हिंदी विवेक
  • Login
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
No Result
View All Result
हिंदी विवेक
No Result
View All Result
प्रशासनिक विफलता है ड्रग्स का कारोबार

प्रशासनिक विफलता है ड्रग्स का कारोबार

by हिंदी विवेक
in अंक, अप्रैल 2026
0
यदि हम ड्रग्स के कारोबार को अनदेखा करते रहे तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगा और देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। नशे की बढ़ती समस्या केवल एक व्यक्तिगत कमजोरी नहीं है बल्कि यह सामाजिक और राष्ट्रीय चुनौती है। दुःख इस बात का है कि, इतनी गम्भीर समस्या की ओर प्रशासन का अपेक्षित ध्यान नहीं है।

आज के समय में नशे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। भारत जैसे युवा देश में जहां जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है, वहां युवाओं का नशे की ओर बढ़ना एक गम्भीर और चिंताजनक संकेत है। ड्रग्स और अन्य नशीले पदार्थ युवाओं तक बहुत सुगमता से पहुंच रहे हैं। शहरों से लेकर गांवों तक नशे का जाल फैलता जा रहा है। पहले नशा मेट्रो के सीमित क्षेत्रों तक सीमित माना जाता था, पर अब यह हर वर्ग के युवाओं तक पहुंच चुका है। स्कूल और कॉलेज के छात्र भी नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं। अब सामान्य रूप से ड्रग्स इतनी आसानी से मिल जाती हैं जैसे कोई सामान्य वस्तु हो। यह स्थिति देश के भविष्य के लिए बहुत घातक संकेत देती है। ड्रग्स के कारोबार करने वाले एक वृहद अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के अंतर्गत देश में कार्य कर रहे हैं। इनकी कमाई का पैसा भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकवादियों की फंडिंग में लगाते हैं। उनका उद्देश्य स्पष्ट है- भारत के युवाओं को नशे के चंगुल में फंसाओ, उनसे पैसे कमाओ और उसको आतंकवाद को पल्लवित-पोषित करने में लगाओ।

प्रशासनिक कार्यालयों के पास भी उपलब्ध है ड्रग्स
पुलिस और प्रशासनिक कार्यालयों के आसपास खुलेआम ड्रग्स और नशे का बिकना चिंताजनक है। नशे का कारोबार अब छिपा हुआ नहीं रहा, यह खुलेआम हो रहा है। कई बार प्रशासनिक तंत्र के आसपास फल-फूल रहा है। जब पुलिस थानों या सरकारी दफ्तरों के आसपास नशीले पदार्थ बिकते हैं तो आम जनता का विश्वास व्यवस्था से उठने लगता है। लोग यह सोचने पर मजबूर हो जाते हैं कि यदि कानून के रखवाले ही इस समस्या को रोकने में असमर्थ या उदासीन हैं तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए?

यह परिदृश्य केवल कानून-व्यवस्था एवं प्रशासनिक विफलता नहीं है। यह समाज के नैतिक और संरचनात्मक पतन की ओर भी संकेत करता है। नशे का यह जाल केवल पुरुष नहीं बल्कि युवतियों को भी अपनी गिरफ्त में ले रहा है। जो युवक-युवतियां देश का भविष्य हैं, वे नशे के कारण अपनी ऊर्जा, क्षमता और जीवन की दिशा खोते जा रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई, करियर और परिवार की जिम्मेदारियों से दूर होकर वे एक ऐसे अंधेरे रास्ते पर चल पड़ते हैं, जहां से वापस लौटना बेहद कठिन हो जाता है। यह केवल व्यक्तिगत क्षति नहीं है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर मानव संसाधन की बर्बादी भी है।

नशे के मूल कारण?
नशे के पीछे कई कारण हैं। पहला कारण है बेरोजगारी और निराशा। जब युवाओं को रोजगार नहीं मिलता तो वे तनाव और हताशा में गलत रास्तों की ओर मुड़ जाते हैं। दूसरा कारण है सामाजिक और पारिवारिक नियंत्रण का कमजोर होना। आधुनिक जीवनशैली में परिवारों के बीच संवाद कम होता जा रहा है, जिससे युवा गलत संगत में फंस जाते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण है नशे के कारोबार में शामिल संगठित गिरोह, जो मुनाफे के लिए युवाओं को निशाना बनाते हैं। इसके अलावा कानून के क्रियान्वयन में भी गम्भीर खामियां हैं। कई बार भ्रष्टाचार, राजनीतिक संरक्षण या प्रशासनिक उदासीनता के कारण नशे का व्यापार फलता-फूलता रहता है। छापेमारी और गिरफ्तारी के समाचार तो आते हैं, किंतु यह समस्या जड़ से समाप्त नहीं हो पाती। यह दर्शाता है कि केवल सतही कार्रवाई से समस्या का समाधान सम्भव नहीं है।

भयावह हैं नशे के आंकड़े
भारत में लगभग 10 करोड़ लोग किसी न किसी नशे का सेवन करते हैं। 16 करोड़ लोग (14.6%) शराब का सेवन करते हैं। इनमें से लगभग 5.2% लोग शराब पर निर्भर हैं। 3.1 करोड़ लोग गांजा का उपयोग करते हैं, जिनमें 72 लाख लोगों को इससे गम्भीर समस्या है। 2.06% भारतीय जनसंख्या ओपिओइड (जैसे हेरोइन, अफीम) का सेवन करती है। 1.18 करोड़ लोग नींद की दवाओं (sedatives) का गैर-चिकित्सीय उपयोग करते हैं। लगभग 8.5 लाख लोग इंजेक्शन से ड्रग्स लेते हैं और लगभग 60 लाख लोगों को इलाज की आवश्यकता है।

युवाओं के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। 40 लाख बच्चे (10-17 वर्ष) ओपिओइड का सेवन करते पाए गए। लगभग 20 लाख बच्चे गांजा का सेवन करते हैं। 1.7% बच्चे इनहेलेंट (सूंघने वाले नशे) का उपयोग करते हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि 32.8% युवाओं ने किसी न किसी नशे का प्रयोग किया और 75% ने वयस्क होने से पहले शुरू किया। करीब 18 लाख बच्चों को सहायता की आवश्यकता है। अनुमान है कि 2-3% भारतीय जनसंख्या ड्रग्स की लत से ग्रस्त है। इनमें से 80-90% लोगों को सही इलाज नहीं मिल पाता।

बहुआयामी दृष्टिकोण से नशामुक्ति सम्भव
नशे से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। पहले, कानून-व्यवस्था को सख्त और प्रभावी बनाना होगा। नशे के कारोबार में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर न हो। पुलिस और प्रशासन की जवाबदेही तय होनी चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां नशा खुलेआम बिक रहा है।

दूसरा, समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। परिवारों को अपने बच्चों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए, उनके व्यवहार में बदलाव पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें सही मार्गदर्शन देना चाहिए। स्कूलों और कॉलेजों में नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने चाहिए ताकि युवा इसके खतरों को समझ सकें।

तीसरा, युवाओं के लिए सकारात्मक विकल्प उपलब्ध कराना आवश्यक है। खेल, कला, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाकर उन्हें रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखा जा सकता है। जब युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा दिखाने के सही मंच मिलते हैं तो वे नशे जैसी बुरी आदतों से दूर रहते हैं।

चौथा, पुनर्वास की व्यवस्था को मजबूत करना होगा। जो युवा पहले से नशे की गिरफ्त में हैं, उन्हें अपराधी के रूप में नहीं बल्कि पीड़ित के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके लिए प्रभावी नशामुक्ति केंद्र, काउंसलिंग और सामाजिक पुनर्वास की सुविधां उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि वे सामान्य जीवन में वापस लौट सकें।

समाधान में मीडिया की भूमिका
मीडिया की भूमिका भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। उसे केवल सनसनी फैलाने के बजाए इस मुद्दे पर गम्भीर चर्चा को बढ़ावा देना चाहिए और समाज को जागरूक करना चाहिए। सफल पुनर्वास की कहानियों को सामने लाकर यह संदेश देना चाहिए कि नशे से बाहर निकलना सम्भव है। हमें यह समझना होगा कि नशे की समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं से जुड़ा हुआ एक जटिल संकट है।

-अमित त्यागी

Share this:

  • Share on X (Opens in new window) X
  • Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
  • Share on LinkedIn (Opens in new window) LinkedIn
  • Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
  • Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp

हिंदी विवेक

Next Post
रेवड़ी बांटते कर्जदार राज्य

रेवड़ी बांटते कर्जदार राज्य

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हिंदी विवेक पंजीयन : यहां आप हिंदी विवेक पत्रिका का पंजीयन शुल्क ऑनलाइन अदा कर सकते हैं..

Facebook Youtube Instagram

समाचार

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लोकसभा चुनाव

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

लाइफ स्टाइल

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

ज्योतिष

  • मुख्य खबरे
  • मुख्य खबरे
  • राष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • क्राइम
  • क्राइम

Copyright 2024, hindivivek.com

Facebook X-twitter Instagram Youtube Whatsapp
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वाक
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Disclaimer
  • Shipping Policy
  • Refund and Cancellation Policy

copyright @ hindivivek.org by Hindustan Prakashan Sanstha

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • परिचय
  • संपादकीय
  • पूर्वांक
  • ग्रंथ
  • पुस्तक
  • संघ
  • देश-विदेश
  • पर्यावरण
  • संपर्क
  • पंजीकरण

© 2024, Vivek Samuh - All Rights Reserved

0