पिछले कुछ वर्षों में तकनीक के कारण क्रिकेट में बड़ी क्रांति आई है। पहले अंपायर का फैसला अंतिम माना जाता था, लेकिन अब निर्णय प्रक्रिया में सटीकता लाने के लिए विभिन्न तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाता है। इनमें विशेष रूप से DRS (Decision Review System) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़ा योगदान है। इससे क्रिकेट को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने में मदद मिली है।
DRS प्रणाली के कारण बल्लेबाज या गेंदबाज अंपायर के फैसले पर आपत्ति जताकर तीसरे अंपायर से पुनर्विचार की मांग कर सकते हैं। इस प्रक्रिया में हॉक-आई, अल्ट्रा-एज (स्निकोमीटर) और बॉल ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का उपयोग किया जाता है। हॉक-आई गेंद की दिशा और वह स्टंप्स पर लगती या नहीं, इसका सटीक अनुमान देता है। अल्ट्रा-एज की मदद से यह स्पष्ट होता है कि गेंद बल्ले से लगी है या नहीं। इन सभी तकनीकों के कारण मानवीय गलतियां काफी हद तक कम हुई हैं।
तकनीक का प्रभाव केवल निर्णय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह खेल की तैयारी और रणनीति में भी दिखाई देता है। यहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। AI की मदद से खिलाड़ियों के प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है। किस बल्लेबाज को किस प्रकार की गेंदों पर परेशानी होती है, कौन सा गेंदबाज किस परिस्थिति में अधिक प्रभावी होता है—ऐसी कई बातें डेटा विश्लेषण से सामने आती हैं। इससे टीम प्रबंधन को आगे की रणनीति बनाने में मदद मिलती है।\

AI आधारित तकनीक के कारण कोच और खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान भी बड़ी सहायता मिलती है। वीडियो विश्लेषण, मोशन ट्रैकिंग और प्रदर्शन डेटा की मदद से खिलाड़ी अपनी गलतियों को पहचानकर सुधार कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, बल्लेबाज के शॉट खेलते समय बैट का एंगल, पैरों की मूवमेंट या गेंदबाज की गेंदबाजी एक्शन का बारीकी से अध्ययन किया जाता है। इससे खिलाड़ियों के कौशल में लगातार सुधार हो रहा है।
तकनीक के कारण दर्शकों का अनुभव भी अधिक समृद्ध हुआ है। लाइव मैच के दौरान विभिन्न ग्राफिक्स, गेंद की गति, पिच मैप, विन प्रेडिक्शन जैसी जानकारी दिखाई जाती है। इससे दर्शकों को खेल बेहतर तरीके से समझ में आता है और उनकी उत्सुकता और बढ़ जाती है। विशेष रूप से AI आधारित विन प्रेडिक्शन से मैच का रुख कैसे बदल सकता है, इसका अंदाजा लगाना और भी रोचक हो गया है।
हालांकि, तकनीक के बढ़ते उपयोग से कुछ सवाल भी सामने आए हैं। कुछ पारंपरिक क्रिकेट प्रेमियों का मानना है कि तकनीक के कारण खेल का मानवीय पहलू कम हो रहा है। इसके अलावा DRS के फैसलों में ‘अंपायर कॉल’ जैसे नियमों पर भी चर्चा होती रहती है। फिर भी, तकनीक का सही उपयोग खेल को अधिक निष्पक्ष और संतुलित बना सकता है।
कुल मिलाकर, DRS और AI जैसी तकनीकों के कारण क्रिकेट अधिक आधुनिक और सटीक बन गया है। इन बदलावों से खेल की गुणवत्ता में वृद्धि हुई है और खिलाड़ियों तथा दर्शकों दोनों को इसका लाभ मिला है। भविष्य में भी तकनीक का उपयोग बढ़ता रहेगा और क्रिकेट और अधिक तेज, स्मार्ट और आकर्षक बनेगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।
-सूर्यकांत आयरे

