हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
कश्मीर संकल्प दिवस की सिद्धि कब और कैसे होगी?

कश्मीर संकल्प दिवस की सिद्धि कब और कैसे होगी?

by हिंदी विवेक
in अवांतर
0

 

जहाँ हुए बलिदान मुखर्जी वह कश्मीर हमारा है और सारा का सारा है।

भारतीय संसद का ‘कश्मीर संकल्प 22 फरवरी 1994’ शुभ है, सत्य है, स्तुत्य है, पर सिद्ध नहीं हो पाया है, यह दुखद है।
दो निर्विवाद सत्य हैं- पहला, कश्मीर हमारे राष्ट्र का मुकुटमणि है,
दूजा- हमारा यह मुकुटमणि वर्तमान में ग्रहण में है।

कश्मीर की वर्तमान स्थिति को लेकर हमारा समूचा भारत राष्ट्र चिंतित रहा है। इस राष्ट्रीय चिंता का ही प्रकटीकरण था 22 फरवरी 1994 को पूर्व प्रधानमंत्री की नरसिंहराव सरकार द्वारा संसद में पारित ‘कश्मीर संकल्प’। इस संकल्प में भारत का राजनीतिक पक्ष-विपक्ष, समस्त नागरिकों का मानस सम्मिलित था। यह संकल्प राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की चिंता, भावना व विचार से प्रेरित था।

जम्मू-कश्मीर संकल्प दिवस के अवसर पर: 1994 के संसदीय संकल्प की एक झलक

संसद में पारित इस प्रस्ताव में यह संकल्प किया गया था कि – “पाकिस्तान के कब्जे वाला POJK जम्मू कश्मीर और भारत का अभिन्न अंग था, है और सदैव रहेगा। पाकिस्तान ने 1947-48 के बाद से ही भारत के इस बड़े भूभाग पर कब्जा कर रखा है। इस प्रस्ताव के जरिये यह संकल्प लिया गया था कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे में लद्दाख और जम्मू कश्मीर की जो हमारी भूमि है उसे हम हर स्थिति में वापस लेंगे।

यह संकल्प दिवस POJK, POTL के साथ COTL की मुक्ति का संकल्प दिवस भी है। वस्तुतः जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कुल क्षेत्रफल लगभग 2,22,236 वर्ग किमी है। इसमें से POJK यानि पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर का क्षेत्रफल 13,297 वर्ग किमी है। POJK में जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के मीरपुर-मुजफ्फराबाद, भीम्बर, कोटली जैसे नगर सम्मिलित हैं, जो कभी हिन्दू बहुल हुआ करते थे। जबकि POTL अर्थात (पाकिस्तान अधिक्रांत क्षेत्र लद्दाख) में गिलगित और बाल्टिस्तान सम्मिलित हैं। यह क्षेत्र खनिज संपदा से लबालब है। POTL का कुल क्षेत्रफल लगभग 64817 वर्ग किमी है।

PoJK और POTL मूल रूप से जम्मू कश्मीर का ही एक भाग है, जिसकी सीमाएं पाकिस्तान के पंजाब, उत्तर-पश्चिम, अफगानिस्तान के वखान गलियारे, चीन के शिनजियांग क्षेत्र और लद्दाख के पूर्व क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान (POTL) में 1480 सोने की खदानें हैं, जिनमें से 123 में अयस्क है, जहाँ सोने की मात्रा दक्षिण अफ्रीका की विश्व प्रसिद्ध खदानों से कई गुना अधिक है।

चीन अधिक्रांत लद्दाख क्षेत्र अर्थात COTL का संभावित एरिया 37 हजार वर्ग किमी है और इसमें 5,180 किमी शक्सगाम का एरिया पाकिस्तान ने 1963 में Sino-Pak एग्रीमेंट के तहत दे दिया था। यानी चीन के कब्जे में कुल क्षेत्रफल 42,735 वर्ग किलोमीटर है। COTL में सिर्फ अक्साई चीन नहीं बल्कि ट्रांस काराकोरम ट्रैक्ट और मिंसर भी शामिल है। यहाँ से मुख्यतः कई नदियाँ निकलती हैं। जैसे गलवान नदी, चिपचैप नदी और कार्स जैसी आदि-आदि नदियाँ निकलती हैं। लेकिन इनमें कार्कस नदी सबसे बड़ी नदी है, जो कि उत्तर की ओर जाती है और इसे ब्लैक जेड रिवर कहते हैं। भारत का यह महत्वपूर्ण भाग आज चीन के नियंत्रण में है।

Resolution on PoK: जब भारतीय संसद ने पारित किया था पीओके को वापस लेने का  सर्वसम्मत प्रस्ताव | some interesting facts about Jammu and Kashmir  Resolution Day history - Hindi Oneindia

