घुसपैठियों से मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने के लिए मोदी सरकार ने बहुआयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें कड़े कानून, सीमा सुरक्षा और नागरिकता नीतियां शामिल हैं। हाई-पावर डेमोग्राफी मिशन, 3-डी नीति, ओपरेशन डेल्टा हंट जैसे अभियान-नीतियां और कार्रवाइयां राष्ट्र की सुरक्षा, सम्प्रभुता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करेगा।
भारत में अवैध घुसपैठियों की कुल संख्या अनुमानतः डेढ़ से 2 करोड़ के बीच है। घुसपैठ के विरुद्ध भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा ’3डी नीति’ का प्रहार जारी है। 3डी अर्थात् ’डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ नीति का मुख्य उद्देश्य अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें देश से बाहर निकालना है। हालांकि इतना ही काफी नहीं है, घुसपैठ की समस्या के स्थाई समाधान के लिए एक बहु-आयामी और दीर्घकालिक राष्ट्रीय रणनीति की आवश्यकता है, जिसमें सुरक्षा, कूटनीति, कानून और तकनीक का एक ठोस मिश्रण हो।
पश्चिम बंगाल में मुख्य मंत्री शुभेंदु अधिकारी के आधिकारिक वक्तव्य के अनुसार मई 2026 से जून 2026 के प्रारम्भ के बीच मात्र एक महीने से थोड़े अधिक समय में 4,800 से अधिक अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित कर सफलतापूर्वक डिपोर्ट किया जा चुका है। वर्तमान में 836 अतिरिक्त संदिग्ध घुसपैठिए राज्य के 11 सक्रिय होल्डिंग सेंटर्स में बंद हैं, जिनकी राष्ट्रीयता का सत्यापन कर उन्हें जल्द वापस भेजने की तैयारी है। दिल्ली पुलिस के आधिकारिक डेटा के अनुसार अकेले वर्ष 2025 में दिल्ली से 2,200 से अधिक अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को पहचान कर डिपोर्ट किया गया, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे रह रहे थे।
जून 2025 से फरवरी 2026 के बीच के 9 महीनों के विशेष अभियान में दिल्ली पुलिस ने 1,589 बांग्लादेशी प्रवासियों और 55 रोहिंग्या को हिरासत में लेकर वापस उनके देश भेजा है। गुजरात पुलिस के हालिया राज्यव्यापी अभियान ’ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के अंतर्गत शुरुआती दिनों में ही 501 अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर हिरासत में लिया गया है, जिन्हें डिपोर्ट करने के लिए बायोमेट्रिक स्क्रीनिंग और बांग्लादेश उच्चायोग के साथ सत्यापन की कानूनी प्रक्रिया चल रही है। यही नहीं, पुलिस नकली आधार, पैन, वोटर आईडी बनाने वाले गिरोहों और उनके शरणदाता मकान मालिकों/नियोक्ताओं पर भारतीय न्याय संहिता और अन्य विशेष कानूनों के अंतर्गत बहुत ही सख्त कार्रवाई कर रही है।
तीन-स्तरीय ग्रिडः सीमा पर 3डी नीति को जमीनी स्तर पर मजबूती देने के लिए भारतीय सेना और सीमा सुरक्षा बल द्वारा तकनीकी मोर्चे पर एक और तीन-स्तरीय ग्रिड चलाया जा रहा है- प्रथम स्तर (तकनीकी निगरानी): ड्रोन, रडार, थर्मल इमेजिंग कैमरे और लेजर फेंसिंग की सहायता से सीमाओं की 24 घंटे निगरानी। द्वितीय स्तर (भौतिक बाधाएं): सीमाओं पर कटीले तारों (फेंसिंग) का निर्माण तेज करना और संवेदनशील रास्तों को पूरी तरह ब्लॉक करना। तृतीय स्तर (सैनिक और रोबोटिक पेट्रोलिंग): सैनिकों द्वारा आक्रामक गश्त और रोबोटिक ग्रिड्स की तैनाती, ताकि घुसपैठ के प्रयासों को शून्य किया जा सके।
‘जल्दी-जल्दी भागो’ का अल्टीमेटमः मुख्य मंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या प्रवासियों को राज्य छोड़ने का अल्टीमेटम दिया। उन्होंने दो टूक कहा, जल्दी-जल्दी भागो नहीं तो जो करना है सरकार करेगी। मुख्य मंत्री ने पिछली तुष्टिकरण की राजनीति और वोटबैंक नीति पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों को महीनों या वर्षों तक जेलों में रखकर सरकारी खर्च पर राशन (मछली, चावल, दाल) और दवाइयां खिलाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस अल्टीमेटम और प्रशासनिक सख्ती के कारण उत्तर 24 परगना के हाकिमपुर चेकपोस्ट और अन्य रास्तों से रोजाना औसतन 5,000 से 10,000 संदिग्ध घुसपैठिए स्वयं ही बोरिया-बिस्तर समेटकर वापस बांग्लादेश भाग रहे हैं।

’ऑपरेशन डेल्टा हंट’ और ’ऑपरेशन चंडोला: ’ऑपरेशन डेल्टा हंट’ गुजरात पुलिस द्वारा राज्य में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने के लिए चलाया गया एक बड़ा राज्यव्यापी खुफिया-आधारित सुरक्षा अभियान है। जून 2026 से शुरू यह ऑपरेशन सीधे तौर पर 3डी नीति से जुड़ा है, जिसमें पहले चरण (डिटेक्ट) के अंतर्गत अवैध प्रवासियों को पकड़ा गया है ताकि उनके नकली दस्तावेज निरस्त कर उन्हें निर्वासित किया जा सके। ऑपरेशन चंडोला वर्तमान में चल रहे ’ऑपरेशन डेल्टा हंट’ का मुख्य आधार स्तम्भ है। अहमदाबाद के चंडोला तालाब और उसके आसपास के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में अवैध बांग्लादेशी बस्तियों के विरुद्ध पुलिस और अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन ने एक संयुक्त मेगा ऑपरेशन चलाया था। इस ऑपरेशन के दौरान लगभग 2,000 अवैध रूप से बने ढांचों और झुग्गियों को बुलडोजर की सहायता से ध्वस्त किया गया था। पुलिस ने सुरक्षा ग्रिड तैनात कर सैकड़ों संदिग्धों को हिरासत में लिया था। इस ऑपरेशन के डर से जो घुसपैठिए अहमदाबाद से भागकर सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे शहरों में छिप गए थे, उन्हें ही अब ’ऑपरेशन डेल्टा हंट’ के अंतर्गत दोबारा खोजा जा रहा है।
इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025: पहलगाम आतंकी हमले के बाद 1 सितम्बर 2025 से पूरे देश में प्रभावी इस कानून का मुख्य उद्देश्य भारत के दशकों पुराने, बिखरे हुए और औपनिवेशिक काल के चार कानूनों क्रमशः द फॉरेनर्स एक्ट, 1946; द पॉसपोर्ट (एंट्री इन टू इंडिया) एक्ट, 1920; द रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स एक्ट, 1939; द इमीग्रिशन (कैरियर्स लायबिल्टी) एक्ट, 2000 को निरस्त करके एकल, आधुनिक और बेहद सख्त कानूनी ढांचा तैयार करना है। यह कानून पश्चिम बंगाल, गुजरात और अन्य राज्यों में लागू की जा रही 3डी नीति को अचूक और निर्बाध कानूनी शक्ति प्रदान करता है।
वास्तव में घुसपैठ की समस्या के स्थाई समाधान के लिए सुरक्षा, कूटनीति, कानून और तकनीक के ठोस मिश्रण वाली दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता है। इसमें अभेद्य सीमा और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रबंधन, अभेद्य आंतरिक सुरक्षा और डिजिटल ट्रैकिंग व राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर का राष्ट्रीय क्रियान्वयन, आर्थिक और सामाजिक प्रोत्साहन को समाप्त करना अर्थात् ’नो वर्क, नो राइट्स’ मॉडल, कूटनीतिक दबाव और द्विपक्षीय अनिवार्य वापसी समझौता, सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास और स्थानीय भागीदारी को मजबूत करना शामिल है। यही नहीं, सीमावर्ती गांवों के स्थानीय युवाओं को सुरक्षा ग्रिड (ग्राम सुरक्षा समितियों) में शामिल करने और उन्हें घुसपैठियों की सूचना तुरंत देने के लिए जागरूक व पुरस्कृत करने पर भी ध्यान देना होगा।
रामेंद्र सिन्हा

