राष्ट्र सेविका समिति की पूर्व अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका रुक्मिणी अक्का जी का निधन राष्ट्र सेविका समिति और पूरे राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति है।
अक्का जी ने सह-कार्यवाहिका के रूप में दशकों तक मातृशक्ति को संगठित किया। राष्ट्रभक्ति, कुटुम्ब प्रबोधन और नारी सशक्तिकरण के लिए उनका तपस्वी जीवन हम सबके लिए प्रेरणा है। घर-घर जाकर बहनों को जोड़ना, संस्कार देना और राष्ट्रकार्य के लिए खड़ा करना- यही उनकी साधना थी।
वंदनीय लक्ष्मीबाई केलकर मौसी जी द्वारा 1936 में बोया गया बीज, रुक्मिणी अक्का जी जैसी तपस्वी सेविकाओं के त्याग से ही आज विशाल वटवृक्ष बना है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पू. सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी रुक्मिणी अक्का के देहावसान पर गहरा शोक व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में उन्होंने कहा कि रुक्मिणी अक्का के जाने से भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण हो गया है।

दोनों शीर्ष संघ पदाधिकारियों ने कहा कि वृद्धावस्था में शरीर का शांत होना स्वाभाविक है, लेकिन दशकों के आत्मीय परिचय और स्नेह के कारण मन को असहनीय वेदना हो रही है। उन्होंने रुक्मिणी अक्का के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका ज्ञानानुभव से संपन्न जीवन राष्ट्र-समर्पित सार्थकता का उज्ज्वल उदाहरण था।
रुक्मिणी अक्का राष्ट्र सेविका समिति के माध्यम से हिंदू समाज के संगठन और महिलाओं को संस्कारित करने के उदात्त कार्य में सदैव सक्रिय रहीं। उनकी सहज मातृवत् आत्मीयता एवं निरंतर सक्रियता सभी को प्रभावित करती थी। उनके निधन से सेविकाएँ मातृसमान अभिभावक से वंचित हो गई हैं।
संघादर्श के मेरुसदृश सूर्यनारायण राव परिवार की उस पीढ़ी की अंतिम कड़ी भी अब इस दुनिया में नहीं रही। डॉ. मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले ने कहा, “रुक्मिणी अक्का अब स्मृतिशेष हैं।”
उन्होंने शोकाकुल परिवार एवं समिति की सभी बहनों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को सद्गति देने की प्रार्थना की है। हिंदी विवेक परिवार की ओर से उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि, ॐ शांति शांति शांति:

