पुणे -“समाज के प्रत्येक क्षेत्र में परिवर्तन के अनेक सफल प्रयोग व्यक्तिगत स्तर पर शुरू हैं। किंतु ये प्रयोग केवल व्यक्ति तक सीमित न रहकर समाजव्यापी होने चाहिए। ऐसा हुआ तो इन्हीं प्रयोगों के माध्यम से वास्तविक अर्थों में व्यवस्था परिवर्तन संभव होगा,” ऐसा प्रतिपादन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहसरकार्यवाह अतुल लिमये ने शनिवार को यहां किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित ‘पूजनीय श्रीगुरुजी पुरस्कार’ प्रदान समारोह में वे बोल रहे थे। इस अवसर पर प्रसिद्ध उद्योगपति डॉ. अभय फिरोदिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में अनुसंधान क्षेत्र के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार दादा लाड को तथा समाजप्रबोधन क्षेत्र के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार आचार्य श्री महंत भारतभूषणदासजी महाराज को प्रदान किया गया। शाल, सम्मानपत्र, स्मृति-चिह्न और एक लाख रुपये नकद, ऐसा पुरस्कार का स्वरूप है। समिति के अध्यक्ष डॉ. अजित मराठे ने प्रस्तावना रखी, जबकि कार्यवाह राजन गोऱ्हे ने स्वागत किया।

अतुल लिमये ने कहा, “समाज का शासन पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जिससे समाज के अपंग बनने का भय है। इस निर्भरता को कम करने के लिए समाज में परिवर्तन लाने वाले सफल प्रयोगों का अनुकरणीय प्रारूप तैयार कर आदर्श कार्यप्रणाली विकसित करना आवश्यक है। विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए यह कार्य अनिवार्य है।”
“आजकल कई लोगों के मन में हिंदुत्व के प्रति कटुता दिखाई देती है,” ऐसा मत अभय फिरोदिया ने व्यक्त किया। वे बोले, “भारत के बौद्ध, जैन, सिख और वैदिक परंपराओं का संयुक्त स्वरूप ही हिंदुत्व है। हिंदू धर्म एक जीवन पद्धति और विचारधारा है और उसे व्यवहार में लाने की प्रक्रिया ही हिंदुत्व है। जनकल्याण समिति समाज के सशक्तिकरण के लिए कार्य करने वाले लोगों को संगठित और सक्रिय करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।” उन्होंने यह भी कहा, “मूल्यों की समझ ही धर्म है। जब तक आज की पीढ़ी नैतिक मूल्यों को अपनाए रखेगी, तब तक धर्म अक्षुण्ण रहेगा।”
भारतभूषण महाराज ने कहा, “सनातन परंपरा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। समाज को वैभवशाली बनाने के लिए व्यावहारिक कार्यों के साथ-साथ आत्मिक शांति के लिए भी प्रयास आवश्यक हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल्यांकन बाहर से नहीं किया जा सकता, इसके लिए संघ में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी होना पड़ता है।”
दादा लाड ने कहा कि कपास किसानों की आत्महत्या का नहीं, बल्कि समृद्धि का फसल है। उन्होंने कहा, “विदर्भ में आत्महत्याओं को दुर्भाग्यवश कपास की खेती से जोड़ दिया गया। वास्तव में संपूर्ण विश्व को वस्त्र प्रदान करने वाले भारत की प्रमुख नगदी फसल कपास ही है। यदि कपास का उत्पादन बढ़ाना है तो बोंड का वजन बढ़ाना आवश्यक है। मैंने कपास की फसल में ‘गलफांदी’ हटाकर ‘फलफांदी’ बढ़ाने की तकनीक विकसित की। इससे एक कपास बोंड का वजन 10 ग्राम तक पहुंचा और परिणामस्वरूप प्रति एकड़ उत्पादन 4 से 5 क्विंटल से बढ़कर सीधे 15 क्विंटल तक पहुंच गया।”
चिंचवड़ के पूर्वांचल छात्रावास के विद्यार्थियों ने संपूर्ण वंदे मातरम् प्रस्तुत किया। सेवा भारती संस्था के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत के सचिव प्रदीप सबनीस ने आभार व्यक्त किया तथा प्रा. डॉ. प्रांजली देशपांडे ने कार्यक्रम का संचालन किया।
एक करोड़ का दान
जनकल्याण के कार्यों को प्रोत्साहन और सहयोग देना, ऐसा महत्वपूर्ण कार्य जनकल्याण समिति कर रही है। समाज के उत्कर्ष का यह एक बड़ा साधन है, इन शब्दों में डॉ. अभय फिरोदिया ने जनकल्याण समिति के कार्य की सराहना की और इस कार्य हेतु एक करोड़ रुपये की दान देने की घोषणा की।

