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रायपुर में डॉ. मोहन जी भागवत का संबोधन

रायपुर में डॉ. मोहन जी भागवत का संबोधन

रायपुर के हिन्दू सम्मेलन मेंडॉ. मोहन जी भागवत का संबोधन

by हिंदी विवेक
in संघ
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सघ के 100 वर्ष पूरे होने पर देश में हर जगह हिंदू सम्मेलन हो रहा है। मंडल स्तर पर हिंदू एकत्रित होकर आने वाले हैं। ये बात संघ के 100 वर्ष होने पर है, लेकिन संघ के 100 साल होने पर कोई उत्सव नहीं करना है। संघ का कार्य नागपुर के मैदान की एक शाखा में शुरू हुआ औरवो अबसर्वदूर देश में चल रहा है। संघ के स्वयंसेवक उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम जहां भारत भूमि है, वहां संघ के स्वयंसेवक हैं और संघ का काम चल रहा है। डॉक्टर साहब (डॉ. हेडगेवार) ने जो कार्य शुरू किया, वो कार्य आगे बढ़ रहा है। हिंदू राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति के लिए काम चल रहा है। 100 साल पूरे होने पर स्वयंसेवकों ने तय किया कि समाज के बीच जाएंगे।

समाज के संकटों की चर्चा चलती है।  संकटों के हिसाब-किताब तक ठीक है, लेकिन संकटों के उपायों की समाज में अधिक चर्चा चलनी चाहिए। हमारे सामने जितने संकट हैं, उनके उपाय हमारे पास हैं। हम ठीक रहें तो कोई संकट हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता, ये ताकत हिंदू समाज में है।

समाज में समस्याएं हैं और इनके रामबाण उपाय अपने पास हैं। अपना देश प्राचीन है, देश के पास श्रेष्ठ ज्ञान और तत्वचिंतन है। संतों के संग से पाप धुल जाते हैं।‌ संतों के विचार सुनकर उनको आत्मसात करना चाहिए। हमें सत्संग या विचारों में केवल सुनना नहीं है, उन्हें आत्मसात कर समाज में ले जाना है।

पांच बातें हम सब कर सकते हैं —

सामाजिक समरसता :

अपने आंखों से अलगाव और भेद को निकालो। सबको अपना मानकर व्यवहार करो। आप जहां रहते हैं, वहां के हिंदू समाज के हर वर्ग में अपने मित्र हों, हर वर्ग के मित्र हों। मित्र परिवारों में आना जाना चाहिए। जात-पात, भाषा, धन नहीं देखना, सब अपने हैं। सब भारत वासी अपने हैं। केवल भाषण नहीं दूंगा, ‌सबको अपना बनाऊंगा। ये सामाजिक समरसता है। ये मन का भाव है। हम अलग-अलग भले दिखते हैं, लेकिन एक हैं। घट-घट में राम हैं, सब अपने हैं‌। अपने-अपने क्षेत्र में मठ- मंदिर, कुआं-तालाब, श्मशान सभी हिंदुओं के लिएएक हों।

Illustration of group of indian people in vector style for isolated design  use | Premium AI-generated vector

कुटुम्ब प्रबोधन : 

अपने घर में सप्ताह में एक दिन सब लोग एक साथ रहें। श्रद्धानुसार भजन करें। सभी लोग घर में बना भोजन करें। पूर्वजों की परंपरा पर चर्चा करें। अगर कुछ विपरीत हो तो उसे निकालें। देश, हिंदू धर्म और समाज को लेकर चर्चा होनी चाहिए। ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई, परपीड़ा सम नहीं अधमाई’ ये धर्म है। हमारे देश में इसके आदर्श चरित्र हैं जिन्होंने धर्म के लिए जीकर दिखाया, ऐसे आदर्श लाना। घर परिवार में चर्चा करना, सहमति के आधार पर परिवार में चर्चा करना है।

मैं और मेरा परिवार देश के कारण है। देश और समाज के लिए हम कितना समय देते हैं। देश और समाज के लिए अपनी आय-व्यय का कितना हिस्सा समाज के लिए देते हैं। घर में ये चर्चा करनी है। हर सप्ताह घर में कुटुम्ब प्रबोधन हो, मंगल संवाद हो।