वस्तुतः 1947 में देश के विभाजन के कुछ महीनों बाद ही पाकिस्तानी सेना ने 22 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर दिया था। इस आक्रमण में पाकिस्तानी सैनिकों ने हजारों की संख्या में निर्दोष हिंदूओं (प्रमुखतः सिक्ख समुदाय) का जघन्य नरसंहार किया था और प्राचीन मंदिरों, गुरुद्वारों आदि हिंदू स्थलों का विध्वंस किया था। बाद में इन हिंदुओं के अपमान के उद्देश्य से इन कब्जाए गए धार्मिक स्थलों का अपमानजनक प्रयोग भी किया गया था।

इन घटनाओं के बाद बड़ी संख्या में हिंदू बंधु अपने कश्मीर से पलायन को विवश हो गये थे। विगत लगभग आठ दशकों से POJK स्थित हमारे ऐतिहासिक मंदिरों, गुरुद्वारों और बौद्ध मठों को पाकिस्तानी आतताइयों ने चुन-चुन कर विध्वंस करने का काम किया है। PoJK पर पाकिस्तान का 76 वर्षों से अवैध नियंत्रण है।

आज समूचे भारत राष्ट्र सहित, PoJK के विस्थापितों की यह मांग है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे में जो हमारा कश्मीर है उसे वापस लिया जाए और PoJK विस्थापितों को उनका अधिकार लौटाया जाए।
पूर्व प्रधानमंत्री पी.वी नरसिम्हा राव का कार्यकाल जम्मू-कश्मीर के लिए अनेक उतार-चढ़ाव वाला था। एक तरफ कश्मीर घाटी से हिन्दुओं का नरसंहार और निष्कासन लगातार जारी था। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में भारत के विरुद्ध आतंकवादियों का प्रशिक्षण भी हो रहा था।

उस कालखंड में पाकिस्तान के दो तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो (वर्ष 1990) एवं नवाज शरीफ (वर्ष 1991-93) ने POJK में सतत आना-जाना बढ़ा दिया था। लक्ष्य स्पष्ट था, इन क्षेत्रों में बसे मुट्ठी भर हिंदुओं का भी सफ़ाया। बेनजीर भुट्टो ने 13 मार्च, 1990 में मुज़फ्फराबाद की एक सभा में भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों का सार्वजनिक समर्थन किया। इसके बाद नवाज शरीफ ने भी पीओजेके से ‘कश्मीर बनेगा पाकिस्तान’ जैसे युद्धक नारे लगाने शुरू कर दिए।

संघ परिवार इस विषय से अत्यंत चिंतित हुआ। संघ ने तत्काल ही देश भर में इस विषय में हस्तक्षेप करने का वातावरण बनाया था। केंद्र सरकार पर दबाव भी बनाया था। प्रधानमंत्री नरसिंहराव भी इस संदर्भ में संवेदनशील थे। नरसिंहराव जी के विचार इस संदर्भ में संघ से साम्य रखते थे। स्थिति को देखते हुए ही उन्होंने इस संदर्भ में पहला कदम 22 फरवरी, 1994 को उठाया। उस दिन संसद ने PoJK पर एक संकल्प पारित किया था।

संसद में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव के संदर्भ में बलपूर्वक कहा गया कि पाकिस्तान को (अविभाजित) जम्मू-कश्मीर के कब्जे वाले इलाकों को खाली करना होगा जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्ज़ा कर रखा है।

जम्मू कश्मीर संकल्प दिवस संसद संकल्प 1994 - वीएसके तेलंगाना

लगभग एक वर्ष पश्चात् केंद्र सरकार ने POJK को लेकर दूसरा कदम उठाया था। वर्ष 1995 में पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर और उत्तरी इलाकों यानी POTL (गिलगित-बल्तिस्तान) पर विदेश मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की।

भाजपा के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न दिवंगत श्री अटल बिहारी वाजपेयी इसकी अध्यक्षता कर रहे थे। इस सर्वदलीय कमेटी में लोकसभा और राज्यसभा से 45 सदस्यों को शामिल किया गया था, जिन्होंने दोहराया कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है।

साथ ही इस समिति ने सुझाव दिया कि पीओजेके और गिलगित-बल्तिस्तान में मानवाधिकारों के हनन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष स्वर उठाए जाने चाहिए। यह दोनों अभूतपूर्व कदम थे। वस्तुतः यह कदम वर्षों पूर्व ही उठा लिए जाने चाहिए थे।
खेद का विषय है कि तीन दशक पुराना यह ‘कश्मीर संकल्प’ अब भी अधूरा है।
– प्रवीण दाताराम गुगनानी

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0