू में पद्यानुवाद किया था। अभी भी मेरे कई परिचित मुसलमान मित्र विभिन्न विश्वविद्यालयों में संस्कृत के आचार्य हैं। इसीलिए मेरा निवेदन है कि संस्कृत को किसी मजहब या जाति की बपौती न बनाएं। जरुरी यह है कि भारत के बच्चों को संस्कृत, उनकी उनकी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी 11 वीं कक्षा तक अवश्य पढ़ाई जाए और फिर अगले तीन साल बी.ए. में उन्हें छूट हो कि वे अंग्रेजी या अन्य कोई विदेशी भाषा पढ़ें।

आजमगढ़ और रामपुर में भाजपा की जीत के संदेश

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आजमगढ़ और रामपुर में भाजपा की जीत को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और सुशासन पर जनता के अगाध विश्वास  के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। आजमगढ़ लोकसभा में भाजपा की विजय इसलिए ऐतिहासिक मानी जा रही  है क्योंकि 2014 और 2019 की मोदी लहर में भी सपा यह सीट निकालने में कामयाब रही थी लेकिन अब 2022 में भाजपा प्रत्याशी दिनेशलाल यादव “निरहुआ” ने सपा उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को 8679 वोटों से हराकर यह सीट जीत ली ।

गर्भपात कराना किसका अधिकार, क़ानूनी रोक कितनी उचित!

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_अमेरिका में महिलाओं के लिए गर्भपात कानून बदलने का फैसला किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पचास साल पुराने गर्भपात कानून पर रोक लगा दी। लेकिन, अमेरिका में गर्भपात पर रोक लगा देने से क्या महिलाएं गर्भपात कराना बंद कर देगी! वास्तव में बच्चे को जन्म देने या नहीं देने का अधिकार महिला को होना चाहिए। दुनिया में 67 देशों में गर्भपात आसान है। बिना कारण बताए यहां गर्भपात कराया जा सकता है। जबकि, 26 देशों में गर्भपात पर रोक है। फिर चाहे माँ या बच्चे की जान पर ही बात क्यों न आ जाए। जबकि, भारत में गर्भपात को लेकर कोई सख़्त नियम नहीं! सुरक्षित गर्भपात कराना यहां कानूनी अधिकार है।_ 

भारत में भौमजल की दशा और दिशा : एक भूवैज्ञानिक विश्लेषण

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भारत एक विकासशील देश है।प्रत्येक क्षेत्र में उसकी प्रगति हो रही है और उसकी जनसंख्या में भी वृद्धि हो रही है।अतः वर्ष 2025 तक 1093 बिलियन क्यूबिक मीटर्स जल की आवश्यकता होगी। इसके लिए वर्षाजल को बहकर समुद्र में जाने से रोकने के लिए वर्षाजल संग्रहण (रेन हार्वेस्टिंग) ही शहरों…

सार्वभौमिक उपासना

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संसार भर के प्राणी "उसकी संतान-"हमारे भाई" हैं । यदि हमने "माँ" की उपासना की होती तो छल-कपट, ईर्ष्या-द्वेष, दंभ, हिंसा, पाशविकता, युद्ध को प्रश्रय न देते । "स्वर्ग और है भी क्या ? जहाँ ये बुराइयाँ न हों, वहीं तो स्वर्ग है ।" "माँ" की उपासना में स्वर्गीय आनंद की अनुभूति होती है ।"

भारत ने विश्व प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में लगाई लम्बी छलांग

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भारत न केवल आर्थिक विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित किए हुए है बल्कि इस आर्थिक विकास का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक भी पहुंचे इस ओर भी पूरा पूरा ध्यान दिया जा रहा है ताकि देश की कुल उत्पादकता में वृद्धि दर्ज करते हुए देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके और देश के नागरिकों के बीच अंततः खुशहाली लाई जा सके।

मिशनरीज शिक्षा और वैचारिक गुलामी

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धर्माचार्यों को राजनीति और संपत्ति पर कब्जे के केस लड़ने से ही फुर्सत नहीं, समाज पूरी तरह से गर्त में गिरे तो उनको क्या? उनकी गद्दियों की पूजा करो और चढ़ावा चढ़ाओ तो ही 2-4 मिनट का समय मिल सकता है वो भी साथ में नेता या अधिकारी की डिग्री होनी चाहिए ...!!

वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई

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उनके साथ भी वही सलूक हो रहा था , बस खिलाड़ी बदल गए हैं । इस बार भी मुम्बई का ठाकरे और ठाणे का ठाकरे हैं आमने सामने है , वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई फिर से दोहराई जाएगी, या कर्मो का हिसाब बरोबर होगा

भारत की भावी राष्ट्रपति आदिवासी महिला – द्रौपदी मुर्मू

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केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन की सरकार ने झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाकर सामाजिक समरसता व नारी सशक्तीकरण का अदभुत संदेश दिया है जिससे आदिवासी समाज व महिलाओं  के बीच प्रसन्नता  की लहर दौड़ गई है।

तीस्ता सीतलवाड़ का ‘खान’ दान

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आइये अब आपको थोड़ा सा तीस्ता सीतलवाड़ के खानदान के बारे में भी बता दें। तीस्ता सीतलवाड़ के परदादा का नाम "सर चिमन सीतलवाड़" था, नाम के साथ "सर" लगा है इसी से आप समझ सकते हैं कि- ये अंग्रेजों के बहुत ख़ास थे। जब जालियांबाला बाग़ के कारण देश की जनता बहुत उग्र थी तब अंग्रेजों ने उस  काण्ड की जांच करने के लिए "हंटर कमेटी" बनाई थी।

रामभक्तों की आत्मा प्रसन्न हुई…

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नरेन्द्र मोदी के खिलाफ जहरीले झूठ का जबरदस्त प्रचार अभियान चला कर तीस्ता केवल उनको जेल भिजवाना नहीं चाहती थी। उसके उस अभियान का एक अन्य मुख्य उद्देश्य गोधरा में 59 रामभक्तों को जिंदा जला कर मौत के घाट उतारने वाले, आसमानी किताब वाले कांग्रेसी गुंडों को बचाना भी था।

कौन है तीस्ता जावेद सीतलवाड़ ?

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अंग्रेजो के नौकर जस्टिस "आगा हुसैन" ने भगत सिंह के पूरे केस की सुनवाई की थी और सजा लिखी थी।सजा सुनाने के समय छुट्टी पर चले गए थे और सजा सुनाने का काम अंग्रेजों के एक और नौकर जस्टिस शादीलाल ने किया था।आगा हुसैन और शादीलाल दोनों कांग्रेस से जुड़े हुए थे।

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