Indian family celebrating diwali festival or birthday by exchanging gifts,  3 generations of indian family and gifts and sweets, happiness concept  photo – Young girl Image on Unsplash

पर्यावरण संरक्षण संवर्धन : 

ग्लोबल वार्मिंग हो रहा है।  ऋतु चक्र बदल रहा है। जंगल कम हो गए तो पानी भी कम हो रहा है। अपने घर से पानी बचाने का प्रयास करना है। पानी बचाओ, पानी का नल खुलान छोड़ें। वाटर हार्वेस्टिंग करो। जलस्रोतों का संरक्षण करना चाहिए। पुराने जलस्रोतों को शुरू करने के प्रयास करें।सिंगल यूज्ड प्लास्टिक का उपयोग न करें। पेड़ लगाएं, घर आंगन में हरियाली के उपाय करें। ये सब बिना पैसे के काम है, ये सब हम करेंगे।

Tree planting efforts paying off in India

स्व का भाव :

अपने घर की चौखट के अंदर घर की भाषा बोलनी चाहिए। मातृभाषा बोलनी चाहिए। सबको समझ आने वाली हम सबको एक व्यवहार की भाषा सीखनी हैं। जिस प्रांत में रहते हैं वहां की भाषा सीखें। भारत की सभी भाषाएं राष्ट्र भाषाएं हैं। उनका मूल एक है। शब्द अलग-अलग है, सभी के मूल में एकता है।  स्व-भाषा के लिए आग्रह रखना है। अपनी वेशभूषा अपनाएं। भाषा-भूषा, भजन, भवन, भोजन और भ्रमण अपने घर के अंदर अपनी होनी चाहिए। अपने देश में बना सामान खरीदना। बाकी तभी दूसरे का लाएंगे जब अपने समाज के बंधुओं को उससे रोजगार मिले। स्वदेशी और स्वालंबन अपनाए। सबसे पहले अपने देश में जो बनता है उसे ही खरीदें।  विदेश की चीज तभी खरीदें जब वो अपने यहां नहीं मिलती है। खरीदना भी अपनी शर्तों के मुताबिक, इसे स्वबोध से जीना कहते हैं।

मातृशक्ति में स्व का भाव जागा, स्वयं को किया सिद्ध - Swayam Siddha  Empowering Women in Gwalior Through Self Reliance

नागरिक कर्त्तव्य :

देश के संविधान, नियम- कानून का पालन करना। संविधान को अपने देश के लोगों ने बनाया है।अपने देश के संविधान में अपने देश का मानस प्रकट हुआ है। प्रस्तावना, मूल कर्तव्य, मौलिक अधिकार,  नीति निर्देशक तत्व को पढ़ना चाहिए। धर्म का आचरण कैसा हो, ये चारों तत्वों में दिखता है। समय पर टैक्स भरें, ट्रैफिक नियमों का पालन करें। नियमों का पालन करें। नागरिक जीवन के सभी नियमों का पालन करना। स्वतंत्र देश में ये देशभक्ति मानी जाती है। अनुशासन का पालन करना चाहिए।

श्रेष्ठता के नियमों का पालन करना चाहिए। घर में बड़ों का पैर छूकर नमस्कार करना चाहिए, ये देश की परंपरा में है। बड़े-बड़े लोग उस विनम्रता को याद रखते हैं। झुककर नमस्कार करने में संकोच नहीं करने का आदर्श है। घर में जो कुछ है वो समाज के जरुरतमंद के लिए भी हो। ये सब अपनाना है। इससे भाईचारा, मेल-जोल और संकट से मुकाबला करने वाली विजयशालिनी शक्ति प्रकट होगी।

घर-कुटुंब से समाज का कल्याण होगा। भारत-विश्व का कल्याण होगा। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर  समाज में जाएंगे। आचरण में उतारेंगे तो देश समृद्ध होगा। सबका कल्याण होगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

-डॉ. मोहन जी भागवत

 

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Tags: #rss #hindu #sangh #newyear #2026

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