मिडिल ईस्ट के युद्ध की आग में जो लोग भारत की बर्बादी के सपने देख रहे थे और रोज़ सुबह उठकर ‘अब पेट्रोल 200 रुपये लीटर होगा’ वाली अफ़वाहों का ज़हरीला वायरस फैला रहे थे, उन्हें करारा जवाब मिल गया है। इन स्वयंभू ‘शांतिदूतों’ और ‘कांगियों’ को लग रहा था कि भारत भी बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बनकर अपनी सेना किसी की तरफ़ से लड़ने भेज दे और अपनी अर्थव्यवस्था को आग लगा ले।
पर ये ‘न्यू इंडिया’ है, यहाँ नीतियां भावनाओं से नहीं, बल्कि ‘नेशन फर्स्ट’ के ठोक बजाए हुए उसूलों से चलती हैं। जहाँ दुनिया युद्ध के डर से कांप रही है, वहाँ मोदी जी ने ‘आपदा में अवसर’ खोजकर अमेरिका को भी घुटने टेकने पर विवश कर दिया।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में तेल के जहाज़ क्या फंसे, अमेरिका को समझ आ गया कि यदि भारत को रूसी तेल खरीदने से रोकने का प्रयास किया गया, तो विश्वभर में तेल की कीमतों का ऐसा विस्फोट होगा कि संभालना कठिन हो जाएगा। इसीलिए, कल तक भारत पर रूसी क्रूड न खरीदने का दबाव बनाने वाला अमेरिका आज स्वयं भारत से कह रहा है – ‘भैया, आप रूसी तेल खरीदो और दुनिया में सप्लाई का बैलेंस बनाए रखो।’

ये मोदी सरकार की वो मास्टरस्ट्रोक कूटनीति है जिसने भारत को केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि वैश्विक ऑयल मार्केट का ‘पावर हाउस’ बना दिया है। अब हमारी ऑयल कंपनियां सस्ता रूसी क्रूड खरीदती रहेंगी, उसे रिफ़ाइन करते हुए और पूरी दुनिया को सप्लाई करके न केवल वैश्विक कीमतों को नियंत्रित करेंगी, बल्कि भारत की अंदरूनी डिमांड को पूरा करते हुए, देश के लिए भारी विदेशी मुद्रा भी बटोरेंगी।
जो मूर्ख चाहते थे कि भारत इस युद्ध में कूदकर अपनी सेना और इकॉनमी बर्बाद कर ले, उन्हें ये समझ लेना चाहिए कि भारत अब किसी के थोपे हुए एजेंडे पर नहीं चलता। हम अपनी सेना को किसी दूसरे की ‘प्रॉक्सी वॉर’ में झोंकने के बजाय अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सुदृढ़ता पर ध्यान दे रहे हैं। ये उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है जो हर आपदा में सिर्फ़ भारत की हार ढूंढते हैं।
मोदी जी की कार्यकुशलता ने दिखा दिया है कि जब नेतृत्व राष्ट्र के प्रति दृढ़ संकल्पित और शक्तिशाली हो, तो दुनिया की महाशक्तियां भी आपके हितों के सामने झुकती हैं। भारत न केवल सुरक्षित रहेगा, बल्कि इस वैश्विक संकट के दौर में और भी शक्तिशाली बनकर उभरेगा।
अफ़वाहबाज़ों की ‘मरोड़’ जारी रहे, हम तो आत्मनिर्भर भारत का परचम फहराते रहेंगे।
जय हिंद जय भारत।
– हरेन्द्र त्यागी

